अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त; यूपी सरकार की SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, ट्रस्ट और केंद्र को भी भेजा नोटिस

स्थान: नई दिल्ली

दिनांक: 13 जुलाई, 2026

विधि संवाददाता: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित हेराफेरी व चोरी का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज पर पहुंच गया है। सोमवार को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने इस गंभीर विषय पर केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को मामले की वर्तमान स्थिति (Status Report) सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने एसआईटी की संरचना और उसमें शामिल अधिकारियों के नामों का पूरा विवरण भी मांगा है।

याचिकाकर्ताओं की मांग: सीबीआई जांच और पारदर्शी ऑडिट

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिकाओं (PIL) में आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह और अन्य वकीलों ने आरोप लगाया है कि मंदिर के दान में करोड़ों का गबन हुआ है। याचिकाओं में प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • सीबीआई (CBI) जांच: याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि राज्य सरकार की एसआईटी निष्पक्ष जांच करने में सक्षम नहीं है, इसलिए पूरे मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से कराई जाए।
  • फॉरेंसिक ऑडिट: ट्रस्ट के गठन के बाद से अब तक मिले सभी प्रकार के दान (नकद, सोना-चांदी, डिजिटल पेमेंट) का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने और एक स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराने की मांग की गई है।
  • साक्ष्य सुरक्षा: कोर्ट से आग्रह किया गया है कि मंदिर के सीसीटीवी फुटेज, दान रजिस्टर, बैंक खाते के विवरण और अन्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए ताकि सबूतों के साथ छेड़छाड़ न हो सके।

सुनवाई के मुख्य बिंदु: कोर्ट ने क्या कहा?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पेश होते हुए नोटिस स्वीकार कर लिया और कहा कि एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की जाएगी। इस पर बेंच ने कहा:

“हमने एसआईटी को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इस टीम का गठन कैसे हुआ और इसमें कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं। फिलहाल हम याचिकाओं पर ट्रस्ट का जवाब सुनना चाहते हैं। आगे की सुनवाई 20 जुलाई को होगी।”

याचिकाकर्ताओं के वकील ने यह आग्रह किया कि राज्य सरकार द्वारा दाखिल की जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट की एक कॉपी उन्हें भी दी जाए, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि जांच अभी चल रही है, इसे बाद में देखा जाएगा।

क्या है मामला? SIT की शुरुआती जांच में क्या आया सामने?

गौरतलब है कि पिछले महीने राम मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों ने अनियमितताओं की शिकायत की थी, जिसके बाद यूपी सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में अब तक निम्नलिखित बातें सामने आई हैं:

  • सीटीटीवी में खुलासा: जांच में 27 अप्रैल से 5 जून के बीच की फुटेज में करीब 70 संदिग्ध घटनाओं का जिक्र है, जिसमें दान पेटी की गिनती के दौरान कर्मचारियों को नकदी छिपाते हुए देखा गया है।
  • लापरवाही: जांच में सुरक्षा प्रोटोकॉल के घोर उल्लंघन की बात सामने आई है। न तो एंट्री-एग्जिट पर फ्रिस्किंग (तलाशी) की व्यवस्था थी और न ही गिनती के दौरान कोई प्रभावी सुपरविजन था।
  • गिरफ्तारियां: एसआईटी अब तक मंदिर के विभिन्न कर्मचारियों समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। ट्रस्ट ने भी आरोपों के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं।

अब देश की निगाहें 20 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि जांच का दायरा क्या होगा और क्या ट्रस्ट पर सरकार या कोर्ट का कोई अतिरिक्त नियंत्रण स्थापित किया जाएगा।

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