दिनांक: 10 जून, 2026
प्रकृति की अद्भुत दुनिया में दक्षिण अफ्रीका के पेड़ों पर रहने वाले एक विशेष मेंढक की प्रजाति चर्चा का विषय बनी हुई है। इन्हें ‘ग्रे फोम-नेस्ट ट्री फ्रॉग’ (Grey Foam-Nest Tree Frog) कहा जाता है। ये मेंढक अपने अंडों को सुरक्षित रखने के लिए पेड़ों की टहनियों पर ऐसे घोंसले बनाते हैं, जो बिल्कुल ‘बादलों’ या सफेद झाग (Foam) जैसे दिखाई देते हैं।
क्या है इनका यह अनोखा अंदाज?
इन मेंढकों की सबसे बड़ी विशेषता उनका प्रजनन का तरीका है। बरसात के मौसम (अक्टूबर से फरवरी) में, मादा मेंढक पानी के ऊपर लटकी हुई टहनियों का चुनाव करती है। इसके बाद:
- झाग का निर्माण: मादा एक विशेष प्रकार का तरल पदार्थ स्रावित करती है। इस प्रक्रिया में नर और मादा अपने पिछले पैरों का इस्तेमाल एक ‘व्हिस्क’ (Whisk) की तरह करते हैं, जिससे वह तरल पदार्थ तेजी से झाग में बदल जाता है।
- बादल जैसा घोंसला: यह झाग सूखने पर एक सफेद, बादलों जैसे दिखने वाले सख्त गोले में बदल जाता है, जो टहनी से चिपका रहता है।
यह घोंसला क्यों है खास?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ये ‘बादलों’ वाले घोंसले किसी इंजीनियरिंग चमत्कार से कम नहीं हैं:
- अंडों की सुरक्षा: यह झाग अंडों को सूखने से बचाता है और उन्हें शिकारियों (जैसे कीड़े या पक्षी) की नजरों से दूर रखता है।
- सुरक्षित विकास: जब अंडों से टैडपोल (मेंढक के बच्चे) निकल आते हैं, तो वे झाग के अंदर सुरक्षित रहते हैं और कुछ दिनों बाद सीधे नीचे बने पानी के स्रोत में गिर जाते हैं, जहाँ वे अपना आगे का विकास पूरा करते हैं।
- अनुकूलन: ये मेंढक भीषण गर्मी में भी खुद को जिंदा रखने में माहिर हैं। इनका रंग तापमान के अनुसार बदल सकता है—दिन की तेज गर्मी में ये सफेद हो जाते हैं ताकि सूर्य की रोशनी को परावर्तित कर शरीर को ठंडा रख सकें, जबकि रात में ये पेड़ की छाल से मेल खाने वाले गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं।
प्रकृति का अद्भुत संतुलन
इन मेंढकों को ‘वॉटरप्रूफ फ्रॉग’ भी कहा जाता है क्योंकि इनकी त्वचा नमी को अंदर रोकने में बहुत कारगर है। इसके अलावा, इनका अपशिष्ट पदार्थ उत्सर्जित करने का तरीका (यूरिक एसिड के रूप में) इन्हें जल की कमी वाले इलाकों में जीवित रहने में मदद करता है।
यह जीव साबित करता है कि प्रकृति के पास कठिन परिस्थितियों में भी जीवन को सुरक्षित रखने के कितने अनूठे और रचनात्मक तरीके मौजूद हैं।
