अयोध्या में बड़ा राजनैतिक-कानूनी भूचाल: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की रडार पर आए चंपत राय और अनिल मिश्रा; साजिश रचने के आरोप और जेल जाने की संभावनाओं पर गरमाई सियासत; आज ट्रस्ट की बैठक में होगा इस्तीफे पर फैसला

स्थान: अयोध्या धाम

दिनांक: 6 जुलाई, 2026

विशेष ब्यूरो, अयोध्या:

राम जन्मभूमि में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और चढ़ावे के साथ हुए कथित महा-घोटाले (Scam) ने देश की राजनीति और धार्मिक हलकों में एक भीषण भूचाल ला दिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) और ट्रस्टी व प्रशासक डॉ. अनिल मिश्रा (Dr. Anil Mishra) पर आरोप लग रहे हैं कि उनके नाक के नीचे लंबे समय तक मंदिर के दानपात्रों से ‘डकैती’ होती रही और उन्होंने इस सच को सामने लाने के बजाय दबाने की कोशिश की।

विशेष जांच टीम (SIT) की जांच का दायरा अब न केवल दान चोरी बल्कि साल 2021 से लेकर अब तक ट्रस्ट द्वारा की गई करोड़ों रुपयों की विवादित जमीन खरीदारियों तक फैल गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार के एक सनसनीखेज बयान के बाद कानूनी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या चंपत राय, अनिल मिश्रा और संगठन मंत्री गोपाल राव इस पूरे मामले में आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) के तहत सह-आरोपी बनेंगे और आने वाले दिनों में उन्हें जेल जाना पड़ेगा?

SIT का चौंकाने वाला खुलासा: ‘चंदी चोरी’ नहीं, हर दिन उड़ाए जा रहे थे ₹6 से ₹8 लाख

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित 3 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट और बैंक अधिकारियों से हुई पूछताछ में इस संगठित लूट (Insider Operation) का खौफनाक पैटर्न सामने आया है:

  • दैनिक जमा राशि का अंतर: बैंक अधिकारियों ने एसआईटी को बताया कि चोरी का मामला उजागर होने से पहले तक राम मंदिर ट्रस्ट के बैंक खातों में दैनिक नकद जमा (Daily Cash Deposit) का औसत लगभग ₹16 लाख से ₹18 लाख था। लेकिन जैसे ही जांच शुरू हुई और संदिग्धों को हटाया गया, यह दैनिक जमा अचानक बढ़कर ₹24 लाख से ₹26 लाख प्रति दिन हो गया।
  • करोड़ों का गबन: इस गणित के आधार पर एसआईटी का अनुमान है कि मंदिर परिसर से प्रतिदिन करीब ₹6 लाख से ₹8 लाख की नकदी गायब की जा रही थी। महाकुंभ और विशेष त्योहारों के दौरान यह लूट अपने चरम पर थी।
  • मोजे और टॉयलेट का खेल: सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर सामने आया है कि मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला (दान काउंटर कर्मचारी) सहित 8 नामजद आरोपी नोटों की गड्डियों को अपनी जेबों और मोजों में छिपाते थे। इसके बाद वे इसे मंदिर के वॉशरुम में छिपा देते थे और ड्यूटी खत्म होने के बाद थोड़े-थोड़े अंतराल पर बाहर ले जाते थे।

नाक के नीचे डकैती: 3 महीने पहले दी गई चेतावनियों को क्यों किया गया दरकिनार?

सबसे बड़ा और गंभीर सवाल चंपत राय और अनिल मिश्रा की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। जांच में सामने आया है कि करीब 3 महीने पहले ही कुछ सेवादारों और ट्रस्ट के अंदरूनी ऑडिटर्स ने चढ़ावे की गिनती में गंभीर विसंगतियों (Anomalies) की शिकायत इन अधिकारियों से की थी।

चोरी छिपाने का गंभीर आरोप:

मई के अंतिम सप्ताह में जब पुख्ता सबूत हाथ लग गए, तब भी पुलिस में आधिकारिक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज नहीं कराई गई। सूत्रों के मुताबिक, जिम्मेदार पदाधिकारियों का मानना था कि यदि पुलिस केस हुआ तो राम मंदिर और ट्रस्ट की बदनामी होगी, इसलिए आरोपियों से कुछ लाख रुपये की ‘रिकवरी’ करके मामले को अंदर ही अंदर रफा-दफा करने का प्रयास किया गया। यही वह बिंदु है जहां कानूनी विशेषज्ञ मान रहे हैं कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 (आपराधिक साजिश) और सबूतों को छिपाने के तहत चंपत राय और अनिल मिश्रा को भी सह-आरोपी बनाया जा सकता है।

विनय कटियार का बड़ा बयान: “पैसा सीधे तौर पर उड़ाया गया है, जेल जा सकते हैं बड़े लोग”

राम मंदिर आंदोलन के सबसे बड़े चेहरों में से एक विनय कटियार ने इस पूरे मामले पर अपनी ही पार्टी के जुड़े लोगों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने हाल ही में मीडिया से बात करते हुए साफ कहा:

“यह पूरी तरह साफ है कि रामलला के धन को सीधे तौर पर ठिकाने लगाया गया है (Siphoned off)। मैंने इस गंभीर विषय पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से चर्चा की है और उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। कानून अपना काम कर रहा है और बहुत मुमकिन है कि आने वाले दिनों में चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा को जेल की हवा खानी पड़े। हमने इस मंदिर के लिए बलिदान दिए हैं, आस्था की इस खुली लूट को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”

राजनैतिक रार: विपक्ष का आरोप— ‘छोटी मछलियों को फंसाकर मगरमच्छों को बचा रही सरकार’

इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने जिन लोगों के खिलाफ सख्त धाराओं (BNS 316, 317 आदि) के तहत मुकदमा दर्ज किया है, उनमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, और टिन्नू यादव जैसे नाम शामिल हैं।

नामजद आरोपीविभाग और पदवर्तमान स्थिति और कार्रवाई
अविनाश शुक्लामुख्य कैशियर/काउंटर प्रभारीएसआईटी की गिरफ्त में; ₹15 लाख के संदिग्ध बैंक लेन-देन का खुलासा।
टिन्नू व मनीष यादवकाउंटिंग स्टाफसीसीटीवी फुटेज के आधार पर न्यायिक हिरासत में।
चंपत राय व अनिल मिश्रामहासचिव और मुख्य ट्रस्टीनैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा सौंपा; एसआईटी द्वारा बंद कमरे में पूछताछ जारी।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि जिन छोटे संविदा कर्मचारियों (Contractual Staff) को नामजद किया गया है, वे बिना शीर्ष संरक्षण के इतनी बड़ी डकैती को अंजाम नहीं दे सकते थे। विपक्ष ने मांग की है कि जब तक प्रधानमंत्री के पूर्व सचिव रहे नृपेन्द्र मिश्रा (जो निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं), चंपत राय और अनिल मिश्रा पर केस दर्ज नहीं होता, तब तक जांच केवल एक आईवॉश (छलावा) है।

आज राम मंदिर परिसर में आपातकालीन बैठक: क्या मंजूर होगा इस्तीफा?

आज (6 जुलाई) दोपहर 3:00 बजे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद अहम और आपातकालीन बैठक होने जा रही है। सुरक्षा कारणों और भारी जन-आक्रोश को देखते हुए इस बैठक का स्थान मणिराम दास छावनी से बदलकर सीधे राम मंदिर परिसर के भीतर स्थानांतरित कर दिया गया है।

कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की अगुवाई में होने वाली इस बैठक में कुल 15 में से 11 वोटिंग अधिकार वाले सदस्य हिस्सा लेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफों पर अंतिम निर्णय लेना है। चूंकि चंपत राय आजीवन ट्रस्टी हैं, इसलिए वे महासचिव का पद छोड़ कर भी ट्रस्ट का हिस्सा बने रह सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, यदि इनके इस्तीफे स्वीकार होते हैं, तो आरएसएस के पूर्वी यूपी के संघचालक कृष्णमोहन (आईएफएस सेवानिवृत्त) और बजरंग दल के नीरज दौनेरिया को ट्रस्ट में नई और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। यूपी सरकार ने एसआईटी को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 जुलाई तक का समय बढ़ा दिया है।

राम मंदिर परिसर में चल रही ट्रस्ट की बैठक के लाइव फैसलों, एसआईटी की आगामी गिरफ्तारियों और अयोध्या भूमि सौदों की विस्तृत जांच रिपोर्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *