नई दिल्ली | 30 अक्टूबर 2026
हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना, तुलसी पूजन, दीपदान, गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में श्रद्धापूर्वक पूजा करने और व्रत कथा पढ़ने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसी महीने में भगवान श्रीकृष्ण और एक बुजुर्ग महिला से जुड़ी खिचड़ी की कथा भी पढ़ी और सुनी जाती है। मान्यता है कि इस कथा के माध्यम से भगवान ने बुजुर्ग महिला की भक्ति का मान रखा और अंत में उसके जीवन की परिस्थितियां बदल दीं।
भगवान श्रीकृष्ण रोज बुजुर्ग महिला के लिए रखते थे खिचड़ी
पौराणिक लोककथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक गांव में एक बुजुर्ग महिला रहती थी। वह भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्त थी और प्रत्येक कार्तिक मास में नियमित रूप से व्रत रखती थी। वह प्रतिदिन सुबह उठकर गंगा स्नान करने जाती और पूरे नियम के साथ भगवान की पूजा-अर्चना करती थी।
बुजुर्ग महिला की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं उसके घर आते और उसके लिए एक कटोरे में खिचड़ी रखकर चले जाते थे। महिला उसी खिचड़ी को भगवान का प्रसाद मानकर ग्रहण करती और अपना व्रत खोलती थी।
उसी गांव में महिला के घर के पास एक दूसरी स्त्री रहती थी। वह बुजुर्ग महिला को रोज खिचड़ी मिलते देखकर उससे ईर्ष्या करती थी। उसे यह बात पसंद नहीं थी कि अकेले रहने के बावजूद बुजुर्ग महिला को प्रतिदिन भोजन मिल जाता है।
पड़ोसन ने छिपाकर फेंक दिया खिचड़ी का कटोरा
एक दिन बुजुर्ग महिला रोज की तरह कार्तिक स्नान के लिए गंगा नदी चली गई। उसके जाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण उसके घर आए और पहले की तरह खिचड़ी का कटोरा रखकर चले गए।
इसी दौरान पड़ोस में रहने वाली स्त्री की नजर उस कटोरे पर पड़ गई। घर में किसी को मौजूद न देखकर उसने खिचड़ी का कटोरा उठाया और घर के पीछे फेंक दिया।
कुछ समय बाद जब बुजुर्ग महिला स्नान करके वापस लौटी तो उसे घर में खिचड़ी का कटोरा नहीं मिला। उसने काफी देर तक उसे ढूंढा, लेकिन कटोरा कहीं नहीं मिला। इससे वह बहुत दुखी हुई और बार-बार कहने लगी कि मेरी खिचड़ी कहां चली गई और मेरा कटोरा किसने ले लिया?
खिचड़ी फेंकने वाली जगह पर उग आया पौधा
कथा के अनुसार, पड़ोसन ने जिस जगह खिचड़ी का कटोरा फेंका था, वहां कुछ समय बाद एक पौधा उग आया। धीरे-धीरे उस पौधे पर दो सुंदर फूल खिल गए।
एक दिन उस रास्ते से राजा गुजर रहे थे। उनकी नजर पौधे पर खिले सुंदर फूलों पर पड़ी। राजा ने दोनों फूल तोड़ लिए और अपने महल ले जाकर रानी को दे दिए।
कहा जाता है कि रानी ने जब उन फूलों को सूंघा तो कुछ समय बाद वह गर्भवती हो गई। निर्धारित समय पूरा होने पर रानी ने दो पुत्रों को जन्म दिया। दोनों राजकुमार धीरे-धीरे बड़े होने लगे, लेकिन एक अजीब बात थी कि वे महल में किसी से बातचीत नहीं करते थे।
बुजुर्ग महिला को देखते ही बोलने लगते थे राजकुमार
दोनों राजकुमार जब भी शिकार के लिए जंगल की ओर जाते, रास्ते में उन्हें वही बुजुर्ग महिला दिखाई देती थी। वह आज भी अपने खोए हुए खिचड़ी के कटोरे को याद करके कहती रहती थी कि मेरी खिचड़ी कहां गई और मेरा कटोरा कहां चला गया?
महिला की यह बात सुनकर दोनों राजकुमार उससे कहते कि हम ही तुम्हारी खिचड़ी हैं और हम ही तुम्हारा कटोरा हैं।
यह बात काफी हैरान करने वाली थी, क्योंकि जो राजकुमार महल में किसी से बात नहीं करते थे, वे इस बुजुर्ग महिला के सामने बोलने लगते थे।
राजा के सामने खुला दोनों राजकुमारों के जन्म का रहस्य
एक दिन राजा ने स्वयं दोनों राजकुमारों को उस बुजुर्ग महिला से बातचीत करते हुए देख लिया। उन्हें आश्चर्य हुआ कि उनके पुत्र महल में किसी से बात नहीं करते, लेकिन इस महिला के सामने अपनी बात रखते हैं।
राजा ने तुरंत बुजुर्ग महिला को महल बुलवाया और उससे पूरी घटना के बारे में पूछा। तब महिला ने राजा को बताया कि वह प्रत्येक कार्तिक मास में व्रत रखती थी और भगवान श्रीकृष्ण उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसके लिए रोज खिचड़ी का कटोरा रख जाते थे। लेकिन एक दिन गंगा स्नान से लौटने पर उसे खिचड़ी और कटोरा दोनों गायब मिले।
इसके बाद दोनों राजकुमारों ने राजा को बताया कि जिस दिन पड़ोसन ने खिचड़ी का कटोरा फेंका था, उसी स्थान पर पौधा उगा था। उस पौधे के दो फूलों को राजा महल लेकर आए थे और रानी ने उन्हें सूंघा था। उन्हीं फूलों के प्रभाव से दोनों राजकुमारों का जन्म हुआ।
राजकुमारों ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें बुजुर्ग महिला के लिए भेजा था। इस तरह बुजुर्ग महिला को अपनी खोई हुई खिचड़ी और कटोरे का रहस्य समझ में आ गया।
राजा ने बुजुर्ग महिला को दिया सम्मान और आश्रय
पूरी घटना जानने के बाद राजा बेहद प्रसन्न हुए। उन्होंने बुजुर्ग महिला को राजमहल में रहने के लिए स्थान दिया और उसके खाने-पीने तथा देखभाल की पूरी व्यवस्था करने का आदेश दिया।
इस तरह भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से बुजुर्ग महिला को सम्मान और सहारा मिला। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह कथा सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और निस्वार्थ भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती।
कार्तिक मास में कथा पढ़ने का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा के साथ धार्मिक कथाओं का पाठ और श्रवण करना शुभ माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु सुबह स्नान करके पूजा करते हैं, तुलसी के पास दीपक जलाते हैं और शाम के समय दीपदान करते हैं।
कार्तिक मास में इस कथा को पढ़ते या सुनते समय भक्त भगवान श्रीकृष्ण से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। कथा के अंत में भक्त प्रार्थना करते हैं कि जिस प्रकार भगवान ने बुजुर्ग महिला की पुकार सुनी और उसकी भक्ति का मान रखा, उसी प्रकार सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें।
धार्मिक संदेश: इस कथा का मुख्य संदेश है कि ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा रखनी चाहिए, किसी की भक्ति से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए और जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए।
