नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026। हिंदू धर्म में हरतालिका तीज को महिलाओं के प्रमुख व्रत-त्योहारों में से एक माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं, धार्मिक मान्यता के अनुसार अविवाहित कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत करती हैं। हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
इस बार हरतालिका तीज की तारीख को लेकर लोगों के बीच 14 और 15 सितंबर को लेकर असमंजस बना हुआ है। हालांकि पंचांग की गणना और उदया तिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा। खास बात यह है कि इसी दिन गणेश चतुर्थी भी शुरू हो रही है, जिससे इस बार का पर्व और भी विशेष बन गया है।
14 सितंबर को ही क्यों रखा जाएगा व्रत?
पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026 को सुबह करीब 7:08 बजे शुरू होगी और 14 सितंबर की सुबह करीब 7:06 बजे समाप्त हो जाएगी।
चूंकि 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदया तिथि के नियम के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को ही मान्य होगा।
इसका मतलब यह है कि 15 सितंबर को हरतालिका तीज का मुख्य व्रत नहीं रखा जाएगा। 15 सितंबर का दिन व्रत के पारण और आगे की धार्मिक प्रक्रिया से जुड़ा हो सकता है।
हरतालिका तीज 2026 का पूजा मुहूर्त
हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 14 सितंबर को प्रातःकाल हरतालिका पूजा का समय लगभग 6:05/6:13 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा। अलग-अलग शहरों के सूर्योदय के अनुसार इसमें कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए इंदौर के लिए प्रातः पूजा मुहूर्त 6:13 से 7:06 बजे तक दिया गया है।
इस दौरान महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा कर सकती हैं। पूजा के दौरान व्रत कथा सुनने या पढ़ने की भी धार्मिक परंपरा है।
तृतीया तिथि का पूरा समय
हरतालिका तीज की तारीख समझने के लिए तृतीया तिथि का समय सबसे महत्वपूर्ण है।
तृतीया तिथि प्रारंभ:
13 सितंबर 2026, सुबह करीब 7:08 बजे
तृतीया तिथि समाप्त:
14 सितंबर 2026, सुबह करीब 7:06 बजे
यानी तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह तक रहेगी। चूंकि 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया मौजूद है, इसलिए इसी दिन व्रत रखा जाएगा।
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन
इस साल की सबसे खास बात यह है कि 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों पर्व पड़ रहे हैं।
सुबह के समय तृतीया तिथि के रहते हरतालिका तीज की पूजा की जाएगी और तृतीया समाप्त होने के बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। इसके बाद दोपहर में गणेश चतुर्थी की पूजा और गणपति स्थापना का आयोजन किया जा सकता है।
इस तरह 14 सितंबर धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण दिन रहने वाला है। सुबह शिव-पार्वती की आराधना और बाद में गणपति स्थापना के कारण घरों में पूरे दिन धार्मिक माहौल रहने की संभावना है।
हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि माता पार्वती ने कठिन परिस्थितियों में तप किया और भगवान शिव की आराधना की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
इसी धार्मिक कथा से हरतालिका तीज का संबंध माना जाता है। इसी वजह से इस दिन महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करती हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं हैं, जिन्हें हिंदू परंपरा में श्रद्धा के साथ माना जाता है।
सुहागिन महिलाएं रखती हैं निर्जला व्रत
हरतालिका तीज को कठिन व्रतों में शामिल किया जाता है। कई परंपराओं में महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं, यानी पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करती हैं।
विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं कुछ स्थानों पर अविवाहित युवतियां भी अच्छे और मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं।
हालांकि स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार व्रत रखने का तरीका अलग हो सकता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को कठोर निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित माना जाता है।
शिव-पार्वती की पूजा का विधान
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। कई जगह मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा भी है।
पूजा में सुहाग सामग्री, फल, फूल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। महिलाएं माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करती हैं और अपने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
पूजा के दौरान हरतालिका तीज की कथा सुनना या पढ़ना भी परंपरा का हिस्सा है।
शाम की पूजा को लेकर भी परंपरा
हरतालिका तीज में केवल सुबह की पूजा ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में शाम को भी शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। प्रदोष काल को भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
हालांकि अलग-अलग पंचांगों और स्थानीय परंपराओं में पूजा के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी विशेष शहर के लिए पूजा का सटीक समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना बेहतर रहेगा।
व्रत का पारण कब?
हरतालिका तीज का व्रत अगले दिन पारण के साथ पूरा किया जाता है। उपलब्ध गणना के अनुसार तृतीया तिथि 14 सितंबर की सुबह समाप्त होने के बाद भी कुछ पंचांगों में पारण से जुड़े समय को स्थानीय धार्मिक परंपरा और भद्रा आदि के अनुसार निर्धारित किया गया है।
एक उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 15 सितंबर की सुबह 7:44 बजे के बाद पारण का समय बताया गया है। हालांकि यह समय स्थान और पंचांग परंपरा के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।
इस बार क्यों खास है 14 सितंबर?
2026 में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का एक ही दिन पड़ना इस पर्व को खास बना रहा है। 14 सितंबर की सुबह महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत और शिव-पार्वती की पूजा करेंगी, जबकि बाद में गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की स्थापना और पूजा का क्रम शुरू होगा।
ऐसे में धार्मिक दृष्टि से 14 सितंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरों में सुबह से ही पूजा-पाठ और तैयारियों का माहौल रहेगा।
अंतिम बात—14 सितंबर या 15 सितंबर?
हरतालिका तीज की तारीख को लेकर चल रहे भ्रम का सीधा जवाब है कि 2026 में हरतालिका तीज का मुख्य व्रत 14 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा।
तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह समाप्त होगी और 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया मौजूद होने के कारण उदया तिथि के आधार पर व्रत की तारीख 14 सितंबर मानी जा रही है।
इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं 14 सितंबर की तारीख नोट कर लें और पूजा के लिए अपने शहर के अनुसार स्थानीय पंचांग से सटीक मुहूर्त जरूर जांच लें।
