दिनांक: 6 जून, 2026
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार (5 जून, 2026) को सुस्ती और गिरावट का माहौल रहा। निवेशकों को उम्मीद थी कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीति में राहत देगा, लेकिन केंद्रीय बैंक के सख्त रुख ने बाजार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
बाजार क्यों टूटा? (मुख्य कारण)
शेयर बाजार में इस गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण रहे:
- RBI का सख्त रुख: निवेशकों को उम्मीद थी कि RBI रेपो रेट में कटौती करेगा, लेकिन केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा।
- महंगाई और विकास के अनुमान: RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई (CPI) का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है और GDP विकास दर के अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है। यह ‘कम विकास और अधिक महंगाई’ का संकेत निवेशकों को पसंद नहीं आया।
- कैपिटल मार्केट स्टॉक्स पर सख्ती: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया कि 1 जुलाई, 2026 से कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (CMIs) के लिए सख्त लेंडिंग नॉर्म्स लागू होंगे। इस खबर से ब्रोकरेज और एक्सचेंज से जुड़े शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई।
- वैश्विक तनाव: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार की धारणा पर भी पड़ा।
कौन से स्टॉक सबसे ज्यादा बिखरे?
बाजार में चौतरफा बिकवाली के बीच कई सेक्टर और शेयर दबाव में रहे:
- ब्रोकरेज और एक्सचेंज स्टॉक्स: RBI की नई लेंडिंग गाइडलाइन्स के चलते BSE के शेयरों में 4.5% से अधिक, Angel One में 4% से अधिक और MCX में करीब 3.82% की गिरावट आई।
- मेटल और IT सेक्टर: RBI द्वारा GDP अनुमान घटाने के बाद मेटल सेक्टर के शेयरों पर बुरा असर पड़ा, जबकि IT शेयरों में हालिया रैली के बाद मुनाफावसूली (Profit Booking) देखी गई।
- अन्य प्रमुख गिरावट: Hindalco (-2.99%), TCS (-2.01%), और Coal India (-1.99%) जैसे शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा।
बाजार का प्रदर्शन (5 जून, 2026)
- Nifty 50: 23,366.70 के स्तर पर बंद हुआ, जिसमें 49.85 अंकों की गिरावट रही।
- Sensex: 74,243.34 पर बंद हुआ, जिसमें 116.66 अंकों की कमी दर्ज की गई।
निष्कर्ष: विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार फिलहाल RBI की नई नीतियों और आर्थिक आंकड़ों के बीच सामंजस्य बैठाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजरें कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक संकेतों पर टिकी रहेंगी।
