बैंकॉक के ब्रह्मा मंदिर ब्लास्ट मामले में बड़ा फैसला: थाईलैंड की कोर्ट ने 2 उइगर मुस्लिमों को दोषी करार दिया, सुनाई फांसी की सजा

दिनांक: 12 जून, 2026

बैंकॉक: थाईलैंड की एक अदालत ने करीब 11 साल पुराने बैंकॉक के प्रसिद्ध एरावन (ब्रह्मा) मंदिर बम ब्लास्ट मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। दक्षिण बैंकॉक आपराधिक अदालत ने गुरुवार (11 जून) को दो उइगर मुस्लिम शख्सों—युसूफ मियराली और बिलाल मोहम्मद (उर्फ एडेम कराडाग)—को इस आत्मघाती और पूर्व नियोजित हमले का दोषी पाते हुए फांसी की सजा (सजा-ए-मौत) सुनाई है। इस भयावह आतंकी हमले में 20 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें ज्यादातर विदेशी पर्यटक थे।

क्या थी वह प्रलयकारी घटना?

17 अगस्त, 2015 की शाम बैंकॉक के सबसे व्यस्त वाणिज्यिक केंद्र में स्थित हिंदू देवता भगवान ब्रह्मा के एरावन मंदिर में एक लावारिस बैकपैक (पिठ्ठू बैग) में रखा बम फट गया था।

  • भारी तबाही: धमाका इतना शक्तिशाली था कि वहां मौजूद श्रद्धालु और पर्यटक इसकी चपेट में आ गए। हादसे में 20 लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था, जिनमें 5 चीनी नागरिक और 2 हांगकांग के पर्यटक शामिल थे। इसके अलावा 120 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
  • दशक लंबी कानूनी लड़ाई: इस मामले की अदालती कार्यवाही लगभग 11 साल तक चली। कोरोना महामारी, अनुवादकों (इंटरप्रेटर) की अनुपलब्धता और सैकड़ों गवाहों के बयानों दर्ज होने के कारण इस फैसले में लंबा समय लगा।

अदालत का कड़ा रुख: “हर्षेस्ट पेनल्टी ही एकमात्र विकल्प”

चार जजों की पीठ ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि दोनों आरोपियों ने जानबूझकर इस नरसंहार को अंजाम दिया था, जो कई अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। अदालत ने कहा, “प्रतिवादियों ने एक ऐसा कृत्य किया जिसने कई मासूमों की जान ली। कानून के तहत जो सबसे सख्त सजा उपलब्ध है, वह है मौत की सजा और कोर्ट इन्हें यही सजा सुनाता है।”

अदालत ने अभियोजन पक्ष के करीब 10 मुख्य गवाहों और वैज्ञानिक सबूतों (जैसे घटना के समय उनके मोबाइल फोन लोकेशन और टैक्सी ड्राइवर के बयान) को विश्वसनीय माना। अदालत ने आरोपियों के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने पुलिस पर हिरासत में प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।

आरोपियों का विरोध, वकील करेंगे अपील

अदालत का फैसला सुनते ही कोर्ट रूम में मौजूद आरोपी युसूफ मियराली भावुक हो गया और उसने अंग्रेजी व थाई भाषा में चिल्लाते हुए कहा, “यह अन्याय है! थाईलैंड की न्याय प्रणाली खत्म हो चुकी है। मैंने कुछ गलत नहीं किया।”

बचाव पक्ष के वकील चूचैट कानपई ने संवाददाताओं से कहा कि वे इस फैसले को स्वीकार नहीं करते हैं। उनके पास अपील दायर करने के लिए 30 दिन का समय है और वे जल्द ही ऊपरी अदालत में इस सजा के खिलाफ अपील करेंगे, क्योंकि उनके अनुसार कोर्ट ने कार्यवाही के दौरान प्रतिवादियों के साथ हुए व्यवहार के कई पहलुओं पर पूरी तरह विचार नहीं किया है।

हमले के पीछे क्या थी वजह?

सुरक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला एक प्रतिशोध (Revenge Plot) का हिस्सा था। दरअसल, इस धमाके से ठीक एक महीने पहले थाईलैंड की तत्कालीन सैन्य सरकार ने 109 उइगर मुस्लिमों को जबरन डिपोर्ट कर चीन वापस भेज दिया था, जहां मानवाधिकार संगठनों के अनुसार इस अल्पसंख्यक समुदाय पर कथित तौर पर धार्मिक और सांस्कृतिक दमन किया जाता है। माना जाता है कि इसी डिपोर्टेशन का बदला लेने के लिए इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल और चीनी पर्यटकों को निशाना बनाया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *