नई दिल्ली | 18 अगस्त 2026
बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना विस्तृत पक्ष रखा है। सरकार ने अदालत में दाखिल काउंटर एफिडेविट में पुलिस पर लगाए गए अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है। साथ ही सरकार ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, दर्ज FIR, गिरफ्तारियों और सीवान में पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से की गई फायरिंग का पूरा घटनाक्रम अदालत के सामने रखा है।
सरकार के मुताबिक 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में कुल 69 FIR दर्ज की गईं और 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किए जाने की बात भी हलफनामे में कही गई है। इसके अलावा 75 नाबालिगों को Juvenile Justice Board के जरिए छोड़े जाने की जानकारी दी गई है।
सीवान में AK-47 से चलीं 4 गोलियां
इस पूरे मामले का सबसे चर्चित हिस्सा सीवान में AK-47 से फायरिंग का है।
बिहार सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि सीवान के जेपी चौक के पास प्रदर्शन के दौरान एक कांस्टेबल भीड़ के बीच फंस गया था। स्थिति बिगड़ने के दौरान उसने अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए।
सरकार का दावा है कि AK-47 से चली इन गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी। हालांकि फायरिंग को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि AK-47 का इस्तेमाल सामान्य कानून-व्यवस्था संभालने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। हलफनामे में इसे विशेष परिस्थितियों और विशेष अभियानों के लिए इस्तेमाल होने वाला हथियार बताया गया है।
पुलिसकर्मी क्यों चला बैठा AK-47?
राज्य सरकार के अनुसार सीवान में तैनात पुलिस बल उस समय भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं था। स्थिति बिगड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
इसी दौरान जेपी चौक के पास एक कांस्टेबल भीड़ के बीच फंस गया। सरकार के मुताबिक अपनी सुरक्षा को लेकर स्थिति गंभीर होने पर उसने AK-47 से चार राउंड हवा में फायर किए।
हालांकि सरकार ने यह भी माना कि इस तरह हथियार का इस्तेमाल वांछित आचरण नहीं था, जिसके कारण संबंधित कांस्टेबल को निलंबित किया गया और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई।
हाथी चौक पर भी चली गोलियां
सरकार के हलफनामे में एक अन्य फायरिंग की घटना का भी उल्लेख है।
हाथी चौक के पास एक ASI ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9mm पिस्टल से दो राउंड फायर किए।
सरकार के मुताबिक इस घटना में तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली गोली लगने जैसी चोटें आईं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि ये तीनों लोग AK-47 की फायरिंग से घायल नहीं हुए थे और वे उस जगह पर भी मौजूद नहीं थे जहां AK-47 से गोली चली थी।
मामले में फायरिंग से जुड़ी परिस्थितियों की जांच के लिए बैलिस्टिक जांच भी जारी होने की बात कही गई है। इसमें हथियार के प्रकार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के कोण जैसी चीजों की जांच की जा रही है।
69 FIR और 500 गिरफ्तारियां
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 22 जुलाई से 25 जुलाई के बीच राज्यभर में 69 FIR दर्ज की गईं।
इन मामलों में कुल 500 गिरफ्तारियां की गईं।
हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि जिन छात्र प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, उनके खिलाफ पुलिस ने अनावश्यक रूप से कठोर कार्रवाई नहीं की।
सरकार के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में 222 ऐसे छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। वहीं 75 नाबालिगों को Juvenile Justice Board के माध्यम से रिहा किया गया।
सरकार ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग से किया इनकार
छात्रों की ओर से पुलिस पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य तरीकों से अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए गए थे।
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पुलिस ने परिस्थिति के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की।
सरकार ने हालांकि आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल की बात स्वीकार की है। हलफनामे के अनुसार इन कार्रवाइयों में कुछ प्रदर्शनकारी घायल हुए थे।
सरकार का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सरकारी अधिकारियों पर भी हमले किए गए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
157 पुलिसकर्मी भी घायल हुए
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आंदोलन के दौरान 157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल हुए।
सरकार के मुताबिक कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ हिंसक हो गई थी और पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाया गया।
इसलिए सरकार का तर्क है कि पूरे आंदोलन को केवल शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन के तौर पर नहीं देखा जा सकता और कई जगहों पर कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति पैदा हुई थी।
छपरा में स्थिति हुई बेहद गंभीर
हलफनामे में छपरा की घटना का भी विशेष उल्लेख किया गया है।
सरकार के अनुसार 25 जुलाई को दोपहर तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन इसके बाद कुछ असामाजिक तत्व भीड़ में शामिल हो गए और स्थिति बिगड़ गई।
इसके बाद पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं।
सरकार के मुताबिक इस हिंसा में 2 BDO, 3 पुलिस इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल घायल हुए।
हलफनामे में दावा किया गया है कि एक BDO की आंख को नुकसान पहुंचा, जबकि दूसरे अधिकारी के सिर पर भारी वस्तु से गंभीर चोट लगी और उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी।
किन-किन जगहों पर बिगड़ी स्थिति?
बिहार सरकार ने अपने हलफनामे में आंदोलन के दौरान कई इलाकों में हिंसा और तनाव का उल्लेख किया है।
इनमें प्रमुख रूप से—
- पटना
- सीवान
- जहानाबाद
- छपरा
- भागलपुर
- सीतामढ़ी
- औरंगाबाद
- कटिहार
- किशनगंज
शामिल हैं।
सरकार के मुताबिक इन स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग स्तर पर कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हुई।
प्रदर्शनकारियों का डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बिहार सरकार ने प्रदर्शनकारियों से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा को लेकर भी कदम उठाने की बात कही है।
सरकार के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान एकत्र किए गए प्रदर्शनकारियों के व्यक्तिगत विवरण और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
सरकार ने यह भी कहा है कि प्रदर्शन से संबंधित वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को दिए गए हैं।
छात्रों के खिलाफ जबरन कार्रवाई नहीं करने का दावा
हलफनामे में बिहार सरकार ने कहा कि जिन प्रदर्शनकारी छात्रों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, उनके खिलाफ पुलिस coercive measures नहीं अपना रही है।
18 वर्ष से कम उम्र के उन बच्चों को भी रिहा करने की बात कही गई है, जिन्हें आंदोलन के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।
ऐसे नाबालिगों को उनके या परिवार के सदस्यों की ओर से साधारण बॉन्ड दिए जाने के बाद रिहा किए जाने की बात कही गई है।
AK-47 विवाद ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान
सीवान में AK-47 से फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था।
पुलिसकर्मी को निलंबित किए जाने के बावजूद विपक्ष और छात्र संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि पुलिसकर्मी ने भीड़ में फंसने के बाद हवा में फायरिंग की थी और किसी व्यक्ति को AK-47 की गोली नहीं लगी।
इसी वजह से सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह तर्क रखा है कि AK-47 के इस्तेमाल की घटना को पूरे पुलिस बल द्वारा छात्रों पर जानबूझकर गोली चलाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सरकार ने माना कि AK-47 का इस्तेमाल उचित नहीं था
हलफनामे की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने AK-47 के इस्तेमाल को पूरी तरह सही नहीं ठहराया।
सरकार ने कहा कि AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है और इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए किया जाना चाहिए, सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं।
सरकार ने यह भी बताया कि राज्य के DGP की ओर से AK-47 के इस्तेमाल को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में अब आगे क्या?
बिहार सरकार का यह हलफनामा छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं में राज्य का औपचारिक जवाब है।
अब सुप्रीम कोर्ट सरकार के इस पक्ष, पुलिस कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज और अन्य दस्तावेजों को देखेगा। अदालत यह भी देख सकती है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई में कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
फिलहाल सरकार का कहना है कि उसने सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों का पालन किया है और प्रदर्शनकारियों के डेटा को सार्वजनिक न करने तथा वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखने जैसे कदम उठाए हैं।
मामले में सबसे अहम आंकड़े
| मुद्दा | बिहार सरकार के हलफनामे के मुताबिक |
|---|---|
| FIR | 69 |
| गिरफ्तारियां | 500 |
| बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्र, जमानत पर रिहा | 222 |
| रिहा किए गए नाबालिग | 75 |
| घायल पुलिसकर्मी | 157 |
| घायल सरकारी कर्मचारी | 7 |
| सीवान में AK-47 से फायरिंग | 4 राउंड |
| हाथी चौक पर 9mm पिस्टल से फायरिंग |
