55 साल में कितना बदला वनडे क्रिकेट: रंगीन जर्सी से लेकर सुपर ओवर तक का सफर और 50 ओवर फॉर्मेट का भविष्य

नई दिल्ली | 8 अगस्त, 2026

क्रिकेट के सीमित ओवरों के प्रारूप यानी वन-डे इंटरनेशनल (ODI) ने अपने 55 साल के इतिहास में कई ऐतिहासिक बदलाव देखे हैं। 5 जनवरी 1971 को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न में खेले गए पहले एकदिवसीय मैच से शुरू हुआ यह सफर पारंपरिक सफेद कपड़ों और लाल गेंद से निकलकर आज रंगीन जर्सी, फ्लडलाइट्स और हाई-टेक तकनीक तक पहुंच चुका है। समय के साथ खेल को रोमांचक और टेलीविजन के अनुकूल बनाने के लिए इसमें कई क्रांतिकारी नियम जोड़े गए, जिसने खेल के मायने ही बदल दिए।

1. पिछले 55 वर्षों में किन बड़े नियमों और बदलावों ने बदला वनडे क्रिकेट?

  • सफेद कपड़ों से रंगीन जर्सी तक: शुरुआती दौर में वनडे मैच भी टेस्ट की तरह सफेद कपड़ों और लाल गेंद से खेले जाते थे। लेकिन 1970 के दशक के अंत में कैरी पैकर की ‘वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट’ और 1992 के विश्व कप ने रंगीन कपड़ों (Coloured Jerseys) और दूधिया रोशनी में खेले जाने वाले डे-नाइट मैचों की शुरुआत की, जिससे यह खेल ग्लैमरस बन गया।
  • ओवरों की संख्या में बदलाव: शुरुआत में वनडे मैच 60-60 ओवरों के होते थे। बाद में गेंदबाजों और बल्लेबाजों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए 1987 के विश्व कप से इसे घटाकर 50 ओवर प्रति पारी कर दिया गया, जो आज भी जारी है।
  • पावरप्ले और फिल्डिंग के नियम: खेल को तेज और आक्रामक बनाने के लिए पावरप्ले की शुरुआत हुई। शुरुआती 10 ओवरों में घेरे के बाहर कम से कम फील्डर रखने के नियम ने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका दिया। बाद में निष्पक्षता के लिए दो नई गेंदों (प्रत्येक छोर से एक) का नियम लाया गया।
  • सुपर ओवर और टाई का समाधान: पहले टाई होने पर मैच का फैसला ड्रॉ मान लिया जाता था या टॉस पर छोड़ दिया जाता था, लेकिन रोमांच बनाए रखने के लिए ‘सुपर ओवर’ जैसे नियम ने टाई मुकाबलों का रोमांचक अंत तय किया।
  • तकनीक का दखल (DRS): अंपायर के गलत फैसलों से बचने के लिए थर्ड अंपायर, हॉक-आई, स्निकोमीटर और डीआरएस (DRS) जैसी तकनीकों ने खेल में पारदर्शिता बढ़ाई है।

2. क्या होगा 50 ओवर फॉर्मेट का फ्यूचर?

टी20 और टी10 लीग के इस दौर में जहां क्रिकेट का मिजाज तेज हो गया है, वहीं 50 ओवर के भविष्य को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं:

  • आईसीसी और द्विपक्षीय सीरीज का संकट: टी20 लीग्स की बाढ़ और खिलाड़ियों के वर्कलोड के कारण द्विपक्षीय (Bilateral) वनडे सीरीज के प्रति दर्शकों का उत्साह थोड़ा कम हुआ है। कई पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ इस बात की चर्चा करते हैं कि क्या आने वाले समय में वनडे फॉर्मेट सीमित रह जाएगा।
  • आईसीसी टूर्नामेंट्स की जान: इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि ‘आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप’ (ICC Men’s Cricket World Cup) आज भी क्रिकेट का सबसे प्रतिष्ठित और बड़ा वैश्विक टूर्नामेंट बना हुआ है। इसमें खिलाड़ियों की असली तकनीकी क्षमता, धीरज और रणनीति की परीक्षा होती है, जिसे दर्शक आज भी बड़े चाव से देखते हैं।
  • संयोजन और संतुलन: टेस्ट और टी20 के बीच की कड़ी यानी वनडे क्रिकेट का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि क्रिकेट बोर्ड इसे कैसे रोमांचक बनाए रखते हैं। जब तक रोमांचक मुकाबले और विश्व कप जैसी मेगा इवेंट्स होते रहेंगे, तब तक 50 ओवर का यह पारंपरिक और आधुनिक फॉर्मेट क्रिकेट प्रेमियों के दिलों पर राज करता रहेगा।

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