भोपाल | 30 जुलाई, 2026
मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग खरीदी की सीमा बढ़ाने और ई-टोकन व्यवस्था को स्थगित करने के सरकार के बड़े ऐलान के बावजूद राजधानी भोपाल में किसानों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर और अन्य जिलों से आए हजारों किसानों ने बुधवार को भोपाल में जबरदस्त प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री निवास घेराव के दौरान पुलिस और किसानों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली।
1. सरकार का ऐलान: क्या फैसला लिया गया है?
किसान आंदोलन और मंत्रालय में चली लंबी बैठकों के बाद मोहन सरकार ने निम्नलिखित राहत देने की घोषणा की है:
- 60% मूंग खरीदी: अब पात्र किसानों से उनकी कुल उपज का केवल 25% के बजाय 60% (लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़) मूंग एमएसपी पर खरीदी जाएगी।
- तारीखों में विस्तार: स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है, जबकि उपार्जन की आखिरी तारीख 20 अगस्त तक बढ़ा दी गई है।
- ई-टोकन स्थगित: किसानों की शिकायत के बाद खाद वितरण और खरीदी से जुड़ी ‘ई-टोकन व्यवस्था’ को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है।
2. सरकार के ऐलान के बाद भी क्यों नाराज हैं किसान?
सरकार द्वारा कोटा 25% से बढ़ाकर 60% करने और अन्य रियायतें देने के बावजूद किसानों में असंतोष की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
- 100% खरीदी की मांग: किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी लागत लगाकर बंपर फसल पैदा की है। सरकार जब तक पूरी 100% फसल (या 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) एमएसपी पर खरीदने का लिखित आदेश नहीं देती, तब तक उनकी लड़ाई पूरी नहीं मानी जाएगी।
- शर्तों और सिस्टम पर अविश्वास: किसानों का आरोप है कि पिछली बार भी पोर्टल, स्लॉट बुकिंग और गुणवत्ता जांच के नाम पर उनकी फसल को ‘सड़े या जहर’ बताने की कोशिश की गई और अधिकांश किसानों की फसल रिजेक्ट कर दी गई। वे केवल मौखिक या आंशिक राहत के बजाय पुख्ता और व्यावहारिक नीति चाहते हैं।
- खाद संकट और अन्य मुद्दे: मूंग के अलावा डीएपी और अन्य उर्वरकों के लिए वितरण व्यवस्था में हो रही भारी परेशानियों से किसान अंदर से बेहद आहत हैं।
3. पुलिस बैरिकेडिंग टूटी: क्या पुलिस ने जानबूझकर घुसने दिया?
भोपाल के वीर सावरकर सेतु और रोशनपुरा चौराहे के पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए पुलिस ने 5 से 7 लेयर की मजबूत बैरिकेडिंग और बड़ी-बड़ी बसों को खड़ा किया था।
- उग्र प्रदर्शन: बैरिकेड्स देखकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने बैरिकेड्स को उखाड़ कर फेंक दिया, बसों पर चढ़ गए और पुलिस के सुरक्षा घेरे को जबरन तोड़ते हुए आगे बढ़ गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई और कई किसानों के कपड़े तक फट गए। कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर भी विरोध जताया।
- क्या पुलिस ने जानबूझकर घुसने दिया? प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इतनी भारी भीड़ और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के सैलाब को एकदम से रोकने पर स्थिति और अधिक हिंसक हो सकती थी। किसी बड़े उपद्रव या जनहानि को टालने के लिए पुलिस ने संयम बरता और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से जगह-जगह हल्का दबाव बनाकर भीड़ को संभालने की रणनीति अपनाई, हालांकि किसानों के उग्र तेवरों के आगे शुरुआती बैरिकेडिंग नाकाफी साबित हुई।
4. अब आगे क्या करेंगे किसान? (अगला कदम)
सरकार के फैसलों और जमीनी हालात को देखते हुए किसान संगठनों का अगला रुख इस प्रकार है:
- समीक्षा और गांव-गांव चर्चा: हालांकि सरकार ने कुछ मांगें मान ली हैं, लेकिन किसान नेता अपने साथियों और धरने पर बैठे अन्य किसानों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं।
- पूर्ण मांग पूरी होने तक नजर: किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक 100% खरीदी का स्पष्ट शासनादेश जारी नहीं होता और खाद-बीज की कालाबाजारी पूरी तरह बंद नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष और विरोध-प्रदर्शन अलग-अलग रूपों में जारी रहेगा। देर रात तक कई किसानों ने सड़कों पर ही डेरा डाले रखा, हालांकि प्रशासन लगातार स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास में जुटा है
