हरित दिवाली अभियान 2026: पटाखों से दूरी बनाने की अपील, 130 शहरों पर रहेगा खास फोकस

नई दिल्ली | 21 अक्टूबर 2026

दिवाली के त्योहार को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए देशभर में हरित दिवाली अभियान 2026 की शुरुआत की गई है। इस पहल के तहत लोगों से पटाखों का इस्तेमाल न करने, पारंपरिक दीयों और ऊर्जा-कुशल रोशनी को अपनाने तथा कचरे का उचित निस्तारण करने की अपील की गई है। अभियान का उद्देश्य त्योहारों के दौरान होने वाले प्रदूषण को कम करना और नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है।

यह राष्ट्रव्यापी अभियान WWF-India के पर्यावरण सूचना, जागरूकता, क्षमता निर्माण एवं आजीविका कार्यक्रम (EIACP) के कार्यक्रम केंद्र और संसाधन भागीदार की ओर से केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से शुरू किया गया है। अभियान 20 अक्टूबर से 8 नवंबर 2026 तक चलेगा।

130 शहरों पर रहेगा विशेष ध्यान

हरित दिवाली अभियान के तहत देशभर के स्कूलों, कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों, आवासीय कल्याण संघों (RWA) और स्थानीय समुदायों तक पहुंच बनाई जाएगी। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत आने वाले 130 शहरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इन शहरों में लोगों को पटाखों से होने वाले प्रदूषण के प्रति जागरूक करने और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक संगठनों को प्रार्थना सभाओं, कक्षाओं, रैलियों और सामुदायिक बैठकों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

लोगों से पटाखे नहीं जलाने की अपील

अभियान का प्रमुख संदेश दिवाली को पटाखा-मुक्त तरीके से मनाना है। इसके तहत नागरिकों को हरित दिवाली की शपथ लेने और अपने परिवार, मित्रों तथा पड़ोसियों को भी पटाखों से दूर रहने के लिए प्रेरित करने की सलाह दी गई है।

पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। दिवाली के आसपास पहले से मौजूद प्रदूषण में इनके कारण अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर स्थानीय मौसम, हवा की गति और प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर भी निर्भर करता है।

इसीलिए अभियान लोगों को ऐसे विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिनसे त्योहार की खुशियां बनाए रखते हुए पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।

दीये जलाने और ऊर्जा-कुशल रोशनी अपनाने पर जोर

हरित दिवाली अभियान में केवल पटाखों से दूरी बनाने की बात नहीं कही गई है, बल्कि रोजमर्रा की आदतों में पर्यावरण के अनुकूल बदलाव लाने पर भी जोर दिया गया है।

अभियान के तहत लोगों को मिट्टी के दीये जलाने, ऊर्जा-कुशल लाइटों का इस्तेमाल करने, एकल उपयोग वाले प्लास्टिक से बचने और कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील भी की गई है।

इन उपायों से त्योहारों के दौरान पैदा होने वाले कचरे को कम करने और स्थानीय कारीगरों तथा छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहन देने में मदद मिल सकती है।

स्कूलों और सामाजिक संगठनों की होगी भागीदारी

अभियान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों, पर्यावरण जागरूकता केंद्रों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना गया है। इन संस्थानों को हरित दिवाली की शपथ दिलाने और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के बारे में जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया है।

अभियान में भाग लेने वाले संस्थानों और समुदायों से अपनी गतिविधियों की जानकारी ऑनलाइन साझा करने का भी आग्रह किया गया है। इसमें संस्था का नाम और स्थान, गतिविधि की तारीख, शपथ लेने वाले लोगों की संख्या, स्थान-चिह्नित तस्वीरें और कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट शामिल होनी चाहिए।

चयनित गतिविधियों को संबंधित कार्यक्रम की वेबसाइटों और सोशल मीडिया माध्यमों पर प्रदर्शित किया जा सकता है।

कार्बन फुटप्रिंट सर्वेक्षण में भी ले सकते हैं हिस्सा

अभियान के अंतर्गत नागरिकों को WWF-India के कार्बन फुटप्रिंट सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। इस सर्वेक्षण के जरिए लोग समझ सकते हैं कि उनकी दैनिक गतिविधियां, खरीदारी और उपभोग की आदतें पर्यावरण पर किस प्रकार प्रभाव डालती हैं।

इसका उद्देश्य लोगों को अपनी जीवनशैली में ऐसे बदलाव करने के लिए प्रेरित करना है, जिनसे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सके।

हरित दिवाली क्यों है जरूरी?

भारत के कई शहरों में त्योहारों के आसपास वायु प्रदूषण एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती बन जाता है। पटाखों से निकलने वाले प्रदूषक वाहनों, उद्योगों, धूल और अन्य स्रोतों से होने वाले प्रदूषण में योगदान कर सकते हैं।

हालांकि, केवल पटाखों का इस्तेमाल कम करने से वायु प्रदूषण की सभी समस्याएं समाप्त नहीं होंगी। इसके लिए परिवहन, उद्योगों, निर्माण गतिविधियों और कचरा प्रबंधन से जुड़े प्रदूषण पर भी नियंत्रण जरूरी है। फिर भी, नागरिकों की भागीदारी से त्योहारों के दौरान होने वाले अतिरिक्त प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।

हरित दिवाली अभियान इसी दिशा में लोगों को जागरूक करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देने का प्रयास है।

नागरिक कैसे बन सकते हैं अभियान का हिस्सा?

हरित दिवाली अभियान में भाग लेने के लिए नागरिक कुछ आसान कदम अपना सकते हैं:

  • पटाखों से दूर रहकर दिवाली मनाने की शपथ लें।
  • घरों में मिट्टी के दीये और ऊर्जा-कुशल रोशनी का उपयोग करें।
  • सजावट और खरीदारी में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक से बचें।
  • सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग रखें।
  • स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को प्राथमिकता दें।
  • परिवार, मित्रों और पड़ोसियों को पर्यावरण-अनुकूल दिवाली मनाने के लिए प्रेरित करें।

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