भोपाल के बड़े तालाब पर मंडराया बड़ा खतरा: अब औसत गहराई घटकर 4.29 मीटर बची; रोजाना जमा हो रही 65 से 100 डंपर गाद

भोपाल | 13 अगस्त, 2026

मध्य प्रदेश की जीवन रेखा और भोपाल की सबसे बड़ी ऐतिहासिक जल धरोहर— बड़ा तालाब (भोजताल) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने आई है। प्रतिष्ठित संस्थान ‘भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान’ (IISER), भोपाल और ‘दैनिक भास्कर’ द्वारा किए गए संयुक्त और व्यापक बाथीमेट्रिक (Bathymetric) सर्वे में खुलासा हुआ है कि बड़े तालाब की औसत गहराई तेजी से कम होकर अब मात्र 4.29 मीटर ही रह गई है। तालाब के अंदर हर दिन भारी मात्रा में गाद (Silt) जमा हो रही है, जिससे इस ऐतिहासिक जलस्रोत का अस्तित्व खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।

1. सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े: 28.5% कम हुई गहराई

  • पुराने रिकॉर्ड के मुकाबले गिरावट: इंटरनेशनल लेक एनवायर्नमेंट कमेटी (ILEC) और 1999 की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के मुताबिक बड़े तालाब की औसत गहराई करीब 6 मीटर आंकी गई थी। लेकिन आइसर की वैज्ञानिक टीम द्वारा 63,544 अलग-अलग स्थानों पर किए गए आधुनिक मापन के बाद यह औसत घटकर 4.29 मीटर पर पहुंच गया है, यानी पुराने रिकॉर्ड के मुकाबले सीधे तौर पर 1.71 मीटर (लगभग 28.5%) की भारी कमी आई है।
  • उथला होता दायरा: इस वैज्ञानिक सर्वे के अनुसार, तालाब का करीब 22% हिस्सा अब केवल 3 मीटर या उससे भी कम गहरा बचा है। जानकारों का अनुमान है कि यदि तल में इसी रफ्तार से गाद जमा होती रही, तो आने वाले समय में जल भंडारण क्षमता में भारी गिरावट आ सकती है।

2. हर दिन जमा हो रही 65 से 100 डंपर गाद

तालाब के कैचमेंट एरिया में हो रहे अंधाधुंध निर्माण, मिट्टी के कटाव और शहरीकरण के कारण पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी सीधे तालाब के पेट में बैठ रही है:

  • दैनिक सिल्ट जमाव: विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, मानसून और अन्य महीनों के दौरान प्रतिदिन औसतन 65 से 100 डंपर के बराबर गाद तालाब के अंदर जमा हो रही है।
  • घटती विजिबिलिटी: भास्कर की टीम ने स्कूबा डाइविंग एक्सपर्ट्स के साथ जब तालाब के भीतर (करीब 9 मीटर गहराई तक) उतरकर स्थिति का जायजा लिया, तो पाया कि पानी के भीतर विजिबिलिटी एक फीट से भी कम है और चारों तरफ केवल गाद व सीप का दलदल जमा हो चुका है।

3. भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी और बचाव के उपाय

यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भोपाल की प्यास बुझाने वाला यह बड़ा तालाब गंभीर जल संकट का शिकार हो सकता है। पर्यावरणविदों और ‘लेकमैन ऑफ इंडिया’ जैसे विशेषज्ञों ने इसके बचाव के लिए कुछ अहम सुझाव दिए हैं:

  • सिल्ट ट्रैप का निर्माण: कोलान्स नदी और अन्य जल स्रोतों के मुहाने पर छोटे-छोटे सिल्ट ट्रैप बनाए जाएं ताकि तालाब में मुख्य पानी पहुंचने से पहले ही मिट्टी वहीं बैठ जाए।
  • किनारों से गाद की निकासी: पूरे तालाब को खोदने के बजाय सुनियोजित तरीके से किनारों से 70 से 100 मीटर के दायरे में जमी गाद को बाहर निकाला जाए, जिससे इसकी जल संग्रहण क्षमता को फिर से बढ़ाया जा सके।

यह वैज्ञानिक सर्वे भविष्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है, जिस पर यदि प्रशासन ने तत्काल ठोस नीति के तहत काम नहीं किया, तो शहर की यह अमूल्य जल धरोहर इतिहास बनकर रह जाएगी।

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