काठमांडू | 10 अगस्त, 2026
नेपाल के प्रधानमंत्री पद की कमान संभालने के लगभग चार महीने बाद बालेंद्र शाह (Balendra Shah) ने अपनी ही एक पुरानी कूटनीतिक नीति में बड़ा बदलाव किया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही वे व्यक्तिगत या अकेले में (One-on-One) किसी भी विदेशी राजदूत से मिलने से बचते रहे थे और हमेशा सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते थे। लेकिन सोमवार को उन्होंने इस नियम को तोड़ते हुए पहले भारत के राजदूत और उसके बाद चीन के राजदूत से अकेले में आधिकारिक मुलाकात की। इस कदम को नेपाल की विदेश नीति और कूटनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
1. भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ पहली द्विपक्षीय बैठक
सिंह दरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में सोमवार को भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से मुलाकात की:
- पहला व्यक्तिगत संवाद: मार्च में प्रधानमंत्री बनने के बाद से शाह की किसी विदेशी राजनायिक के साथ यह पहली अकेले (वन-एंड-वन) में हुई औपचारिक बैठक थी।
- किन मुद्दों पर हुई चर्चा: लगभग एक घंटे चली इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आपसी हितों, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और विकास साझेदारियों को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
- भारतीय राजदूत ने पीएम मोदी की ओर से शुभकामनाएं देते हुए भारत-नेपाल के बहुआयामी संबंधों को और प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। जवाब में नेपाली पीएम ने भी दोनों पड़ोसी देशों के पुराने संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
2. चीन के राजदूत झांग माओमिंग से भी की मुलाकात
भारतीय राजदूत के साथ बैठक के ठीक बाद प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग (Zhang Maoming) से भी अलग मुलाकात की:
- संतुलन साधने की कूटनीति: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक ही दिन भारत और चीन—दोनों पड़ोसी देशों के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करके पीएम शाह ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि नेपाल दोनों प्रमुख एशियाई शक्तियों के साथ समान महत्व और संतुलन के आधार पर संबंध रखना चाहता है।
- चीनी राजदूत के साथ हुई इस शिष्टाचार भेंट में दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग, आपसी विकास परियोजनाओं और साझा हितों के मुद्दों पर बातचीत हुई।
3. क्या था प्रधानमंत्री शाह का पुराना रुख?
- गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने विदेशी राजदूतों से व्यक्तिगत मुलाकातों के बजाय सामूहिक (Group Meetings) संवाद की नीति अपना रखी थी। यहाँ तक कि उन्होंने कुछ समय पहले पश्चिमी देशों के विशेष दूतों और वरिष्ठ राजनयिकों से मिलने से भी परहेज किया था।
- हालांकि, अब इस कूटनीतिक बदलाव के बाद माना जा रहा है कि नेपाल सरकार क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारियों के मामलों में अब अधिक खुले और व्यावहारिक संवाद के मार्ग पर आगे बढ़ रही है।
Balen Shah Meets Indian Ambassador In First Standalone Diplomatic Talks | Nepal-India Ties
यह वीडियो नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह और भारतीय राजदूत के बीच हुई इस पहली आमने-सामने की ऐतिहासिक कूटनीतिक मुलाकात के मुख्य घटनाक्रम को विस्तार से दिखाता है।
