बैतूल, मध्य प्रदेश | 2 नवंबर 2026
मध्य प्रदेश के बैतूल में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जिस बेटी ने जज बनने का सपना पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की, न्यायिक सेवा परीक्षा पास की और अपने माता-पिता की इच्छा पूरी की, उसने नौकरी ज्वाइन करने से पहले ही सांसारिक जीवन त्यागने का फैसला कर लिया। बैतूल की 26 वर्षीय प्रखरश्री जैन ने न्यायिक सेवा में करियर बनाने के बजाय जैन धर्म के संयम और वैराग्य का मार्ग चुना है।
रविवार, 1 नवंबर को प्रखरश्री जैन समेत पांच दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में बैतूल में भव्य बिनौली शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान विंटेज कारों का काफिला, सजी-धजी शाही बग्घियां और राजस्थान के उदयपुर से आया बैंड आकर्षण का केंद्र रहे। शहर की सड़कों पर निकली इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग और श्रद्धालु शामिल हुए। परिवार और समाज के लोगों ने फूल-मालाओं और जयकारों के साथ पांचों बहनों को भावुक विदाई दी।
LLM में गोल्ड मेडलिस्ट हैं प्रखरश्री जैन
प्रखरश्री जैन की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं। वह LLM की पढ़ाई के दौरान गोल्ड मेडल प्राप्त कर चुकी हैं। उन्होंने लंदन में भी एक कोर्स किया है। इसके बाद उनका चयन सिविल जज के पद के लिए हुआ था।
उनके पिता LIC से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। माता-पिता की इच्छा थी कि उनकी बेटी न्यायिक सेवा में जाकर जज बने। प्रखरश्री ने परीक्षा पास करके उनका यह सपना पूरा भी कर दिया, लेकिन उनके मन में बचपन से ही आध्यात्मिक जीवन अपनाने और वैराग्य के मार्ग पर चलने की इच्छा थी।
जज बनने के बजाय भगवान महावीर के मार्ग पर चलने का फैसला
प्रखरश्री जैन ने अपने फैसले के पीछे आध्यात्मिक सोच को प्रमुख कारण बताया है। उनका मानना है कि जज या वकील बनकर वह समाज की जितनी सेवा करना चाहती हैं, उससे अधिक सेवा भगवान महावीर के बताए संयम और त्याग के मार्ग पर चलकर कर सकती हैं।
इसी विचार के साथ उन्होंने सिविल जज की नौकरी ज्वाइन नहीं करने और जैन दीक्षा ग्रहण करने का निर्णय लिया। उनका यह फैसला परिवार और समाज के लिए भावुक करने वाला जरूर है, लेकिन परिजनों ने उनकी आध्यात्मिक इच्छा का सम्मान किया है।
विंटेज कारों और शाही बग्घियों से निकली भव्य शोभायात्रा
बैतूल सकल जैन समाज के सहयोग से पांचों दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में विशेष बिनौली का आयोजन किया गया। शोभायात्रा में पुरानी विंटेज कारों का काफिला, आकर्षक शाही बग्घियां और उदयपुर से आया बैंड शामिल हुआ।
शहर के अलग-अलग मार्गों से गुजरते हुए इस चल समारोह का जगह-जगह स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने पांचों बहनों को पुष्पमालाएं पहनाईं और जयकारों के साथ उनका अभिनंदन किया।
शोभायात्रा का समापन जैन दादावाड़ी में हुआ। यहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म पूरी की गई। पूरे आयोजन में धार्मिक उत्साह के साथ भावुकता का माहौल भी देखने को मिला।
प्रखरश्री के साथ चार अन्य बहनें भी लेंगी जैन दीक्षा
इस आयोजन में केवल प्रखरश्री जैन ही नहीं, बल्कि चार अन्य दीक्षार्थी बहनें भी शामिल थीं। इनमें सहारनपुर की बाल ब्रह्मचारिणी रंगोली दीदी भी शामिल हैं।
पांचों बहनें 22 नवंबर 2026 को जैन दीक्षा ग्रहण करेंगी। दीक्षार्थी बहनों के अनुसार, बिनौली उनके सांसारिक जीवन से विदाई का महत्वपूर्ण अवसर है। फिलहाल वे रंगीन वस्त्रों में हैं, लेकिन दीक्षा के बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार सफेद वस्त्र धारण कर संयम का जीवन शुरू करेंगी।
क्या होती है जैन दीक्षा और बिनौली?
जैन धर्म में दीक्षा का अर्थ सांसारिक मोह-माया और सुख-सुविधाओं का त्याग करके आध्यात्मिक साधना, तपस्या और संयम का जीवन अपनाना है। दीक्षा लेने वाला व्यक्ति धार्मिक नियमों और अनुशासन के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करता है।
वहीं, दीक्षा से पहले निकाली जाने वाली बिनौली एक पारंपरिक विदाई शोभायात्रा होती है। इसमें परिवार और समाज के लोग दीक्षार्थियों का सम्मान करते हैं और उनके नए आध्यात्मिक जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हैं।
करियर की सफलता के बाद आध्यात्मिक जीवन का चुनाव
प्रखरश्री जैन का निर्णय इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल करने और न्यायिक सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के बाद भी अपनी बचपन की आध्यात्मिक इच्छा को प्राथमिकता दी।
बैतूल में आयोजित इस भव्य बिनौली ने लोगों के सामने एक अलग तस्वीर पेश की, जहां विंटेज कारों और शाही बग्घियों के बीच एक नई आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत का उत्सव मनाया गया।
अब 22 नवंबर को होने वाली जैन दीक्षा के साथ प्रखरश्री जैन और अन्य चार दीक्षार्थी बहनें अपने जीवन का नया अध्याय शुरू करेंगी।
