भोपाल। 5 नवंबर 2026
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार दिसंबर 2026 में अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे करने जा रही है। दिसंबर 2023 में सत्ता संभालने के बाद से सरकार ने कृषि, उद्योग, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। अब कार्यकाल के इस पड़ाव पर सरकार की नीतियों, योजनाओं और आने वाले वर्षों के लक्ष्यों पर चर्चा तेज हो रही है।
मोहन यादव सरकार की कार्यशैली को लेकर यह बात अक्सर सामने आती है कि सरकार अपनी योजनाओं और फैसलों को लेकर बड़े प्रचार के बजाय उनके क्रियान्वयन पर जोर देने की बात करती है। हालांकि, किसी भी सरकार के कामकाज का वास्तविक आकलन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि योजनाओं के जमीन पर उतरने और आम लोगों तक उनके लाभ पहुंचने से होता है।
निवेश के प्रस्तावों से उद्योगों को बढ़ावा देने की कोशिश
सरकार के शुरुआती दो वर्षों में उद्योग और निवेश को विशेष प्राथमिकता दी गई। निवेश सम्मेलनों और क्षेत्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों के जरिए मध्य प्रदेश को औद्योगिक निवेश के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश हुई। सरकार के सामने चुनौती अब इन प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने की है।
सरकार से जुड़े आंकड़ों और रिपोर्टों में तीन वर्षों के दौरान 32 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव आने तथा करीब 12 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों के धरातल पर उतरने का दावा किया गया है। इन आंकड़ों का वास्तविक असर परियोजनाओं की प्रगति, निवेश की स्थिति और सृजित रोजगार के आधार पर समझा जाना जरूरी है।
कृषि वर्ष के जरिए किसानों पर विशेष ध्यान
वर्ष 2026 को मध्य प्रदेश में ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाने की पहल सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाती है। इसका उद्देश्य खेती को अधिक लाभकारी बनाना, किसानों की आय के नए स्रोत विकसित करना और कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
सरकार का जोर सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, सौर ऊर्जा, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों पर भी है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के जरिए सिंचाई का रकबा बढ़ाने की योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इन योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसानों को समय पर पानी, बिजली, बाजार और उचित मूल्य जैसी सुविधाएं कितनी प्रभावी ढंग से मिल पाती हैं।
महिला सशक्तीकरण और लाड़ली बहना योजना
महिला सशक्तीकरण भी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार ने सहायता राशि बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रतिमाह की है। इसके साथ महिलाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और उद्योगों से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
हालांकि, आर्थिक सहायता के साथ महिलाओं के लिए स्थायी रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी इस क्षेत्र की बड़ी जरूरत बनी हुई है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विस्तार की तैयारी
शिक्षा के क्षेत्र में सीएम राइज स्कूलों को सांदीपनि विद्यालयों के रूप में विकसित करने की पहल की गई है। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके साथ उच्च शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी नए अवसर तैयार करने की योजनाएं बनाई जा रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने और जिला स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इन पहलों का असर तभी व्यापक होगा, जब अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषज्ञों, दवाओं और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो।
बुनियादी ढांचे और शहरी विकास पर नजर
प्रदेश में सड़क, परिवहन और शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं को भी गति देने की कोशिश की जा रही है। मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के विकास, सड़क नेटवर्क के विस्तार और महानगरों के आसपास नए शहरी केंद्र विकसित करने की योजनाएं भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं।
इसी क्रम में नवंबर 2026 की शुरुआत में राज्य मंत्रिमंडल ने 23,288 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं को जारी रखने की मंजूरी दी। इसके साथ 15 नए सैटेलाइट टाउन विकसित करने की योजना भी सामने आई है। इन योजनाओं का उद्देश्य शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करना और आसपास के क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना है।
अब सामने हैं अगले दो वर्षों की चुनौतियां
तीन वर्ष पूरे होने के करीब पहुंच रही सरकार के सामने अब घोषणाओं को परिणामों में बदलने की चुनौती है। निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारना, युवाओं को रोजगार देना, किसानों की आय और कृषि उत्पादों के बाजार को मजबूत करना, शिक्षा-स्वास्थ्य की गुणवत्ता बढ़ाना और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना आने वाले समय की महत्वपूर्ण कसौटियां होंगी।
इसके अलावा वर्ष 2028 में उज्जैन में प्रस्तावित सिंहस्थ की तैयारियां भी सरकार के लिए बड़ा प्रशासनिक और बुनियादी ढांचा संबंधी कार्य होंगी। आयोजन के लिए समय रहते परिवहन, आवास, सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाएं मजबूत करना जरूरी होगा।
उपलब्धियों के साथ जवाबदेही भी जरूरी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार अपने तीन वर्ष पूरे करने की ओर बढ़ रही है। इन वर्षों में कृषि, उद्योग, महिला सशक्तीकरण और आधारभूत ढांचे से जुड़े कई लक्ष्य सामने रखे गए हैं। सरकार की ओर से इन्हें विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया जा रहा है।
लेकिन किसी भी सरकार की असली उपलब्धि केवल निवेश प्रस्तावों, बजट या योजनाओं की संख्या से तय नहीं होती। उसका मूल्यांकन इस आधार पर भी होना चाहिए कि आम नागरिक के जीवन में कितना बदलाव आया, कितने युवाओं को रोजगार मिला, किसानों को कितनी राहत मिली और सरकारी सेवाएं कितनी बेहतर हुईं। आने वाले दो वर्ष इसी कसौटी पर मोहन यादव सरकार के कामकाज की दिशा और प्रभाव को और स्पष्ट करेंगे।
