ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या 14 और 15 जून को: पितरों की तृप्ति के लिए करें धूप-ध्यान, जानिए सरल विधि और शुभ संयोग

दिनांक: 13 जून, 2026

धार्मिक डेस्क: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को पितृ स्मरण, आत्मशुद्धि और दान-पुण्य के लिए बेहद पवित्र माना गया है। इस साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) की अमावस्या का अत्यंत दुर्लभ और पावन संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, यह अमावस्या तिथि 14 जून और 15 जून दोनों ही दिनों में व्याप्त रहेगी। सोमवार को उदयातिथि होने के कारण 15 जून को इसे सोमवती अमावस्या के रूप में मनाया जाएगा, जो तीन साल में एक बार आने वाले अधिकमास के कारण और भी फलदायी हो गई है।

अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का विवरण इस प्रकार है:

  • तिथि का प्रारंभ: 14 जून 2026, रविवार को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से।
  • तिथि का समापन: 15 जून 2026, सोमवार को सुबह 08 बजकर 23 मिनट पर।

शास्त्रों का नियम: श्राद्ध और पितृ तर्पण के कार्यों के लिए कुतप काल (दोपहर का समय) महत्वपूर्ण होता है, इसलिए पितृ कार्य 14 जून को करना उत्तम रहेगा। वहीं, पवित्र नदियों में स्नान, व्रत और दान-पुण्य के लिए उदयातिथि की मान्यता होने के कारण 15 जून को सोमवती अमावस्या का महापर्व मनाया जाएगा।

इस बार बन रहे हैं महासंयोग

15 जून को इस साल की पहली सोमवती अमावस्या पर ग्रहों का विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे ‘मिथुन संक्रांति’ कहा जाता है। इसके अलावा इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो सुबह 05:45 से शाम 07:08 तक रहेगा।

पितरों की तृप्ति के लिए ‘धूप-ध्यान’ की सरल विधि

अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त धूप-ध्यान (अग्नि होत्र) करने से पितृ दोष शांत होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इसकी सरल विधि निम्नलिखित है:

  1. शुद्धि: दोपहर के समय (करीब 11:30 से 12:30 के बीच) स्नान कर साफ वस्त्र पहनें और घर के दक्षिण कोने को स्वच्छ करें।
  2. कंडा (उपला) जलाएं: एक मिट्टी के पात्र या हवन कुंड में गाय के गोबर का कंडा जलाकर सुलगती हुई अग्नि तैयार करें।
  3. धूप दें: सुलगते कंडे पर शुद्ध घी, कपूर, गुड़ और काले तिल मिलाकर आहुति दें।
  4. पितृ आवाहन: हाथ जोड़कर अपने स्वर्गीय माता-पिता और पूर्वजों का ध्यान करें, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगें।
  5. भोग और जल: धूप देने के बाद पितरों के नाम से निकाला गया भोजन (पंचबलि भोग: गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी के लिए) अलग रखें। इसके बाद तांबे के लोटे में जल लेकर, उसमें काले तिल और गंगाजल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके ‘पितृ तर्पण’ (जल अर्पित) करें।

अमावस्या पर कौन-कौन से शुभ काम करें?

अधिकमास की अमावस्या पर किए गए कार्यों का फल अनंत गुना मिलता है। आज के दिन ये शुभ काम अवश्य करें:

  • पवित्र स्नान और दान: 15 जून को ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 04:04 से 04:44) में किसी पवित्र नदी या घर के नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद जरूरतमंदों को अन्न (गेहूं, चावल), तिल, वस्त्र, छाता या जल से भरे घड़े का दान करें।
  • पीपल वृक्ष की पूजा: सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु और पितरों का वास माना जाता है। पीपल की जड़ में कच्चे दूध और जल का अर्घ्य दें, घी का दीपक जलाएं और 108 बार परिक्रमा करें।
  • दीपदान: शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके और तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक अवश्य जलाएं। इससे पितर प्रसन्न होकर वंश वृद्धि और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

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