दिनांक: 11 जून, 2026
बेलफास्ट/लंदन: उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट और ब्रिटेन के कई अन्य हिस्सों में घृणा और हिंसा की आग भड़क उठी है। उत्तरी आयरलैंड में एक 44 वर्षीय व्यक्ति पर हुए बर्बर चाकू हमले के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक दंगों में बदल गया है। दंगाइयों ने प्रवासियों को अपना मुख्य निशाना बनाते हुए उनके घरों, दुकानों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया है।
क्या है पूरी घटना?
विवाद की शुरुआत 8 जून की रात बेलफास्ट में हुई, जहां सूडान के एक 30 वर्षीय शरणार्थी (असाइलम सीकर) ने एक स्थानीय व्यक्ति पर रसोई के चाकू से हमला कर दिया। हमले में पीड़ित व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस हमले के फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दक्षिणपंथी समूहों और प्रदर्शनकारियों ने इसे प्रवासियों के खिलाफ एक बड़े अभियान के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
दंगों का तांडव: घरों को बनाया ‘निशाना’
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना बढ़ गया है कि उन्होंने बेलफास्ट के ‘लोअर न्यूटाउनस रोड’ और ‘क्रमलिन रोड’ जैसे इलाकों में सुनियोजित तरीके से प्रवासियों की तलाश शुरू कर दी।
- दंगाइयों का कहर: मास्क पहने हुए दंगाइयों ने उन घरों के दरवाजे और खिड़कियां तोड़ दीं, जिनके बारे में उनका मानना था कि वहां प्रवासी रहते हैं। इस दौरान कम से कम 3 घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए और 27 परिवारों को बेघर होना पड़ा।
- लूटपाट और आगजनी: दंगाइयों ने न केवल घरों को निशाना बनाया, बल्कि एक मध्य-पूर्वी सुपरमार्केट, एक तुर्की नाई की दुकान और फोन की दुकानों को भी लूटा और उनमें आग लगा दी। सड़कों पर खड़ी दर्जनों गाड़ियों और बसों को आग के हवाले कर दिया गया।
- भयावह मंजर: हिंसा का स्तर इतना बढ़ गया था कि एक दो महीने के बच्चे को जलते हुए घर से सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा।
ब्रिटेन में फैला तनाव
बेलफास्ट से शुरू हुई यह हिंसा अब ब्रिटेन के अन्य शहरों तक पहुंच चुकी है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो और एडिनबर्ग के साथ-साथ इंग्लैंड के साउथेम्प्टन में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और छिटपुट हिंसा की सूचना है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का उपयोग किया है और कई इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
नेताओं ने की निंदा, ‘तमाशबीन’ बने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म
उत्तरी आयरलैंड की फर्स्ट मिनिस्टर मिशेल ओ’नील ने इस हिंसा को “घृणित कायरता” करार दिया है। उन्होंने कहा कि “प्रवासियों के घरों को आग लगाना समुदाय का हिस्सा नहीं, बल्कि सरासर गुंडागर्दी है।” उधर, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस हिंसा को ‘भयावह’ बताया और कहा कि हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।
दूसरी ओर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसे लेकर भारी बहस छिड़ गई है। एलन मस्क और कई अन्य दक्षिणपंथी हस्तियों द्वारा विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा दिए जाने के आरोपों पर भी विवाद गहरा गया है।
फिलहाल, पुलिस ने 100 से अधिक लोगों की पहचान कर ली है जो इस हिंसा में शामिल थे और जांच जारी है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन सोशल मीडिया पर प्रवासियों के खिलाफ बढ़ रही नफरत ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
