बुरहानपुर, मध्य प्रदेश, 28 अक्टूबर 2026। कभी-कभी छोटी-सी उम्मीद भी परिवार के लिए बड़ी खुशी लेकर आती है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में ऐसा ही एक मामला चर्चा में है, जहां महज ₹200 के लकी ड्रॉ कूपन के जरिए एक परिवार को करीब ₹50 लाख कीमत की टोयोटा फॉर्च्यूनर कार मिली। खास बात यह है कि कूपन बच्चे की दादी ने गरबा कार्यक्रम के दौरान खरीदा था और उस पर अपने छह साल के पोते का नाम लिख दिया था। अब पोते के नाम पहला पुरस्कार निकलने से परिवार में जश्न का माहौल है।
गरबा कार्यक्रम में दादी ने खरीदा था कूपन
यह मामला बुरहानपुर के सीलमपुरा निवासी रायकवार परिवार से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, बच्चे की दादी किरण रायकवार करीब एक साल पहले आभापुरी धाम में आयोजित गरबा कार्यक्रम में शामिल होने गई थीं। इसी दौरान उन्होंने लकी ड्रॉ के लिए एक कूपन खरीदा और उस पर अपने पोते का नाम लिख दिया।
उस समय परिवार को अंदाजा नहीं था कि यही कूपन उनके लिए इतनी बड़ी खुशखबरी लेकर आएगा। बाद में बच्चे के नाम पर फॉर्च्यूनर कार का पहला पुरस्कार निकलने की जानकारी सामने आई।
पोते के नाम निकला पहला पुरस्कार
लकी ड्रॉ में बच्चे के नाम पर फॉर्च्यूनर कार निकलने की खबर से परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार के लिए यह जीत खास इसलिए भी है, क्योंकि लंबे समय से घर में एक बड़ी कार लाने का सपना देखा जा रहा था।
दादी किरण रायकवार के मुताबिक, उनके पति और बेटे की भी फॉर्च्यूनर जैसी कार खरीदने की इच्छा थी। आर्थिक और अन्य कारणों से यह सपना अब तक पूरा नहीं हो पाया था। ऐसे में पोते के नाम पर पुरस्कार मिलने की खबर ने परिवार की खुशी कई गुना बढ़ा दी।
ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ स्वागत
रिपोर्ट के अनुसार, कार मिलने की खुशी में बच्चे का ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। वाहन की पूजा-अर्चना की गई और परिवार के सदस्यों तथा आसपास के लोगों ने बधाई दी।
बुरहानपुर में यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मात्र ₹200 के कूपन से इतनी महंगी कार मिलने की खबर ने लोगों का ध्यान खींचा है।
करीब ₹50 लाख की बताई जा रही है कार
लकी ड्रॉ में प्रथम पुरस्कार के रूप में टोयोटा फॉर्च्यूनर SUV दी गई। समाचार रिपोर्टों में कार की कीमत करीब ₹50 लाख बताई गई है। हालांकि, वास्तविक कीमत कार के मॉडल, वेरिएंट और अन्य खर्चों के अनुसार अलग हो सकती है।
इस मामले में खास बात कूपन की कम कीमत और पुरस्कार के बड़े मूल्य का अंतर है। फिर भी, लकी ड्रॉ में विजेता का चयन संयोग पर निर्भर करता है। किसी कूपन को खरीदने से पुरस्कार मिलने की गारंटी नहीं होती।
एक साल बाद पूरी हुई पुरस्कार मिलने की प्रक्रिया
रिपोर्टों के मुताबिक, कूपन करीब एक साल पहले गरबा कार्यक्रम के दौरान खरीदा गया था, जबकि पुरस्कार से जुड़ी प्रक्रिया बाद में पूरी हुई। इसी वजह से परिवार को कार मिलने की खबर अब सामने आई है।
बच्चे के नाम की वर्तनी को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में अंतर दिखाई देता है—कुछ रिपोर्टों में नाम मेदांश रायकवार, जबकि दूसरी में वेदांश रायकवार लिखा गया है। हालांकि, सभी रिपोर्टें दादी किरण रायकवार और बुरहानपुर के रायकवार परिवार से जुड़े लकी ड्रॉ का ही उल्लेख करती हैं।
