नई दिल्ली | 30 सितंबर 2026
पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है और उनकी तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करता है। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की मुख्य अवधि 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक मानी जा रही है और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी।
पितृ पक्ष को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कई परंपराएं हैं। इन्हीं मान्यताओं के तहत इस अवधि में कुछ नई वस्तुओं की खरीदारी को टालने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि यह समय भौतिक सुख-सुविधाओं और उत्सव के बजाय सादगी, संयम, पूर्वजों के स्मरण और दान के लिए समर्पित होना चाहिए।
1. सोना और चांदी
धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान सोना, चांदी और आभूषण जैसी महंगी वस्तुओं की नई खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। इसे उत्सव या भौतिक वैभव से जुड़ी खरीदारी माना जाता है, जबकि श्राद्ध पक्ष में सादगी रखने की परंपरा है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि घर में पहले से मौजूद सोने-चांदी का इस्तेमाल या रखना अशुभ है। मुख्य बात नई खरीदारी को लेकर बताई जाने वाली परंपरा है।
2. नए कपड़े
पितृ पक्ष में नए कपड़े खरीदने से परहेज करने की मान्यता भी कई जगह प्रचलित है। इसके पीछे विचार यह है कि श्राद्ध पक्ष को उत्सव या मांगलिक अवसर के रूप में नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और स्मरण के समय के रूप में देखा जाता है।
हालांकि रोजमर्रा की जरूरत के कपड़े खरीदना हर परिवार में निषिद्ध हो, ऐसा कोई एक समान नियम नहीं है। इस संबंध में परिवार और क्षेत्र की परंपराएं अलग हो सकती हैं।
3. नई झाड़ू
कुछ धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान नई झाड़ू खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। हालिया धार्मिक लेखों में झाड़ू को उन वस्तुओं में शामिल किया गया है जिनकी नई खरीदारी इस अवधि में टालने की बात कही गई है।
इस मान्यता को धार्मिक परंपरा के रूप में ही समझना चाहिए। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि पितृ पक्ष में झाड़ू खरीदने से आर्थिक नुकसान होता है।
4. नमक
कुछ परंपराओं में पितृ पक्ष के दौरान नमक की नई खरीदारी से भी परहेज करने की बात कही जाती है। इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं मौजूद हैं और सभी हिंदू परिवारों में यह नियम समान रूप से लागू नहीं होता।
इसलिए अगर घर में रोजमर्रा के भोजन के लिए नमक की जरूरत हो, तो इसे लेकर डर पैदा करने के बजाय अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यता को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।
5. सरसों का तेल
कुछ ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान सरसों का तेल खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं से जुड़े अलग-अलग तर्क बताए जाते हैं।
हालांकि, सरसों के तेल का इस्तेमाल श्राद्ध कर्म या सामान्य भोजन में परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए इसे पूर्ण धार्मिक निषेध मानना सही नहीं होगा।
क्या सच में इन चीजों को घर लाने से कंगाली आती है?
यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि पितृ पक्ष में इन वस्तुओं को खरीदने से परिवार में कंगाली या आर्थिक संकट आ जाता है। “पितर नाराज हो जाएंगे” या “धन चला जाएगा” जैसी बातें धार्मिक मान्यताओं और लोक-परंपराओं से जुड़ी हैं।
पितृ पक्ष का मूल उद्देश्य पूर्वजों का स्मरण, श्राद्ध, तर्पण, दान और परिवार की परंपराओं का पालन करना है। धार्मिक स्रोत भी इस अवधि में श्रद्धा, संयम और सही तिथि पर कर्मकांड करने को महत्वपूर्ण बताते हैं।
पितृ पक्ष में किन बातों पर दें ध्यान?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दौरान पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करना महत्वपूर्ण माना जाता है। तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और दान-पुण्य भी कई परिवारों की परंपरा का हिस्सा हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में विधि और नियम बदल सकते हैं।
इस साल 29 सितंबर को महाभरणी और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या जैसे विशेष दिन भी आते हैं। वहीं 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध की तिथियां एक ही दिन पड़ती हैं, इसलिए तिथि देखकर श्राद्ध करने की परंपरा रखने वालों को स्थानीय पंचांग देखना चाहिए।
