मप्र पर बढ़ता कर्ज का बोझ: डॉ. मोहन यादव सरकार फिर लेगी 2,800 करोड़ रुपये का नया कर्ज; 8 और 22 साल के बॉन्ड जारी कर जुटाएगी राशि, कुल देनदारी 5 लाख करोड़ के पार

दिनांक: 23 जून, 2026

विशेष संवाददाता, भोपाल:

मध्य प्रदेश की माली हालत (आर्थिक स्थिति) को पटरी पर बनाए रखने और विकास योजनाओं की निरंतरता के लिए राज्य की डॉ. मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से बड़ा कर्ज लेने जा रही है. वित्त विभाग के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के माध्यम से 2,800 करोड़ रुपये का नया कर्ज जुटाने जा रही है. इसके लिए बकायदा अधिसूचना जारी कर दी गई है.

इस ताजा कर्ज के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार पर कुल संचयी देनदारी (टोटल डेट) का आंकड़ा 5 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है, जिसने राज्य के अर्थशास्त्रियों और विपक्ष की चिंताओं को बढ़ा दिया है.

8 और 22 साल की अवधि के बॉन्ड जारी करेगी सरकार

वित्त विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस कर्ज को जुटाने के लिए सरकार दो अलग-अलग अवधियों के सरकारी बॉन्ड (Securities) बाजार में जारी करेगी:

  • 1,400 करोड़ रुपये का पहला हिस्सा: यह कर्ज 8 वर्ष की अवधि के लिए लिया जा रहा है, जिसे सरकार को साल 2034 तक चुकाना होगा.
  • 1,400 करोड़ रुपये का दूसरा हिस्सा: यह दीर्घकालिक कर्ज 22 वर्ष की अवधि के लिए लिया जा रहा है, जिसकी परिपक्वता (मैच्योरिटी) साल 2048 में होगी.

इन बॉन्ड्स की नीलामी आगामी बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुंबई कार्यालय में डिजिटल माध्यम से की जाएगी, और कर्ज की यह राशि 25 जून तक सरकार के खाते में आ जाएगी.

वित्तीय वर्ष 2026-27 का दूसरा बड़ा कर्ज; लाडली बहना समेत कई योजनाओं का दबाव

मौजूदा वित्तीय वर्ष (2026-27) में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बाजार से लिया जाने वाला यह दूसरा बड़ा कर्ज है. इससे पहले अप्रैल और मई के महीनों में भी सरकार ने बजटीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कर्ज लिया था.

क्यों पड़ रही है कर्ज की जरूरत?:

राज्य सरकार पर इस समय ‘लाडली बहना योजना’, ‘किसान कल्याण योजना’, और मुफ्त राशन व आवास जैसी कई लोक-कल्याणकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का भारी वित्तीय दबाव है. इन योजनाओं के लिए हर महीने हजारों करोड़ रुपये की नगद राशि की आवश्यकता होती है. इसके अलावा, प्रदेश में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (सड़क, मेट्रो और सिंचाई परियोजनाएं) की गति को बनाए रखने के लिए भी इस पूंजी की सख्त जरूरत बताई जा रही है.

विपक्ष हमलावर: “मप्र के हर नागरिक पर बढ़ा कर्ज का बोझ”

सरकार के इस फैसले पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है. नेता प्रतिपक्ष ने भोपाल में जारी एक बयान में कहा: “मोहन यादव सरकार प्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेल रही है. कुल कर्ज 5 लाख करोड़ रुपये के पार निकल जाना यह साबित करता है कि सरकार का वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह फेल हो चुका है. आज प्रदेश का हर नवजात बच्चा भी हजारों रुपये के कर्ज के साथ पैदा हो रहा है. सरकार घी पीने के लिए कर्ज लेने की नीति पर चल रही है.”

सरकार की सफाई: “FRBM एक्ट के दायरे में है कर्ज”

विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि विकासशील राज्यों के लिए कर्ज लेना एक सामान्य और वैधानिक प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लिया जा रहा यह कर्ज पूरी तरह से एफआरबीएम (FRBM) एक्ट के नियमों और निर्धारित जीडीपी (GDP) सीमा के भीतर ही है. इस राशि का उपयोग केवल परिसंपत्तियों के निर्माण और जनहित की योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने में किया जा रहा है.

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