नई दिल्ली | 12 अगस्त 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के व्यक्तित्व और उनके जीवन मूल्यों की सराहना करने के साथ-साथ देश के युवाओं, खासकर Gen-Z, को सोशल मीडिया के दौर में तेजी से बदलती जीवनशैली और सफलता की चाह को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का युवा ऐसे दौर में जी रहा है, जहां सोशल मीडिया ने जानकारी और मनोरंजन के साथ-साथ सफलता और लोकप्रियता की परिभाषा को भी काफी हद तक प्रभावित किया है। इंस्टाग्राम रील्स, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स युवाओं के जीवन पर तेजी से असर डाल रहे हैं। ऐसे में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे आभासी दुनिया की चमक और वास्तविक जीवन की मेहनत के बीच अंतर समझ सकें।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के प्रभाव को लेकर चेताया
प्रधानमंत्री ने युवाओं को सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर चीज को वास्तविक सफलता का पैमाना न मानने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में कई इन्फ्लुएंसर्स युवाओं को आकर्षित करते हैं और उनकी जीवनशैली, सफलता तथा उपलब्धियों को देखकर युवा भी उसी तरह की जिंदगी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
लेकिन सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीर पूरी कहानी नहीं होती। किसी व्यक्ति की सफलता के पीछे कितने वर्षों की मेहनत, संघर्ष, असफलताएं और अनुशासन रहा है, यह अक्सर सोशल मीडिया की कुछ सेकंड की रील में दिखाई नहीं देता।
पीएम मोदी का संदेश इसी बात पर केंद्रित था कि युवा केवल नतीजे देखकर प्रभावित न हों, बल्कि सफलता के पीछे की मेहनत को समझें।
शॉर्टकट से बचने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने शॉर्टकट की मानसिकता को लेकर भी युवाओं को सावधान किया। आज के समय में तेजी से सफलता पाने की इच्छा बढ़ी है। सोशल मीडिया पर कुछ ही समय में लोकप्रिय होने वाले लोगों को देखकर युवाओं में भी तुरंत नाम और पहचान हासिल करने की चाह पैदा होती है।
पीएम मोदी ने युवाओं को समझाने की कोशिश की कि जीवन में स्थायी सफलता के लिए कोई आसान रास्ता नहीं होता। मेहनत, अनुशासन, धैर्य और निरंतर सीखने की प्रक्रिया ही व्यक्ति को लंबे समय तक आगे ले जाती है।
उनके संदेश का मूल भाव यह था कि युवाओं को रील वाली चमक के बजाय रियल लाइफ की मेहनत पर ध्यान देना चाहिए।
रामनाथ कोविंद के जीवन से जोड़कर बताया उदाहरण
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जीवन और उनके व्यवहार का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति पद जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहने के बावजूद रामनाथ कोविंद की सादगी और विनम्रता उनके व्यक्तित्व की खास पहचान रही।
पीएम मोदी ने राष्ट्रपति भवन से जुड़े अपने अनुभव को याद करते हुए कहा कि जब वह प्रधानमंत्री के रूप में पूर्व राष्ट्रपति से मिलने जाते थे, तब प्रोटोकॉल के बावजूद कोविंद कई बार औपचारिकताओं से अलग हटकर उनसे बातचीत करते थे।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि रामनाथ कोविंद उन्हें विदा करने के लिए कई बार स्वयं कार के दरवाजे तक आते थे। मोदी ने कहा कि उन्होंने कई बार पूर्व राष्ट्रपति से ऐसा न करने का अनुरोध किया, लेकिन कोविंद ने अपनी विनम्रता नहीं छोड़ी।
गांव पहुंचे तो शिक्षकों के पैर छुए
प्रधानमंत्री मोदी ने रामनाथ कोविंद के पैतृक गांव परौंख से जुड़ी घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति बनने के बाद जब कोविंद अपने गांव पहुंचे, तो उन्होंने अपने शिक्षकों के पैर छुए और गांव की मिट्टी को नमन किया।
पीएम मोदी के मुताबिक, रामनाथ कोविंद का यह व्यवहार पूरे देश ने देखा और इससे भारतीय संस्कारों तथा मूल्यों की तस्वीर दुनिया के सामने पहुंची।
उन्होंने कहा कि कोविंद का जीवन इस बात का उदाहरण है कि व्यक्ति कितने भी ऊंचे पद पर पहुंच जाए, लेकिन उसे अपनी जड़ों, संस्कारों और उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए जिन्होंने जीवन में आगे बढ़ने में योगदान दिया।
युवाओं के लिए बड़ा संदेश
कार्यक्रम में पीएम मोदी की बातों का एक बड़ा हिस्सा युवाओं की सोच और आज की डिजिटल संस्कृति से जुड़ा रहा। सोशल मीडिया के इस दौर में युवा कुछ सेकंड के वीडियो के जरिए किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी को समझने की कोशिश करते हैं।
लेकिन वास्तविक जीवन में उपलब्धियां हासिल करने के लिए समय देना पड़ता है। शिक्षा, कौशल, नौकरी, व्यवसाय, खेल या किसी भी दूसरे क्षेत्र में सफलता के लिए लगातार प्रयास की जरूरत होती है।
यही कारण है कि पीएम मोदी ने युवाओं को सोशल मीडिया के प्रभाव के बीच अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और शॉर्टकट से बचने का संदेश दिया।
Gen-Z के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह संदेश?
Gen-Z का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ बड़ा हुआ है। सोशल मीडिया उनके संवाद, मनोरंजन, सीखने और करियर के तरीकों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
ऐसे माहौल में रील्स और शॉर्ट वीडियो से मिलने वाली तत्काल लोकप्रियता वास्तविक जीवन की सफलता के साथ भ्रम पैदा कर सकती है। कुछ सेकंड की वीडियो में किसी की उपलब्धि दिख जाती है, लेकिन उस उपलब्धि तक पहुंचने में लगा लंबा संघर्ष दिखाई नहीं देता।
पीएम मोदी का संदेश इसी अंतर को समझने पर केंद्रित रहा—सोशल मीडिया से सीखें, लेकिन अपनी जिंदगी का फैसला केवल सोशल मीडिया देखकर न करें।
आत्मकथा के विमोचन का कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी जिस कार्यक्रम में शामिल हुए, वह पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन से जुड़ा था। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कोविंद के राष्ट्रपति कार्यकाल और उनके व्यक्तिगत गुणों की प्रशंसा की।
उन्होंने कोविंद के जीवन को भारतीय लोकतंत्र, सादगी, संस्कार और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा से जोड़कर देखा। इसी दौरान उन्होंने युवाओं के लिए सोशल मीडिया और शॉर्टकट वाली सोच पर भी अपनी बात रखी।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश सिर्फ सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से बचने की सलाह नहीं था, बल्कि युवाओं को वास्तविक जीवन में मेहनत, धैर्य और लंबे लक्ष्य पर ध्यान देने की अपील थी। रील और इन्फ्लुएंसर संस्कृति के बीच पीएम मोदी ने युवाओं को यह समझाने की कोशिश की कि कुछ सेकंड की लोकप्रियता और वर्षों की मेहनत से हासिल हुई सफलता में बड़ा अंतर होता है।
