दिल्ली-NCR में निर्माण कार्य, सड़क की धूल और कचरा जलाना प्रदूषण की बड़ी वजह, सर्वे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

नई दिल्ली | 14 अक्टूबर 2026

दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर लोकल सर्कल्स के एक सर्वे में सामने आया है कि लोग केवल पराली जलाने को ही खराब हवा का कारण नहीं मानते, बल्कि शहरों में चल रहे निर्माण कार्य, सड़कों पर उड़ती धूल और खुले में कचरा जलाने को भी प्रदूषण की प्रमुख वजह मान रहे हैं। सर्वे के अनुसार, 79 प्रतिशत लोगों ने निर्माण गतिविधियों को वायु प्रदूषण के बड़े कारणों में शामिल किया। वहीं, 64 प्रतिशत लोगों ने कचरा जलाने और सड़क की धूल को जिम्मेदार बताया।

20 हजार से ज्यादा लोगों ने सर्वे में लिया हिस्सा

लोकल सर्कल्स के इस सर्वे में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के कुल 20,761 लोगों ने हिस्सा लिया। सर्वे में शामिल लोगों से दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के संभावित कारणों के बारे में राय मांगी गई थी। प्रतिभागियों को एक से अधिक विकल्प चुनने की अनुमति थी।

सर्वे के मुताबिक, 79 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने निर्माण कार्यों को प्रदूषण की बड़ी वजह माना। इसके अलावा, 64 प्रतिशत लोगों ने खुले में कचरा जलाने और सड़क की धूल व मैनुअल सफाई के दौरान उड़ने वाले धूलकणों को प्रमुख कारण बताया। करीब 57 प्रतिशत लोगों ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने को भी प्रदूषण से जोड़ा।

यह सर्वे लोगों की राय को दर्शाता है। इससे किसी एक कारण का वास्तविक प्रदूषण में सटीक हिस्सा निर्धारित नहीं होता, लेकिन यह शहरी प्रदूषण के उन स्रोतों की ओर ध्यान दिलाता है जिन पर स्थानीय स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।

निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल बन रही चुनौती

निर्माण और तोड़फोड़ के दौरान मिट्टी, सीमेंट तथा अन्य सामग्री के बारीक कण हवा में फैल सकते हैं। यदि निर्माण स्थल पर पानी का छिड़काव, सामग्री को ढकने, मलबे के सुरक्षित परिवहन और वाहनों के पहियों की सफाई जैसे उपाय पर्याप्त नहीं हों, तो आसपास के इलाकों में धूल बढ़ सकती है।

वायु में मौजूद बारीक कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसी वजह से निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।

सड़क की धूल और खुले में कचरा जलाने पर भी चिंता

सड़कों पर जमा धूल वाहनों की आवाजाही और हवा के कारण दोबारा वातावरण में फैल सकती है। वहीं, खुले में कचरा जलाने से धुएं और हानिकारक प्रदूषकों का उत्सर्जन हो सकता है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इन गतिविधियों का असर आसपास रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है।

सर्वे में इन कारणों को मिली प्राथमिकता बताती है कि लोगों की नजर में प्रदूषण केवल क्षेत्रीय या मौसमी समस्या नहीं है। स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन, नियमित सफाई और निर्माण स्थलों की निगरानी जैसे उपाय भी महत्वपूर्ण हैं।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्माण स्थलों का निरीक्षण तेज किया गया है। अक्टूबर में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की जांच के दौरान कुछ परियोजनाओं पर धूल रोकने के उपायों में कमियां मिलने की खबरें सामने आईं। संबंधित एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी भी दी गई है।

इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के स्रोतों की निगरानी के लिए एकीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर शुरू किया है। इसके माध्यम से निर्माण स्थलों की निगरानी और प्रदूषण से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई को बेहतर बनाने का उद्देश्य है।

सर्दियों से पहले कार्रवाई क्यों जरूरी?

सर्दियों में मौसम की परिस्थितियां कई बार प्रदूषकों को जमीन के करीब रोक सकती हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता और खराब हो सकती है। ऐसे में निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल, खुले में कचरा जलाने और सड़क की सफाई जैसी गतिविधियों पर समय रहते नियंत्रण जरूरी है।

विशेषज्ञों और पर्यावरण से जुड़े निकायों की ओर से लंबे समय से धूल नियंत्रण, निर्माण मलबे के उचित निपटान और खुले में कचरा जलाने पर रोक जैसे कदमों पर जोर दिया जाता रहा है। दिल्ली-NCR में प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी निगरानी के साथ-साथ निर्माण एजेंसियों, स्थानीय निकायों और नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है।

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