नई दिल्ली/चेन्नई/गुवाहाटी। 07 अप्रैल 2026
असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान आज शाम थम जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने मंगलवार शाम 5 बजे से ‘साइलेंस पीरियड’ लागू करने की घोषणा की है, जो मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले शुरू होता है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत इस अवधि में सभी प्रकार के चुनाव प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उम्मीदवार और राजनीतिक दल इस दौरान न तो जनसभाएं कर सकेंगे, न ही रैलियां, रोड शो या किसी प्रकार का जनसंपर्क अभियान चला सकेंगे।
आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। बल्क SMS, फोन कॉल, ऑनलाइन प्रचार या किसी भी डिजिटल माध्यम से वोट मांगना भी इस अवधि में प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा, बाहर से आए राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नेताओं को, जो संबंधित राज्य के मतदाता नहीं हैं, प्रचार समाप्त होते ही क्षेत्र छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी बीच पुडुचेरी को लेकर सियासी बहस भी तेज हो गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देने में कोई रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी की विधानसभा 14 बार राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है, लेकिन केंद्र सरकार ने हर बार इसे नजरअंदाज किया है।
स्टालिन ने इसे लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि केंद्र को पुडुचेरी के लोगों की मांग का सम्मान करना चाहिए। यह मुद्दा चुनावी माहौल में एक प्रमुख राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साइलेंस पीरियड के दौरान मतदाताओं को बिना किसी बाहरी प्रभाव के अपने वोट का फैसला लेने का अवसर मिलता है। वहीं, पुडुचेरी के राज्यत्व का मुद्दा स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अब सभी की नजरें मतदान दिवस पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इन राज्यों में सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।
