अलवर, राजस्थान | 30 अक्टूबर 2026
करवा चौथ का पर्व इस बार राजस्थान के अलवर में कुछ अलग ही नजारे का गवाह बना। आसमान में छाए बादलों और बारिश के कारण जब महिलाओं को अपने घरों की छतों से चांद दिखाई नहीं दिया, तो उन्होंने चंद्र दर्शन के लिए एक अनोखा रास्ता अपनाया। महिलाएं अपने पतियों और परिवार के सदस्यों के साथ तिजारा फाटक स्थित फ्लाईओवर पर पहुंच गईं। यहां चांद का इंतजार करते हुए महिलाओं ने पूजा की और चंद्रमा दिखाई देने पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपना व्रत खोला।
घरों में नहीं दिखा चांद, फ्लाईओवर पर जुटे परिवार
दरअसल, गुरुवार 29 अक्टूबर को करवा चौथ के अवसर पर अलवर में मौसम खराब रहा। आसमान में बादल छाए रहने और बारिश के चलते कई इलाकों में चंद्रमा के दर्शन करना मुश्किल हो गया था। महिलाएं सुबह से ही अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखे हुए थीं।
शाम होते ही महिलाओं ने सोलह शृंगार कर पूजा की तैयारियां शुरू कर दीं, लेकिन चांद नजर नहीं आने के कारण व्रत खोलने का इंतजार बढ़ता गया। ऐसे में कई महिलाएं अपने पतियों के साथ तिजारा फाटक फ्लाईओवर पहुंच गईं, जहां खुले आसमान में चंद्र दर्शन की उम्मीद थी।
फ्लाईओवर पर लगी गाड़ियों की लंबी कतार
चांद देखने की उम्मीद में फ्लाईओवर पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। देखते ही देखते वहां वाहनों की लंबी कतार लग गई। महिलाएं अपने पतियों के साथ चंद्रमा के निकलने का इंतजार करती रहीं। जैसे ही बादलों के बीच चांद दिखाई दिया, महिलाओं ने छलनी से चंद्रमा और अपने पति का चेहरा देखकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पतियों के हाथों जल ग्रहण किया और अपना निर्जला व्रत पूरा किया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनोखा नजारा
फ्लाईओवर पर करवा चौथ मनाने का यह दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इस दौरान बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में महिलाएं अपने पतियों के साथ चांद का इंतजार करती नजर आ रही हैं।
मौसम ने बढ़ाया चंद्र दर्शन का इंतजार
इस बार करवा चौथ के दिन खराब मौसम ने देश के कई हिस्सों में चंद्र दर्शन में परेशानी पैदा की। चक्रवाती तूफान अर्णब के प्रभाव से कई क्षेत्रों में बारिश और बादलों की स्थिति बनी रही। इसके चलते महिलाओं को चांद देखने के लिए सामान्य दिनों की तुलना में अधिक इंतजार करना पड़ा।
अलवर में तिजारा फाटक फ्लाईओवर पर जुटे परिवारों का यह नजारा दिखाता है कि मौसम की बाधाओं के बावजूद लोगों ने अपनी परंपराओं और त्योहार के उत्साह को बरकरार रखा।
