नई दिल्ली | 3 अगस्त, 2026
सनातन धर्म में देवाधिदेव महादेव यानी भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। भगवान शिव की आराधना आमतौर पर शिवलिंग के रूप में की जाती है। हालांकि, शिवलिंग की पूजा और इसके रख-रखाव को लेकर समाज में कई तरह की धारणाएं और असमंजस की स्थिति बनी रहती है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या महिलाएं शिवलिंग को छू सकती हैं? घर में शिवलिंग रखना कितना उचित है और उस पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण करना चाहिए या नहीं?
आइए जानते हैं कि पवित्र शिव पुराण में इन विषयों के बारे में क्या नियम और विधान बताए गए हैं।
1. क्या महिलाएं शिवलिंग छू सकती हैं? (शिव पुराण के अनुसार)
- स्पष्ट नियम: शिव पुराण के अनुसार, महिलाएं पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ शिवलिंग को स्पर्श कर सकती हैं और उसकी पूजा-अर्चना कर सकती हैं।
- शिव और शक्ति (माता पार्वती) का अर्धनारीश्वर स्वरूप यह संदेश देता है कि ब्रह्मांड में स्त्री और पुरुष दोनों का अधिकार समान है। अतः महिलाओं के शिवलिंग स्पर्श करने पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध शास्त्र सम्मत नहीं है।
- हालांकि, कुछ विशेष पारंपरिक मान्यताओं के तहत स्पर्श पूजन के बजाय जल अर्पित करने या दूर से दर्शन करने का विधान भी क्षेत्रीय परंपराओं में देखा जाता है, लेकिन मूल ग्रंथों में निषेध नहीं है।
2. घर में शिवलिंग रखना सही है या गलत?
घर में शिवलिंग की स्थापना को लेकर शिव पुराण और ज्योतिषीय नियमों में कुछ विशेष सावधानियां बरतने को कहा गया है:
- आकार का महत्व: शिव पुराण के अनुसार, घर में रखा जाने वाला शिवलिंग बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। घर के मंदिर में अंगूठे के पोर (यानी आपके अंगूठे के नाखून के आकार) से बड़ा शिवलिंग स्थापित नहीं करना चाहिए।
- नियमित पूजा अनिवार्य: यदि आपने घर में प्राण-प्रतिष्ठित या सामान्य शिवलिंग रखा है, तो उसकी नियमित रूप से रोज पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करना अत्यंत आवश्यक होता है। यदि आप नियमित सेवा नहीं कर सकते, तो घर में शिवलिंग स्थापित करने से बचना चाहिए।
- पारद या श्वेतार्क शिवलिंग: घर में अंगूठे के आकार का नर्मदेश्वर, पारद (पारे) या श्वेतार्क (आक के पौधे की जड़ से बना) शिवलिंग रखना बेहद शुभ माना जाता है, जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
3. शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद खाना चाहिए या नहीं?
हिंदू धर्म में भगवान को अर्पित किया जाने वाला प्रसाद बहुत पवित्र माना जाता है, लेकिन शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को लेकर एक खास नियम है:
- चांडाल योग और चंडेश्वर का भाग: शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग पर चढ़ाई जाने वाली सामग्री (दूध, जल, बेलपत्र, फूल, फल आदि) पर ‘चंडेश्वर’ (भगवान शिव के गण) का अधिकार माना जाता है।
- नियम: इसलिए, शिवलिंग पर अर्पित किया गया नैवेद्य (भोग या प्रसाद) सामान्य मंदिरों में कई जगहों पर ग्रहण करने से मना किया जाता है, क्योंकि उसे ‘चंड भाग’ माना जाता है।
- अपवाद: हालांकि, यदि शिवलिंग पर जल या दूध सीधे तौर पर भगवान को अर्पित किया जाए और भोग अलग से किसी प्लेट या पात्र में भगवान के सामने रखकर लगाया गया हो, तो उस भोग प्रसाद को ग्रहण किया जा सकता है। परिक्रमा करते समय भी इस बात का ध्यान रखा जाता है कि जलाधारी (अर्घ्य) को लांघा न जाए।
