मुंबई, 27 अगस्त 2026: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक का मामला अब बेहद चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गया है। जिस परीक्षा में हजारों उम्मीदवारों ने मेहनत के दम पर सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद लगाई थी, उसके पेपर लीक होने की कहानी का सिरा एक प्रेमी-प्रेमिका के रिश्ते और बाद में हुए ब्रेकअप से जुड़ गया।
मुंबई क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच के बाद छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के तीन अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आया कि कथित तौर पर पेपर एक महिला अभ्यर्थी तक पहुंचा था और बाद में उसके प्रेमी के पास भी इसकी कॉपी पहुंची। रिश्ता टूटने के बाद उसी युवक ने आयोग को पेपर लीक होने की जानकारी दी थी।
22 मार्च को हुई थी ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा
यह पूरा मामला महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर के 154 ग्रुप-B पदों पर भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा से जुड़ा है।
MPSC ने यह परीक्षा 22 मार्च 2026 को महाराष्ट्र के छह राजस्व मंडलों में आयोजित की थी।
इस परीक्षा में लगभग 44,500 उम्मीदवार शामिल हुए थे। परीक्षा का उद्देश्य सरकारी विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर के पदों पर नियुक्ति करना था।
परीक्षा के बाद परिणाम भी जारी हुआ और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना गया।
लेकिन इसके बाद परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठने लगे।
❤️🩹 कहानी में आया ‘लव एंगल’
जांच में जो कहानी सामने आई, उसने पूरे मामले को और ज्यादा सनसनीखेज बना दिया।
पुलिस के मुताबिक गौरव पाटील और ऋतुजा पाटील के बीच कथित तौर पर प्रेम संबंध था।
आरोप है कि ऋतुजा को परीक्षा से पहले कथित रूप से प्रश्नपत्र हासिल हुआ था।
इसके बाद वही प्रश्नपत्र कथित तौर पर व्हाट्सऐप के माध्यम से गौरव तक पहुंचा।
पुलिस के अनुसार, गौरव के पास पेपर इसलिए पहुंचा क्योंकि वह खुद भी परीक्षा से जुड़ी तैयारी और प्रक्रिया से संबंधित था।
📱 व्हाट्सऐप से पहुंचा कथित पेपर
जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित लीक हुआ प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही कुछ लोगों के पास पहुंच गया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, ऋतुजा ने परीक्षा से करीब दो दिन पहले कथित रूप से प्रश्नपत्र गौरव को व्हाट्सऐप के जरिए भेजा।
यानी जिस परीक्षा के प्रश्नपत्र को बेहद गोपनीय रखा जाना था, वह परीक्षा से पहले ही उम्मीदवारों तक पहुंच चुका था।
यहां से पुलिस को पूरे नेटवर्क की जांच का रास्ता मिला।
💔 ब्रेकअप के बाद खुला राज
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यहीं सामने आया।
पुलिस के मुताबिक, बाद में गौरव और ऋतुजा के रिश्ते में दरार आ गई और दोनों का ब्रेकअप हो गया।
इसके बाद गौरव ने कथित पेपर लीक की जानकारी महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग तक पहुंचाई।
उसने आयोग को ईमेल के माध्यम से परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी दी।
शुरुआत में वह मामले में एक व्हिसलब्लोअर की तरह सामने आया।
लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को उसके खुद कथित तौर पर लीक पेपर हासिल करने और मामले से जुड़े होने की जानकारी मिली।
🏆 प्रेमिका की आई सातवीं रैंक
जांच में एक और अहम बात सामने आई।
पुलिस के मुताबिक, जिस महिला अभ्यर्थी का नाम इस मामले में सामने आया, ऋतुजा ने भर्ती परीक्षा में सातवीं रैंक हासिल की थी।
यही बात जांच एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण बन गई।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित पेपर मिलने का उसकी परीक्षा में प्रदर्शन पर कितना असर पड़ा और पेपर किस तरीके से उसके पास पहुंचा था।
ऋतुजा को मामले में नोटिस जारी किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
💰 पेपर के लिए पैसे देने का भी आरोप
जांच में कथित तौर पर एक बिचौलिए का नाम भी सामने आया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, ऋतुजा के पिता अमृत पाटील ने कथित रूप से पेपर हासिल करने के लिए प्रवीण पाटील नाम के बिचौलिए से संपर्क किया था।
आरोप है कि इसके लिए करीब 5 लाख रुपये एडवांस दिए गए थे।
प्रवीण पाटील नंदुरबार में कोचिंग क्लास चलाता था और महिला अभ्यर्थी के वहां पढ़ने की बात जांच में सामने आई है।
यह जानकारी जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और पुलिस इस कथित पैसों के लेन-देन की भी जांच कर रही है।
🏢 MPSC के तीन अधिकारी भी जांच के घेरे में
मामला सिर्फ उम्मीदवारों या बाहरी लोगों तक सीमित नहीं रहा।
क्राइम ब्रांच की जांच में MPSC के तीन कर्मचारियों की कथित भूमिका सामने आने के बाद उन्हें भी गिरफ्तार किया गया।
रिपोर्टों के अनुसार इनमें:
- विश्वेश्वर नाकाटे
- गोपाल मराठे
- अभिजीत लेंडवे
के नाम सामने आए हैं।
पुलिस के मुताबिक इन अधिकारियों और कथित बिचौलिए के बीच संपर्क की जांच की जा रही है।
🚨 कुल छह लोगों की गिरफ्तारी
मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच ने मामले में कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इनमें MPSC के तीन अधिकारी भी बताए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 2 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कितने उम्मीदवार या दूसरे लोग शामिल हो सकते हैं।
📄 परीक्षा से पहले कैसे लीक हुआ पेपर?
पुलिस की जांच में आरोप है कि प्रश्नपत्र को परीक्षा से पहले ही हासिल कर लिया गया था।
इसके बाद कथित तौर पर उसकी एक अलग कॉपी या डुप्लीकेट सेट तैयार किया गया और उसे दूसरे लोगों तक पहुंचाया गया।
यह पूरी प्रक्रिया परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यही है कि परीक्षा के लिए तैयार किए गए गोपनीय प्रश्नपत्र तक बाहरी लोगों की पहुंच कैसे हुई।
👨🎓 44,500 उम्मीदवारों पर पड़ा असर
इस मामले का सबसे बड़ा असर उन हजारों उम्मीदवारों पर पड़ा है जिन्होंने परीक्षा की तैयारी में महीनों और कई बार वर्षों की मेहनत की थी।
करीब 44,500 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी।
कई उम्मीदवारों ने परीक्षा के बाद परिणाम का इंतजार किया और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद की थी।
लेकिन पेपर लीक की जांच सामने आने के बाद पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ गया।
📊 परिणाम भी जारी हो चुका था
परीक्षा के बाद 12 जून को परिणाम जारी किया गया था।
इसमें करीब 506 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए योग्य पाया गया।
इसके बाद 22 जुलाई को 488 उम्मीदवारों की अस्थायी मेरिट लिस्ट जारी की गई थी।
लेकिन बाद में कथित पेपर लीक की जांच के चलते पूरी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लग गई।
❌ MPSC ने रद्द की भर्ती परीक्षा
पेपर लीक की जांच के बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग ने ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया।
आयोग ने कहा है कि भर्ती प्रक्रिया दोबारा आयोजित की जाएगी।
अच्छी बात यह बताई गई है कि पहले परीक्षा दे चुके उम्मीदवारों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी और उनसे दोबारा परीक्षा शुल्क लेने की बात भी नहीं है।
हालांकि नई परीक्षा की तारीख बाद में घोषित की जानी है।
🕵️♂️ पुलिस अब किस बात की जांच कर रही है?
मुंबई क्राइम ब्रांच के सामने अब कई सवाल हैं।
सबसे पहला सवाल है कि मूल प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर कैसे निकला।
दूसरा सवाल है कि इसे किन-किन लोगों तक पहुंचाया गया।
तीसरा सवाल है कि क्या इसके बदले पैसे लिए गए।
और चौथा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक उम्मीदवार को फायदा पहुंचाने की कोशिश थी या इसके पीछे एक बड़ा पेपर लीक नेटवर्क काम कर रहा था।
जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
🔍 क्या यह सिर्फ एक प्रेम कहानी थी?
मामले में प्रेमी-प्रेमिका का विवाद जरूर जांच का अहम मोड़ बना, लेकिन पुलिस की जांच का दायरा इससे कहीं बड़ा है।
अगर कथित पेपर लीक में MPSC के अधिकारियों की भूमिका की पुष्टि होती है तो यह केवल दो लोगों के निजी विवाद का मामला नहीं रहेगा।
यह सरकारी भर्ती प्रक्रिया की सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला बन जाता है।
⚠️ व्हिसलब्लोअर या खुद आरोपी?
इस मामले में गौरव की भूमिका भी सबसे ज्यादा चर्चा में है।
उसने कथित तौर पर आयोग को पेपर लीक की जानकारी दी थी।
लेकिन जांच के बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार आरोपियों में शामिल किया।
एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति वास्तव में पेपर लीक का व्हिसलब्लोअर था, तो उसे परीक्षा से पहले ही इसकी जानकारी देनी चाहिए थी।
अब जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि उसने शिकायत क्यों की और उस समय उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी।
🏛️ MPSC की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करता है।
ऐसी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की गोपनीयता सबसे महत्वपूर्ण होती है।
अगर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र कुछ उम्मीदवारों तक पहुंच जाता है तो इससे पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
इस मामले ने आयोग की पेपर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
👥 सबसे बड़ा नुकसान किसका?
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नुकसान उन उम्मीदवारों का हुआ है जिन्होंने बिना किसी गलत तरीके के परीक्षा की तैयारी की।
कई उम्मीदवारों ने कोचिंग, किताबों और तैयारी पर पैसा खर्च किया।
अब उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी।
हालांकि आयोग ने दोबारा आवेदन और शुल्क से राहत देने की बात कही है, लेकिन उम्मीदवारों को फिर से तैयारी करनी पड़ेगी।
📌 पूरा मामला एक नजर में
22 मार्च 2026 — MPSC ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा आयोजित हुई।
12 जून — परीक्षा का परिणाम जारी हुआ।
22 जुलाई — अस्थायी मेरिट लिस्ट जारी हुई।
बाद में — पेपर लीक की शिकायत और जांच शुरू हुई।
जांच में — प्रेमी-प्रेमिका के रिश्ते और कथित पेपर लीक का कनेक्शन सामने आया।
26 अगस्त — मुंबई क्राइम ब्रांच ने छह आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।
26 अगस्त — MPSC ने भर्ती परीक्षा रद्द करने का फैसला किया।
27 अगस्त — मामले में प्रेम कहानी, कथित पेपर लीक और MPSC अधिकारियों की भूमिका से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आई।
