नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026: ट्रेन से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए रेलवे से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। भारतीय रेलवे अपने दशकों पुराने 10 अंकों वाले PNR सिस्टम की सीरीज में बदलाव करने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत रिजर्वेशन टिकट पर मिलने वाले PNR नंबर की शुरुआत अब अलग सीरीज से होगी। यह बदलाव रेलवे के नए और अपग्रेडेड Passenger Reservation System के लागू होने के साथ किया जा रहा है।
दिसंबर से लागू होगी नई PNR व्यवस्था
रिपोर्ट के मुताबिक नई PNR सीरीज को दिसंबर 2026 के तीसरे सप्ताह तक देश की सभी ट्रेनों में लागू किए जाने की तैयारी है।
अभी इसका पायलट प्रोजेक्ट कुछ ट्रेनों में चल रहा है। लखनऊ से चलने वाली ट्रेन नंबर 14210 में नई PNR सीरीज का इस्तेमाल शुरू किया गया है। इस ट्रेन के टिकटों पर 500 सीरीज से शुरू होने वाले PNR दिखाई दे रहे हैं।
अब PNR किन अंकों से शुरू होगा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद रिजर्वेशन टिकट के 10 अंकों वाले PNR की शुरुआत 1, 3, 5 या 7 जैसे विषम यानी Odd नंबरों से होने की जानकारी सामने आई है।
अभी तक PNR की शुरुआती सीरीज रेलवे के अलग-अलग डेटाबेस सेंटर से जुड़ी हुई थी। मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए शुरुआती अंक अलग रखे गए थे।
पुरानी व्यवस्था कैसे काम करती थी?
कंप्यूटरीकृत रिजर्वेशन सिस्टम में शुरुआती PNR सीरीज रेलवे के चार प्रमुख डेटाबेस सेंटर से जुड़ी थी—
- दिल्ली: 2 से शुरू होने वाली सीरीज
- कोलकाता: 6 से शुरू होने वाली सीरीज
- मुंबई: 8 से शुरू होने वाली सीरीज
- चेन्नई: 4 से शुरू होने वाली सीरीज
नई व्यवस्था में इस क्षेत्र-आधारित PNR सीरीज को बदलकर नई माइग्रेटेड सीरीज इस्तेमाल की जाएगी।
आखिर PNR में बदलाव क्यों किया जा रहा है?
इस बदलाव की मुख्य वजह रेलवे के Passenger Reservation System का आधुनिकीकरण है। रेलवे का मौजूदा PRS सिस्टम करीब चार दशक पुराना है। इसे अब ज्यादा क्षमता वाले Next Generation System में अपग्रेड किया जा रहा है।
नए सिस्टम का उद्देश्य टिकट बुकिंग और रिजर्वेशन से जुड़ी प्रक्रियाओं को ज्यादा तेज और आधुनिक बनाना है। टिकट बनाते समय सीट उपलब्धता, किराया, बर्थ की स्थिति और कुछ टिकट संबंधी सुधार जैसी सुविधाओं को नए सिस्टम में बेहतर तरीके से संभालने की क्षमता विकसित की गई है।
1986 से चली आ रही है कंप्यूटरीकृत व्यवस्था
भारतीय रेलवे में कंप्यूटरीकृत Passenger Reservation System की शुरुआत 1986 में हुई थी। इसके बाद समय के साथ इसमें कई तकनीकी बदलाव किए गए, लेकिन मूल व्यवस्था करीब चार दशक तक चलती रही।
अब रेलवे ने इस सिस्टम को बड़े स्तर पर अपग्रेड किया है। अगस्त 2026 से ट्रेनों को चरणबद्ध तरीके से नए PRS पर माइग्रेट करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
1230 ट्रेनों से शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
रिपोर्टों के अनुसार PNR माइग्रेशन से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट के लिए करीब 1230 ट्रेनों को चुना गया है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से बाकी ट्रेनों को भी नई व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।
दिसंबर के तीसरे सप्ताह तक सभी ट्रेनों में नई PNR सीरीज लागू किए जाने का लक्ष्य बताया गया है।
पुराने टिकट वालों को क्या परेशानी हो सकती है?
यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुराना PNR मिलने से आपका टिकट अपने आप रद्द नहीं होगा। समस्या मुख्य रूप से उस स्थिति में सामने आ सकती है जब कोई यात्री पुराने सिस्टम पर बुक किए गए टिकट में नई व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रा की तारीख बदलना चाहे।
रिपोर्ट के अनुसार ऐसे मामलों में पुराने टिकट को कैंसिल करके नए सिस्टम से नया टिकट बुक करना पड़ सकता है।
इसलिए जिन यात्रियों ने पहले से टिकट बुक कर रखा है, उन्हें नई व्यवस्था लागू होने के बाद टिकट में किसी तरह का बदलाव कराने से पहले रेलवे के मौजूदा नियम जरूर जांच लेने चाहिए।
यात्रियों की सुविधा के लिए अपग्रेड हो रहा पूरा सिस्टम
PNR सीरीज में बदलाव केवल नंबर बदलने तक सीमित नहीं है। यह रेलवे के करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम के व्यापक आधुनिकीकरण का हिस्सा है।
रेलवे के मुताबिक नए सिस्टम को अधिक क्षमता, तेज प्रोसेसिंग और बेहतर यात्री सेवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। PRS पर रोजाना लाखों यात्री निर्भर हैं और बड़ी संख्या में टिकट अब ऑनलाइन बुक किए जाते हैं।
यात्रियों को क्या याद रखना चाहिए?
नई PNR व्यवस्था लागू होने के बाद अगर टिकट पर 1, 3, 5 या 7 से शुरू होने वाला PNR दिखाई देता है, तो घबराने की जरूरत नहीं होगी। यह नए सिस्टम की सामान्य PNR सीरीज का हिस्सा होगा।
हालांकि, पुराने टिकट में यात्रा की तारीख या अन्य जानकारी बदलवाने की जरूरत पड़ने पर नए नियम लागू हो सकते हैं। ऐसे में टिकट कैंसिलेशन और दोबारा बुकिंग की जरूरत पड़ सकती है।
