गुरुग्राम, हरियाणा | 23 अक्टूबर 2026
हरियाणा के गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बुधवार, 21 अक्टूबर की रात से शुरू हुई बिजली आपूर्ति संबंधी समस्याओं के बाद गुरुवार को शहर के कई रिहायशी इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय तक बिजली गुल रही। स्थिति यह रही कि घरों में इनवर्टर बंद होने लगे, पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई और कई उद्योगों में कामकाज बाधित हो गया।
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के एक अधिकारी के मुताबिक, हड़ताल के शुरुआती 12 घंटों में 3,000 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। गुरुवार को हेल्पलाइन पर बिजली कटौती से जुड़ी करीब 5,000 शिकायतें मिलीं। कुछ इलाकों में कई घंटों तक बिजली बहाल नहीं होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
रात से ही बिजली संकट, कई इलाकों में घंटों तक अंधेरा
बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल का असर बुधवार रात से दिखाई देने लगा। गुरुग्राम की कई कॉलोनियों, औद्योगिक क्षेत्रों और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। बिजली लाइनों और फीडरों में आई खराबियों को समय पर ठीक नहीं किए जाने से कई स्थानों पर संकट लंबा खिंच गया।
पुराने गुरुग्राम में स्थिति विशेष रूप से गंभीर रही। स्थानीय निवासियों ने शिकायत की कि बिजली विभाग के अधिकारियों और हेल्पलाइन पर बार-बार संपर्क करने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। कई घरों के इनवर्टर की बैटरी खत्म हो गई, जिससे लोगों की दैनिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।
सेक्टर-9A और हरि नगर में हजारों परिवार परेशान
गुरुग्राम के सेक्टर-9A में गुरुवार तड़के करीब 3:30 बजे बिजली आपूर्ति बाधित होने से लगभग 6,000 परिवार प्रभावित हुए। बिजली नहीं होने के कारण क्षेत्र के बूस्टिंग स्टेशन से पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी के मुताबिक, 16 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी बिजली बहाल नहीं हुई थी।
इसी तरह हरि नगर में बुधवार रात करीब 10 बजे बिजली गुल होने के बाद 7,000 से अधिक परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां भी लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने से पानी की कमी की समस्या सामने आई।
इन इलाकों में लोगों को पीने के पानी, खाना बनाने, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी घरेलू कामों में दिक्कत हुई। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों से संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
बिजली संकट का असर पानी की सप्लाई पर भी
बिजली कटौती का असर केवल रोशनी और घरेलू उपकरणों तक सीमित नहीं रहा। बिजली से संचालित पंपों और बूस्टिंग स्टेशनों के प्रभावित होने के कारण कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति भी बाधित हो गई।
कुछ परिवारों के पास टंकियों में जमा पानी होने से शुरुआती राहत मिली, लेकिन लंबे समय तक बिजली नहीं आने के कारण पानी का भंडार भी कम होने लगा। कई लोगों के लिए पानी के टैंकरों की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया।
इस स्थिति ने एक बार फिर दिखाया कि बड़े शहरों में बिजली आपूर्ति बाधित होने पर पानी, इंटरनेट, लिफ्ट और अन्य आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
करीब 1,800 औद्योगिक इकाइयों का काम प्रभावित
गुरुग्राम में बिजली संकट का असर औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 1,800 विनिर्माण इकाइयों के कामकाज में व्यवधान आया। उत्पादन कार्य प्रभावित होने के कारण कई उद्योगों को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर डीजल जनरेटर का सहारा लेना पड़ा।
हालांकि, लंबे समय तक जनरेटर चलाने में ईंधन की खपत, तकनीकी सीमाओं और वायु प्रदूषण से जुड़े प्रतिबंधों जैसी चुनौतियां सामने आईं। बिजली संकट के कारण मशीनों का संचालन प्रभावित होने से उद्योग जगत में उत्पादन और आर्थिक नुकसान को लेकर चिंता बढ़ गई।
आखिर क्यों हड़ताल पर गए हरियाणा के बिजली कर्मचारी?
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का मुख्य कारण हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) का 19 अक्टूबर 2026 का आदेश है। आयोग ने निजी कंपनी Eleven Power Private Limited को गुरुग्राम और नूंह में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने की मंजूरी दी है।
इस फैसले के विरोध में हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, निजी कंपनी को बिजली वितरण की अनुमति मिलने से सरकारी बिजली निगमों की व्यवस्था, कर्मचारियों की नौकरियों और आम उपभोक्ताओं के हितों पर असर पड़ सकता है।
यूनियनों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल वेतन या भत्तों से जुड़ा नहीं है, बल्कि वे सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक, समानांतर लाइसेंस से सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की आय और उनकी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
सरकार ने भी लाइसेंस के फैसले को चुनौती देने की बात कही
हरियाणा सरकार ने निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले का विरोध किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि सरकार इस आदेश को अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (APTEL) में चुनौती देगी। सरकार ने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील भी की है।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी कहा कि लाइसेंस का फैसला नियामक आयोग ने लिया है और राज्य सरकार इसे कानूनी रूप से चुनौती देने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि इस विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
इसके बावजूद कर्मचारियों ने फिलहाल 24 अक्टूबर तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है। यूनियनों ने मांगें स्वीकार नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाने की संभावना भी जताई है।
प्रशासन ने आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए
बिजली संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने अधिकारियों को आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है। इनमें अस्पताल, पेयजल आपूर्ति और मेट्रो जैसी जरूरी सेवाएं शामिल हैं।
हालांकि, कई क्षेत्रों में बिजली बहाली को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से लोगों की परेशानी बनी रही। निवासी चाहते हैं कि प्रशासन प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करे और शिकायतों के निपटारे के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करे।
24 अक्टूबर तक जारी रह सकती है परेशानी
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल 22 से 24 अक्टूबर 2026 तक घोषित की गई है। ऐसे में बिजली आपूर्ति, शिकायतों के समाधान और तकनीकी खराबियों की मरम्मत को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है।
गुरुग्राम में सामने आया संकट बताता है कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा में लंबे व्यवधान का असर घरों से लेकर उद्योगों तक पड़ता है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार, बिजली निगम और कर्मचारी संगठन बातचीत के जरिए कब तक समाधान निकालते हैं।
