पूर्वोत्तर के लिए ऐतिहासिक दिन: केंद्र, असम और नागालैंड के बीच त्रिपक्षीय समझौता; अगले साल 1-2 राज्यों को छोड़ पूरे पूर्वोत्तर से हटेगा AFSPA

दिनांक: 12 जून, 2026

नई दिल्ली: पूर्वोत्तर भारत (Northeast India) में स्थायी शांति और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में केंद्र सरकार, असम और नागालैंड के बीच एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर गृह मंत्री ने घोषणा की कि अगले साल (2027) तक केवल एक या दो राज्यों को छोड़कर पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम यानी अफ्स्पा (AFSPA) को पूरी तरह से हटा लिया जाएगा।

30 साल पुराना सीमा और तेल विवाद सुलझा

यह त्रिपक्षीय समझौता असम और नागालैंड के बीच विवादित सीमा क्षेत्र (Disputed Area Belt) में खनिज तेल और प्राकृतिक गैस की खोज तथा उनके दोहन को लेकर हुआ है।

  • तीन दशकों का गतिरोध खत्म: क्षेत्राधिकार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों के कारण इस क्षेत्र में तेल की खोज का काम पिछले 30 से अधिक वर्षों से पूरी तरह ठप पड़ा था।
  • आर्थिक समृद्धि के खुलेंगे द्वार: इस समझौते के बाद कच्चे तेल की निकासी की क्षमता 1,000-1,500 बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 10 गुना तक हो सकती है। अमित शाह ने बताया कि केवल एक तेल क्षेत्र में ही ₹15,000 करोड़ से अधिक के तेल भंडार मिलने की संभावना है, जो देश की विदेशी तेल पर निर्भरता को कम करेगा।

अगले साल ‘अफ्स्पा मुक्त’ होने की राह पर पूर्वोत्तर

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि पूर्वोत्तर के जिन इलाकों से अफ्स्पा का दायरा सिकुड़ रहा है, वह इस बात का स्पष्ट प्रतीक है कि क्षेत्र में उग्रवाद खत्म हो रहा है और शांति लौट रही है। उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि अगले साल तक एक या दो राज्यों को छोड़कर, हम पूरे पूर्वोत्तर से अफ्स्पा को वापस ले लेंगे।”

विशेषज्ञों का मानना है कि जिन एक-दो राज्यों में सुरक्षा कारणों से यह कानून अभी लागू रह सकता है, उनमें मुख्य रूप से मणिपुर और नागालैंड के कुछ संवेदनशील हिस्से शामिल हो सकते हैं। वर्तमान में यह कानून असम, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के कुछ चुनिंदा हिस्सों में ही प्रभावी है।

सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का उत्कृष्ट उदाहरण

इस ऐतिहासिक समझौते के दौरान केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो भी मौजूद थे। गृह मंत्री ने दोनों मुख्यमंत्रियों द्वारा दिखाए गए ‘नेशन-फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) के जज्बे की सराहना की और इसे सहकारी संघवाद का सबसे बेहतरीन उदाहरण बताया।

साल 2019 के बाद से केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के विभिन्न उग्रवादी गुटों और राज्य सरकारों के साथ कुल 12 शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में हिंसक घटनाओं में लगभग 80% की भारी कमी दर्ज की गई है।

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