बेंगलुरु | 4 नवंबर 2026
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संस्थापक आशुतोष रांका को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दीपके को अमेरिका स्थित दानदाताओं से आर्थिक मदद मिल रही है, जबकि आशुतोष रांका को पाकिस्तानी नेताओं और उनके कथित हैंडलर्स के माध्यम से फंडिंग दी जा रही है।
मंगलवार, 3 नवंबर को बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री ने ये आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को विदेशी वित्तपोषित संगठन और भारत-विरोधी ताकतें आर्थिक सहायता दे रही हैं।
जितेंद्र सिंह ने क्या कहा?
जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ स्वयंभू नेता और कार्यकर्ता विदेशी स्रोतों से पैसा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका का नाम लेते हुए कहा कि दीपके को अमेरिका से आर्थिक मदद मिल रही है, जबकि रांका को पाकिस्तानी राजनेताओं से पैसा मिला है।
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ विदेशी वित्तपोषित NGO और संगठन भारत में राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विदेशी फंडिंग पर नियंत्रण के लिए विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) की भूमिका का भी उल्लेख किया।
SIR के खिलाफ अभियान को लेकर भी लगाए आरोप
मंत्री ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में विदेशी संगठनों और कुछ राजनीतिक तत्वों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर गलत जानकारी फैलाकर लोगों के बीच भ्रम पैदा किया जा रहा है। उनके मुताबिक, विदेशी फंडिंग के स्रोतों और अभियान के लिए जुटाए जा रहे संसाधनों की पड़ताल जरूरी है।
एक महिला को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फंडिंग मिलने का भी दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जितेंद्र सिंह ने एक महिला का भी जिक्र किया, जिसने SIR विरोधी अभियान में हिस्सा लिया था। मंत्री ने आरोप लगाया कि उसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी आर्थिक सहायता मिल रही थी।
हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस महिला की पहचान और कथित भुगतान से जुड़े विस्तृत दस्तावेज पेश नहीं किए।
विदेशी फंडिंग के आरोपों पर क्या है स्थिति?
मंत्री के बयान के बाद विदेशी फंडिंग को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों को साबित करने वाले बैंक रिकॉर्ड, दानदाताओं की पूरी पहचान या किसी जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
इसलिए फिलहाल अमेरिका और पाकिस्तान से फंडिंग मिलने की बात को केंद्रीय मंत्री का आरोप ही माना जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। एक तरफ विपक्षी दल और कुछ संगठन इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार की ओर से इसे मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया बताया जा रहा है।
विदेशी फंडिंग के आरोपों ने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। अब इस मामले में कथित फंडिंग के स्रोतों और दावों की स्वतंत्र जांच तथा दस्तावेजी प्रमाणों पर सबकी नजर रहेगी।
