मध्य पूर्व से बड़ी कूटनीतिक सनसनी: अमेरिका ने ईरान को दी थी इजराइली साजिश की गुप्त चेतावनी; वार्ताकार अराघची और संसद अध्यक्ष गालिबाफ की हत्या कर सकता था तेल अवीव

स्थान: तेहरान / वाशिंगटन

दिनांक: 3 जुलाई, 2026

अंतरराष्ट्रीय डेस्क:

पश्चिम एशिया (Mid-East) में जारी भीषण तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्ट सामने आई है। खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका (US) ने हाल ही में ईरान सरकार को एक बेहद संवेदनशील और गोपनीय चेतावनी (Intelligence Warning) जारी की थी। इस गुप्त इनपुट में कहा गया था कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद, ईरान के दो सबसे शीर्ष नीति-निर्धारकों— मुख्य परमाणु वार्ताकार अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) और ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) को निशाना बनाने की फिराक में है।

अमेरिकी खुफिया तंत्र ने समय रहते ईरान को आगाह किया कि इजराइल एक खुफिया ऑपरेशन के जरिए तेहरान या किसी तीसरे देश में एक गुप्त कूटनीतिक वार्ता के दौरान इन दोनों बड़े नेताओं की ‘लक्षित हत्या’ (Targeted Killing) की साजिश रच रहा है।

मस्कट में होने वाली गुप्त वार्ता के दौरान था हमले का प्लान

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, यह पूरी साजिश उस समय रची गई थी जब ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए एक बैक-चैनल वार्ता (Back-Channel Diplomacy) शुरू होने वाली थी।

  • क्यों निशाने पर थे अराघची और गालिबाफ?: अब्बास अराघची ईरान के सबसे अनुभवी राजनयिक हैं और पश्चिम के साथ परमाणु समझौते को दोबारा जीवित करने की वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं, मोहम्मद बगेर गालिबाफ (संसद अध्यक्ष) ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के पूर्व कमांडर रह चुके हैं और देश की सुरक्षा नीतियों में उनका बड़ा दखल है। इजराइल का मानना है कि इन दोनों नेताओं को रास्ते से हटाकर वह ईरान के कूटनीतिक और रणनीतिक तंत्र को पूरी तरह पंगु बना सकता है।
  • अमेरिका ने क्यों दी चेतावनी?: अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि यदि इजराइल इस दुस्साहस में कामयाब हो जाता, तो ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के सारे रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाते। इतना ही नहीं, इसके जवाब में ईरान सीधे इजराइल पर परमाणु या बड़े मिसाइल हमले कर सकता था, जिससे पूरी दुनिया एक विनाशकारी महायुद्ध की आग में झुलस जाती। इसी बड़े खतरे को टालने के लिए वाशिंगटन ने स्विट्जरलैंड के दूतावास (चैनल) के माध्यम से तेहरान को तत्काल यह इनपुट साझा किया।

तेहरान में हाई-अलर्ट; सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार की सुरक्षा और सख्त

इस अमेरिकी चेतावनी के बाद ईरान के सुरक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने दोनों नेताओं की सुरक्षा को ‘अति-संवेदनशील’ श्रेणी में डालते हुए अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया है।

खामेनेई के अंतिम संस्कार पर बढ़ा खतरा:

यह इनपुट ऐसे समय पर सामने आया है जब ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार (State Funeral) की तैयारियां चल रही हैं, जिसमें दुनिया भर के दर्जनों वीआईपी और राजनयिक हिस्सा लेने तेहरान पहुंच रहे हैं। ईरानी सुरक्षा बलों ने अराघची और गालिबाफ के सार्वजनिक मूवमेंट को फिलहाल पूरी तरह सीमित कर दिया है। तेहरान के हवाई क्षेत्र (Airspace) में लड़ाकू विमानों की गश्त बढ़ा दी गई है और पूरे शहर को ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ घोषित कर दिया गया है।

इजराइल की चुप्पी; वाशिंगटन और तेल अवीव में बढ़ा कूटनीतिक तनाव

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या सेना (IDF) की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, तेल अवीव के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इजराइल इस बात से बेहद नाराज है कि अमेरिका ने उसके एक बेहद गुप्त सैन्य/खुफिया ऑपरेशन की जानकारी दुश्मन देश (ईरान) के साथ साझा कर दी।

इस घटनाक्रम ने जो बाइडन प्रशासन और इजराइली नेतृत्व के बीच की बढ़ती कड़वाहट और अविश्वास को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब कर दिया है। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रवक्ता ने केवल इतना कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व में किसी भी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेगा जो क्षेत्रीय स्थिरता को पूरी तरह नष्ट कर दे और राजनयिक प्रयासों को नुकसान पहुंचाए।

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