23 मार्च 2026
ईद के मौके पर येरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद और कश्मीर के श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद को बंद रखने को लेकर मुस्लिम समुदाय में गहरी नाराज़गी और दुख देखा गया। कई लोगों ने इसे मुसलमानों के लिए बेहद दुखद दिन बताया।
रिपोर्ट के अनुसार 1967 के बाद पहली बार रमज़ान के अंत और ईद के मौके पर येरुशलम की अल-अक्सा मस्जिद को बंद रखा गया। यह इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है।
इजरायली अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अल-अक्सा परिसर और येरुशलम के अन्य पवित्र स्थलों तक पहुंच बंद कर दी। इसके चलते सैकड़ों मुस्लिम श्रद्धालुओं को ओल्ड सिटी के दरवाजों के बाहर ही ईद की नमाज़ अदा करनी पड़ी।
कई लोग अपने साथ नमाज़ की चटाई लेकर सुबह ही वहां पहुंच गए, लेकिन पुलिस की मौजूदगी के कारण उन्हें मस्जिद के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
इस दौरान कुछ श्रद्धालुओं ने “अल्लाहु अकबर” के नारे लगाए और शहर के दरवाजों के पास नमाज़ अदा करने की कोशिश की। पुलिस ने कई बार भीड़ को पीछे हटाया और कुछ स्थानों पर आंसू गैस का इस्तेमाल भी किया गया।
अंततः कुछ समय के लिए पुलिस ने थोड़ी ढील दी, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने हेरोड गेट के पास सड़क पर ही ईद की नमाज़ अदा की। एक इमाम ने प्लास्टिक की कुर्सी पर खड़े होकर छोटा सा खुतबा भी दिया और लोगों से शांति और प्रार्थना करने की अपील की।
आमतौर पर ईद के अवसर पर लगभग एक लाख लोग अल-अक्सा मस्जिद में नमाज़ अदा करने पहुंचते हैं, लेकिन इस बार केवल कुछ सौ लोग ही वहां एकत्र हो पाए।
इजरायली अधिकारियों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया है, क्योंकि हाल ही में क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और बड़े जमावड़ों को रोकने के लिए देशभर में 50 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
हालांकि कई फिलिस्तीनी नेताओं और धार्मिक व्यक्तियों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर मस्जिद को बंद करना धार्मिक अधिकारों पर असर डालता है।
इसी बीच भारतीय प्रशासित कश्मीर में भी ईद के मौके पर श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में सामूहिक नमाज़ की अनुमति नहीं दी गई।
कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने बताया कि लगातार सातवें वर्ष ईद की नमाज़ जामा मस्जिद में नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक प्रतिबंधों और नजरबंदी के कारण लोगों को मस्जिद में इकट्ठा होने की अनुमति नहीं दी गई।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि खुशियों का दिन मुसलमानों के लिए दुख और निराशा का दिन बन गया है।
जामा मस्जिद कश्मीर में धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण केंद्र मानी जाती है, जहां अक्सर शुक्रवार और बड़े धार्मिक अवसरों पर सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
निष्कर्ष:
अल-अक्सा मस्जिद और श्रीनगर की जामा मस्जिद में ईद की नमाज़ पर लगे प्रतिबंधों ने मुस्लिम समुदाय में असंतोष और चिंता को जन्म दिया है। धार्मिक नेताओं का कहना है कि ऐसे कदम धार्मिक स्वतंत्रता और सामूहिक इबादत की परंपरा को प्रभावित करते हैं।

