19 मार्च 2026
भारत में छह यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लिए जाने का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। यूक्रेन ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे गंभीर मामला बताया है, जबकि भारत ने कहा है कि इस पर अंतिम फैसला अदालत करेगी।
क्या है पूरा मामला
समाचार एजेंसी के अनुसार, यूक्रेन के छह नागरिकों को भारत में हिरासत में लिया गया और 16 मार्च 2026 को उन्हें पटियाला हाउस कोर्ट की NIA अदालत में पेश किया गया।
इन पर आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति मिज़ोरम में प्रवेश किया और कथित रूप से गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल थे।
यूक्रेन ने जताई आपत्ति
भारत में यूक्रेन के दूतावास ने इस मामले पर बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई रूसी पक्ष से मिली जानकारी के आधार पर शुरू हुई।
दूतावास ने चिंता जताते हुए कहा कि इस मामले में राजनीतिक पहलू हो सकता है और निष्पक्ष जांच की जरूरत है।
यूक्रेन ने यह भी साफ किया कि वह किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है और खुद आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख रखता है।
भारत का क्या कहना है
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जिस इलाके में ये लोग गए थे, वहां जाने के लिए विशेष अनुमति जरूरी होती है।
उन्होंने कहा,
“क्या उनके पास जरूरी परमिट था या नहीं, इसका फैसला अदालत करेगी। मामला कोर्ट में है और वहीं सच्चाई सामने आएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में NIA द्वारा जारी जानकारी को देखना जरूरी होगा।
दोनों देशों के संबंधों का जिक्र
यूक्रेन ने अपने बयान में भारत के साथ संबंधों को मजबूत बताते हुए कहा कि दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
साथ ही यूक्रेन ने उम्मीद जताई कि इस मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार की जाएगी।
आगे क्या होगा
यह मामला अब अदालत में है और जांच एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में अदालत के फैसले के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
निष्कर्ष: यूक्रेनी नागरिकों की हिरासत का मामला भारत और यूक्रेन के बीच चर्चा का विषय बन गया है। जहां यूक्रेन ने चिंता जताई है, वहीं भारत ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए फैसला अदालत पर छोड़ दिया है।

