इंदौर, 6 अक्टूबर 2026: शहर में ट्रैफिक व्यवस्था और फ्लाईओवर निर्माण से जुड़ी समस्याओं के बीच अब फ्लाईओवर की बाउंड्रीवाल पर रखे गमलों को लेकर सुरक्षा का सवाल उठ रहा है। दो फ्लाईओवर की ऊंची बाउंड्रीवाल पर सजावट के लिए रखे गए गमले नीचे से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों के लिए संभावित खतरा बन सकते हैं। यदि तेज हवा, कंपन या किसी अन्य कारण से इनमें से कोई गमला नीचे गिरता है तो गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
बाउंड्रीवाल पर रखे गए हैं गमले
फ्लाईओवर की बाउंड्रीवाल पर हरियाली और सौंदर्य बढ़ाने के उद्देश्य से गमले रखे गए हैं। हालांकि, इन गमलों की स्थिति को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
फ्लाईओवर के नीचे से लगातार वाहन गुजरते हैं। ऐसे में ऊंचाई पर रखी कोई वस्तु यदि अपनी जगह से खिसकती है या नीचे गिरती है तो दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल राहगीरों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।
नीचे से गुजरते हैं हजारों वाहन
इंदौर के प्रमुख फ्लाईओवर और व्यस्त मार्गों पर दिनभर भारी ट्रैफिक रहता है। निर्माणाधीन फ्लाईओवरों के आसपास पहले से ही सड़क की स्थिति, बैरिकेडिंग और यातायात प्रबंधन को लेकर समस्याएं सामने आती रही हैं। मूसाखेड़ी से आईटी पार्क के बीच बने रहे फ्लाईओवरों के कारण वैकल्पिक मार्गों और सर्विस रोड पर भी यातायात प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई है।
ऐसे में ऊंचाई पर रखे गमलों की सुरक्षा को लेकर भी जिम्मेदार एजेंसियों से स्पष्ट व्यवस्था की उम्मीद की जा रही है।
सजावट से ज्यादा जरूरी सुरक्षा
शहर में फ्लाईओवर और सड़क परियोजनाओं के साथ सौंदर्यीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। गमले और पौधे शहर को हरा-भरा बनाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें ऐसी जगह रखने से पहले उनकी मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऊंचाई पर रखी किसी भी वस्तु को इस तरह सुरक्षित करना जरूरी होता है कि वह हवा, कंपन या किसी अन्य परिस्थिति में नीचे न गिरे।
निर्माणाधीन फ्लाईओवरों पर पहले से चुनौती
इंदौर में कई फ्लाईओवर परियोजनाओं के निर्माण के दौरान यातायात प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। मूसाखेड़ी से आईटी पार्क के बीच दो फ्लाईओवरों का निर्माण निर्धारित मार्च 2026 की समय-सीमा के बाद भी जारी रहने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय आईटी पार्क चौराहे पर करीब 60 प्रतिशत और मूसाखेड़ी चौराहे पर करीब 40 प्रतिशत काम बाकी बताया गया था।
वहीं सत्यम साई चौराहे के फ्लाईओवर निर्माण के दौरान भी गड्ढों, बैरिकेडिंग और पैदल यात्रियों के लिए सीमित जगह जैसी समस्याओं की रिपोर्ट सामने आई थी।
हादसे के बाद कार्रवाई से बेहतर पहले सुरक्षा
सड़क और फ्लाईओवर परियोजनाओं में सुरक्षा इंतजामों को लेकर छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। हाल ही में इंदौर में एक सड़क दुर्घटना के बाद निर्माण क्षेत्र की रोशनी, संकेतक और रिफ्लेक्टिव मार्किंग को लेकर भी सवाल उठे थे।
ऐसे में फ्लाईओवर की बाउंड्रीवाल पर रखे गमलों की मजबूती की जांच और उनकी सुरक्षित स्थिति सुनिश्चित करना जरूरी माना जा रहा है।
प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती
फ्लाईओवर पर रखे पौधों और गमलों को लेकर सवाल केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं हैं। यदि किसी गमले के गिरने से नीचे चल रहे वाहन या व्यक्ति को चोट पहुंचती है तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी उठेगा।
इसलिए संबंधित एजेंसी को यह जांचना होगा कि गमले किस सामग्री के हैं, उन्हें किस तरह रखा गया है और क्या उन्हें बाउंड्री से सुरक्षित तरीके से बांधा गया है। जरूरत पड़ने पर इन्हें ऐसी जगह स्थानांतरित किया जा सकता है जहां राहगीरों को खतरा न हो।
राहगीरों की सुरक्षा सबसे अहम
फ्लाईओवर शहर में यातायात को आसान बनाने के लिए बनाए जाते हैं। ऐसे में इनके ऊपर या आसपास किया गया कोई भी सौंदर्यीकरण तभी उपयोगी है, जब उससे सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा प्रभावित न हो।
फिलहाल सवाल यही है कि क्या बाउंड्रीवाल पर रखे गमलों की पर्याप्त सुरक्षा जांच की गई है? यदि नहीं, तो किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते व्यवस्था सुधारना जरूरी होगा।
