नई दिल्ली | 2 अक्टूबर 2026
पितृ पक्ष के दौरान 2 अक्टूबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। शुक्रवार को सुबह तक आश्विन कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी और इसके बाद सप्तमी तिथि का आरंभ होगा। पंचांग के अनुसार षष्ठी तिथि सुबह करीब 10 बजकर 15 मिनट तक है, जबकि इसके बाद सप्तमी शुरू होकर अगले दिन सुबह तक रहेगी। इसी वजह से 2 अक्टूबर को सप्तमी श्राद्ध का दिन माना जा रहा है।
सुबह षष्ठी, फिर शुरू होगी सप्तमी
2 अक्टूबर को तिथियों के बदलाव के कारण दिन के शुरुआती हिस्से में षष्ठी और उसके बाद सप्तमी तिथि रहेगी। पंचांग गणना के अनुसार सप्तमी तिथि सुबह 10:15 बजे के आसपास शुरू होगी और 3 अक्टूबर की सुबह तक रहेगी।
इसी कारण इस दिन को लेकर लोगों के बीच तर्पण और श्राद्ध के समय को लेकर भ्रम हो सकता है। तिथि आधारित श्राद्ध में स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
2 अक्टूबर को किसका किया जाएगा श्राद्ध?
पितृ पक्ष की सप्तमी तिथि उन पूर्वजों के लिए मानी जाती है जिनका निधन सप्तमी तिथि को हुआ था। धार्मिक परंपरा के अनुसार इसमें शुक्ल या कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि में मृत्यु हुए परिजनों का श्राद्ध किया जाता है।
श्राद्ध के बाद तर्पण करने की परंपरा है। परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों को स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करते हैं।
श्राद्ध के लिए कौन-सा समय रहेगा?
स्थानीय पंचांग के अनुसार 2 अक्टूबर को सप्तमी श्राद्ध के लिए प्रमुख समय इस प्रकार बताया गया है:
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से 12:31 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:31 बजे से 1:19 बजे तक
- अपराह्न काल: दोपहर 1:19 बजे से 3:42 बजे तक
ये समय बैतूल, मध्य प्रदेश के लिए उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और स्थानीय गणना के कारण कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
तर्पण कब करें?
पितृ पक्ष के पार्वण श्राद्ध में कुतुप और रौहिण जैसे मुहूर्त तथा उसके बाद अपराह्न काल को श्राद्ध कर्म के लिए उपयुक्त माना जाता है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार तर्पण श्राद्ध कर्म के अंत में किया जाता है।
इसलिए तर्पण के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार श्राद्ध का समय निर्धारित करना उचित रहेगा।
पितृ पक्ष में तर्पण का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का समय है। इन दिनों परिवार अपने दिवंगत परिजनों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसी परंपराएं निभाते हैं।
तर्पण में जल, तिल और कुश आदि का प्रयोग परंपरा के अनुसार किया जाता है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में श्राद्ध की विधि में अंतर हो सकता है।
पितृ पक्ष कब तक चलेगा?
2026 में पितृ पक्ष के श्राद्ध क्रम की शुरुआत 27 सितंबर से हुई और सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को होगी। 2 अक्टूबर को सप्तमी श्राद्ध के बाद 3 अक्टूबर को अष्टमी और 4 अक्टूबर को नवमी श्राद्ध होगा।
इस दौरान जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात होती है, उनके लिए संबंधित तिथि पर श्राद्ध करने की परंपरा है। जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए पितृ पक्ष की अंतिम तिथि यानी सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध करने की परंपरा प्रचलित है।
अलग-अलग शहरों में समय में हो सकता है अंतर
श्राद्ध और तर्पण के मुहूर्त सूर्योदय तथा स्थानीय पंचांग गणना पर निर्भर करते हैं। इसलिए भोपाल, इंदौर, दिल्ली, मुंबई या अन्य शहरों में मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर संभव है।
विशेष रूप से तर्पण या श्राद्ध करने वाले लोगों को अपने स्थान के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना चाहिए।
