दिल्ली के सत्य निकेतन में मौत का मंजर, जर्जर इमारतों के बीच छात्रों की जिंदगी पर खतरा

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत गिरने के बाद राजधानी में पुरानी और जर्जर इमारतों, अवैध निर्माण तथा छात्रों के लिए चल रहे PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 10 लोग घायल हुए हैं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए राहत और बचाव अभियान चलाया गया।

सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित प्रमुख छात्र इलाकों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। इसी वजह से किसी भी इमारत से जुड़ी सुरक्षा संबंधी लापरवाही का खतरा सीधे छात्रों और वहां रहने वाले लोगों की जिंदगी से जुड़ जाता है।

हादसे के बाद सामने आई इलाके की तस्वीर

इमारत गिरने की घटना के बाद इलाके की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सत्य निकेतन की कुछ गलियां बेहद संकरी हैं। कई जगह बिजली के तार नीचे तक लटके दिखाई देते हैं और आसपास पुरानी इमारतें मौजूद हैं।

ऐसे इलाके में अगर किसी इमारत में आपात स्थिति पैदा होती है, तो दमकल और राहत-बचाव टीमों के लिए घटनास्थल तक तेजी से पहुंचना भी चुनौती बन सकता है।

इमारत हादसे ने इस पूरे इलाके में रहने वाले लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान खींचा है।

करीब 40-50 साल पुरानी थी इमारत

Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक जिस इमारत के गिरने से यह हादसा हुआ, वह करीब 40 से 50 साल पुरानी बताई जा रही है। इमारत में PG/हॉस्टल के तौर पर छात्रों के रहने की जानकारी सामने आई है।

रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि इतनी पुरानी इमारत में छात्रों को रहने की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच किस स्तर पर हुई थी।

तीन मंजिल से पांच मंजिल तक निर्माण का सवाल

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल इमारत के निर्माण को लेकर उठ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पुरानी इमारत को तीन मंजिल से बढ़ाकर करीब पांच मंजिल तक किया गया था।

अब यह जांच का विषय है कि अतिरिक्त निर्माण के लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई थी या नहीं और क्या इमारत की संरचनात्मक क्षमता की जांच की गई थी।

अगर किसी पुरानी इमारत में बिना उचित अनुमति या संरचनात्मक जांच के अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई हों, तो इससे इमारत की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

बेसमेंट में चल रहा था काम

हादसे से पहले इमारत के बेसमेंट में काम चलने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक हादसे के समय बेसमेंट में पानी भरा हुआ था, इसके बावजूद वहां काम जारी था।

इसी वजह से अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या निर्माण या मरम्मत का काम सुरक्षा नियमों के मुताबिक किया जा रहा था और क्या काम शुरू करने से पहले इमारत की संरचनात्मक स्थिति की जांच की गई थी।

PG और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर सवाल

सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे में यहां पुरानी इमारतों का इस्तेमाल छात्र आवास के तौर पर किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

छात्र आमतौर पर किराये पर कमरा या PG लेते समय इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा, निर्माण अनुमति या फायर सेफ्टी की जानकारी की जांच नहीं कर पाते। ऐसे में इन मानकों की जांच और निगरानी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी बनती है।

तंग गलियों में रेस्क्यू भी बड़ी चुनौती

सत्य निकेतन की संकरी गलियों को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। बिल्डिंग गिरने जैसी आपात स्थिति में बड़े दमकल वाहन और राहत-बचाव उपकरणों को घटनास्थल तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हादसे के बाद आसपास की इमारतों को भी एहतियात के तौर पर खाली कराया गया। प्रशासन और बचाव एजेंसियों ने मलबे को हटाकर लोगों को बाहर निकालने का अभियान चलाया।

बिजली के तार और पुरानी इमारतें भी चिंता का कारण

इलाके में लटकते बिजली के तार और पुरानी इमारतें हादसे के बाद चर्चा का केंद्र बन गई हैं। किसी इमारत के अचानक गिरने या आग लगने जैसी स्थिति में बिजली के तार अतिरिक्त खतरा पैदा कर सकते हैं।

इसलिए स्थानीय स्तर पर बिजली नेटवर्क, भवनों की स्थिति और आपातकालीन रास्तों की भी जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।

छह लोगों की मौत, कई घायल

बिल्डिंग हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। 10 लोगों के घायल होने की भी रिपोर्ट है। घायलों में छात्र और मजदूर शामिल बताए गए हैं। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

हादसे के बाद मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते देर रात तक राहत और बचाव अभियान जारी रहा।

मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ FIR

हादसे के बाद पुलिस ने इमारत के मालिक और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। अब जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत की वास्तविक स्थिति क्या थी, निर्माण और बेसमेंट के काम के लिए क्या अनुमति थी और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

क्या पहले हुई थी इमारत की जांच?

हादसे के बाद सबसे अहम सवाल यही है कि क्या इतनी पुरानी इमारत का समय-समय पर निरीक्षण किया गया था।

अगर इमारत में अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं या बेसमेंट में निर्माण/मरम्मत का काम चल रहा था, तो संबंधित विभागों द्वारा उसकी संरचनात्मक स्थिति की जांच किए जाने की आवश्यकता थी।

अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किस स्तर पर लापरवाही हुई।

दिल्ली की पुरानी इमारतों पर भी नजर की जरूरत

सत्य निकेतन हादसे ने केवल एक इमारत की सुरक्षा पर सवाल नहीं उठाया है, बल्कि दिल्ली की पुरानी और जर्जर इमारतों की स्थिति पर भी ध्यान खींचा है।

राजधानी में बड़ी संख्या में पुरानी इमारतें मौजूद हैं। इनमें से कई जगहों पर समय के साथ अतिरिक्त निर्माण, बदलाव या मरम्मत के काम किए जाते हैं। ऐसे में नियमित structural audit और भवन सुरक्षा जांच की जरूरत महत्वपूर्ण हो जाती है।

अवैध निर्माण पर कार्रवाई की मांग

हादसे के बाद अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी तेज हो सकती है। अगर किसी इमारत में स्वीकृत नक्शे के विपरीत अतिरिक्त निर्माण किया गया है, तो संबंधित एजेंसियों को इसकी जांच करनी होगी।

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय खतरनाक इमारतों की पहचान पहले क्यों नहीं की जाती?

अब जांच से सामने आएगी असली वजह

फिलहाल हादसे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। बेसमेंट में चल रहा काम, इमारत की उम्र, अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण और भवन की संरचनात्मक स्थिति जैसे सभी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।

साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या भवन मालिक, निर्माण से जुड़े लोगों या संबंधित एजेंसियों की तरफ से किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई थी।

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