कोलंबो, 25 अगस्त 2026: श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरेल ने सिर्फ बल्ले से ही नहीं, बल्कि अपने एक खास अंदाज से भी करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया। जुरेल ने दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 115 रन की पारी खेली और टेस्ट क्रिकेट में अपना दूसरा शतक पूरा किया। लेकिन उनकी सेंचुरी से ज्यादा चर्चा उनके शतक के बाद किए गए सेलिब्रेशन की हुई।
शतक पूरा होते ही जुरेल ने हेलमेट उतारा, बल्ला उठाया और फिर एक खास अंदाज में सलामी दी। इसके बाद उन्होंने अपने बाइसेप्स की तरफ इशारा किया, जहां “जय जवान, जय किसान” का टैटू बना हुआ है।
शुरुआत में मैदान पर मौजूद दर्शकों और टीवी पर मैच देख रहे लोगों को यह सिर्फ एक देशभक्ति से जुड़ा सेलिब्रेशन लगा, लेकिन बाद में जुरेल ने खुद बताया कि इस टैटू के पीछे उनके परिवार की बेहद भावुक कहानी जुड़ी हुई है।
पिता सैनिक, दादा किसान… यही हैं जुरेल की जड़ें
शतक के बाद जब जुरेल से उनके खास सेलिब्रेशन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके दादा किसान थे और पिता सैनिक रहे हैं।
जुरेल ने कहा कि “यही मेरी जड़ें हैं और मैं इन्हें भूलना नहीं चाहता।” इसी वजह से उन्होंने अपनी बांह पर “जय जवान, जय किसान” लिखवाया है।
उनका यह बयान सामने आते ही उनके सेलिब्रेशन का मतलब और भी खास हो गया।
एक तरफ उनके दादा ने खेती से परिवार को जोड़ा और दूसरी तरफ उनके पिता ने देश की सेवा की। जुरेल ने क्रिकेट के मैदान पर अपने शतक को इन दोनों विरासतों को सम्मान देने के अवसर में बदल दिया।
शतक के बाद क्यों दी सलामी?
ध्रुव जुरेल ने शतक पूरा करने के बाद जिस अंदाज में सलामी दी, वह उनके पिता के प्रति सम्मान का प्रतीक था।
उनके पिता सेना में रहे हैं। ऐसे में शतक पूरा करने के बाद सैनिकों को सलामी देना उनके लिए व्यक्तिगत भावनाओं से जुड़ा हुआ था।
इसके साथ ही बांह पर बना “जय जवान, जय किसान” टैटू उनके दादा और पिता दोनों को एक साथ सम्मान देता है।
एक ही टैटू में उनके परिवार की दो पीढ़ियों की पहचान दिखाई देती है—जवान और किसान।
‘जय जवान, जय किसान’ सिर्फ टैटू नहीं, परिवार की पहचान
“जय जवान, जय किसान” भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से जुड़ा प्रसिद्ध नारा है। इसका संदेश देश की सुरक्षा करने वाले सैनिक और देश के लिए अन्न पैदा करने वाले किसान, दोनों के योगदान को सम्मान देना है।
जुरेल ने इसी संदेश को अपनी निजी जिंदगी और पारिवारिक विरासत से जोड़ लिया है।
उनके लिए यह सिर्फ शरीर पर बना एक टैटू नहीं है। यह उनके परिवार की जड़ों और उन मूल्यों की याद है जिनसे उनका जीवन जुड़ा रहा है।
शतक माता-पिता को किया समर्पित
ध्रुव जुरेल ने कोलंबो में लगाया अपना यह शतक अपने माता-पिता को समर्पित किया।
उनकी इस पारी में सिर्फ रन नहीं थे, बल्कि उनके परिवार के संघर्ष और योगदान की झलक भी दिखाई दी।
क्रिकेट के मैदान पर जब उन्होंने 100 रन पूरे किए तो उन्होंने जिस तरह अपने टैटू की ओर इशारा किया, उससे साफ था कि यह पल उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत खास था।
कोलंबो में जुरेल का शानदार शतक
भारत और श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन जुरेल ने शानदार बल्लेबाजी की।
उन्होंने दबाव के बीच अपनी पारी को संभाला और धीरे-धीरे बड़े स्कोर की तरफ बढ़े। अंततः उन्होंने अपना दूसरा टेस्ट शतक पूरा किया।
जुरेल 115 रन बनाकर नाबाद रहे, जिसकी बदौलत भारतीय टीम का स्कोर 500 रन के पार पहुंच गया।
उनकी पारी में धैर्य और आक्रामकता दोनों का अच्छा संतुलन देखने को मिला।
ऋषभ पंत के साथ हुई बड़ी साझेदारी
जुरेल ने भारतीय पारी के दौरान ऋषभ पंत के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी भी की।
पंत ने अपने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 63 रन बनाए। दोनों ने मिलकर भारतीय पारी को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
पंत के साथ बल्लेबाजी करने के अनुभव को लेकर जुरेल ने कहा कि वह पंत जैसे अनुभवी खिलाड़ी से परिस्थितियों के अनुसार सलाह लेते रहते हैं।
यह साझेदारी भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि इससे टीम को मध्यक्रम में मजबूती मिली।
जुरेल ने नहीं छोड़ा अपना स्वाभाविक खेल
ऋषभ पंत जैसे आक्रामक बल्लेबाज के साथ बल्लेबाजी करते समय जुरेल के सामने चुनौती थी कि वह अपने खेल के तरीके को कैसे बनाए रखें।
लेकिन उन्होंने अपनी शैली पर भरोसा किया और परिस्थितियों के मुताबिक बल्लेबाजी की।
उन्होंने जरूरत के समय संयम दिखाया और खराब गेंदों को बाउंड्री तक पहुंचाया।
यही वजह रही कि वह लंबी पारी खेलने में सफल रहे।
श्रीलंका में खेलने का पहले का अनुभव आया काम
जुरेल ने यह भी बताया कि श्रीलंका में भारत ए के साथ पहले खेल चुके होने का अनुभव उन्हें इस सीरीज में काफी मदद कर रहा है।
उन्हें वहां की परिस्थितियों और पिच के बारे में पहले से कुछ अनुभव था।
इससे उन्हें दूसरे टेस्ट में बल्लेबाजी करते समय परिस्थितियों को समझने में फायदा मिला।
लगातार बढ़ रहा है जुरेल का कद
भारतीय क्रिकेट में ध्रुव जुरेल का नाम धीरे-धीरे एक भरोसेमंद विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में मजबूत हो रहा है।
उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी से कई बार प्रभावित किया है और अब विदेश में शतक लगाकर उन्होंने अपनी क्षमता का एक और उदाहरण पेश किया है।
कोलंबो का यह शतक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनके टेस्ट करियर का दूसरा शतक है और उन्होंने इसे दबाव वाली परिस्थितियों में बनाया।
जुरेल के लिए यह सिर्फ क्रिकेट नहीं
ध्रुव जुरेल की कहानी क्रिकेट से आगे जाती है।
एक सैनिक के बेटे के रूप में बड़े होने और परिवार में किसान की जड़ों से जुड़े होने के कारण देश और मिट्टी से उनका रिश्ता उनके लिए विशेष महत्व रखता है।
इसलिए शतक के बाद किया गया उनका सेलिब्रेशन एक सामान्य क्रिकेट सेलिब्रेशन नहीं था।
उन्होंने मैदान पर अपने परिवार को याद किया और अपने टैटू के जरिए अपनी पहचान दुनिया के सामने रखी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सेलिब्रेशन
जुरेल का यह सेलिब्रेशन देखते ही देखते सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
क्रिकेट प्रशंसकों ने उनकी सलामी और टैटू की तस्वीरें शेयर कीं। लोगों को खास तौर पर यह बात पसंद आई कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि को अपने पिता और दादा के सम्मान से जोड़ दिया।
कई प्रशंसकों ने उनके इस अंदाज को देशभक्ति और पारिवारिक सम्मान का खूबसूरत मेल बताया।
पिता की सेवा और दादा की मेहनत को सलाम
जुरेल के इस सेलिब्रेशन को अगर उनकी बातों के संदर्भ में देखा जाए तो इसमें दो अलग-अलग लेकिन समान रूप से महत्वपूर्ण पेशों को सम्मान दिया गया।
सैनिक देश की रक्षा करता है और किसान देश का पेट भरता है।
जुरेल ने अपने टैटू के जरिए दोनों को सम्मान दिया और अपने शतक के बाद उसी संदेश को मैदान पर दोहराया।
क्रिकेट और परिवार का भावुक मेल
अक्सर क्रिकेटर शतक लगाने के बाद अपने परिवार, पत्नी, बच्चों या किसी खास व्यक्ति को याद करते हैं।
लेकिन जुरेल का अंदाज थोड़ा अलग था।
उन्होंने अपने परिवार की दो पीढ़ियों को एक साथ याद किया। एक तरफ पिता की सैन्य सेवा और दूसरी तरफ दादा की खेती—दोनों को “जय जवान, जय किसान” के एक संदेश में समेट दिया।
यही वजह है कि उनका सेलिब्रेशन क्रिकेट प्रशंसकों के लिए भावुक बन गया।
भारत के लिए भी बड़ी पारी
भावनात्मक पहलू के अलावा जुरेल का शतक भारतीय टीम के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण रहा।
उनकी नाबाद 115 रन की पारी ने भारत को बड़ा स्कोर खड़ा करने में मदद की। जुरेल ने पारी के अंत तक टिककर बल्लेबाजी की और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
उनकी पारी के साथ भारत ने श्रीलंका पर दबाव बढ़ाया।
जुरेल के शतक ने दिया बड़ा संदेश
जुरेल का यह शतक केवल स्कोरकार्ड पर दर्ज एक आंकड़ा नहीं रहा।
इसने यह भी दिखाया कि युवा भारतीय क्रिकेटर अपनी व्यक्तिगत पहचान और पारिवारिक विरासत को लेकर कितने जागरूक हैं।
मैदान पर एक छोटी-सी सलामी और टैटू की ओर इशारा करने से उन्होंने अपने परिवार की कहानी लाखों लोगों तक पहुंचा दी।
आने वाले समय में बड़ी उम्मीदें
भारतीय टीम को विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में एक ऐसे खिलाड़ी की जरूरत है जो दबाव में बल्लेबाजी कर सके।
जुरेल लगातार अपने प्रदर्शन से यह भरोसा पैदा कर रहे हैं कि वह लंबे समय तक टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
कोलंबो का शतक उनके करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा सकता है।
