भोपाल में ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों का महाकुंभ: विरासत, संग्रहालय और रचनात्मक अर्थव्यवस्था पर हुआ मंथन; सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ मेहमानों ने किया लंच

भोपाल | 8 अगस्त, 2026

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित चार दिवसीय प्रतिष्ठित ब्रिक्स (BRICS) संस्कृति सम्मेलन का आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। भारत की अध्यक्षता में कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्रियों एवं वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संग्रहालयों के विकास और रचनात्मक अर्थव्यवस्था (Creative Economy) जैसे अहम मुद्दों पर गहन मंथन किया गया, जिसके बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी विदेशी मेहमानों के साथ विशेष दोपहर भोज (लंच) किया।

1. बैठक के मुख्य एजेंडे: विरासत, एआई और रचनात्मक अर्थव्यवस्था

भारत की मेजबानी में चल रहे इस सम्मेलन के दौरान वैश्विक सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए कई प्रमुख प्राथमिकता वाले विषयों पर व्यापक सहमति बनाई गई:

  • रचनात्मक अर्थव्यवस्था और एआई (Artificial Intelligence): आधुनिक तकनीकी दौर में डिजिटल कला, सांस्कृतिक उद्योगों और कॉपीराइट से जुड़े नियमों पर विचार किया गया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा की जाए।
  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: प्राचीन धरोहरों के संरक्षण, संग्रहालयों के आधुनिकीकरण और ऐतिहासिक वस्तुओं की स्वदेश वापसी (Return of Cultural Property) को लेकर सदस्य देशों ने अपने विचार साझा किए।
  • घोषणा पत्र को अंतिम रूप: बैठक के अंतिम दिन ‘ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा’ (BRICS Culture Ministers’ Declaration) को अपनाया गया, जो भविष्य में सभी देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पीपल-टू-पीपल कनेक्ट का एक मजबूत रोडमैप तैयार करेगा।

2. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ लंच और आतिथ्य सत्कार

सम्मेलन के औपचारिक सत्रों के समापन के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ब्रिक्स देशों से आए सभी संस्कृति मंत्रियों और विदेशी डेलिगेट्स के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया:

  • मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ: इस राजकीय लंच में मेहमानों को मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध और पारंपरिक व्यंजनों जैसे दाल बाफले, मिलेट्स (श्रीअन्न) पर आधारित कोदो-कुटकी के पकवान और स्थानीय संस्कृति से जुड़े व्यंजनों का स्वाद चखाया गया।
  • विदेशी मेहमानों ने भारतीय आतिथ्य सत्कार और भोपाल की मेहमाननवाज़ी की खासी सराहना की।

3. सांस्कृतिक प्रदर्शन और धरोहरों का भ्रमण

इस चार दिवसीय आयोजन के दौरान केवल बैठकों ही नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध कला और विविधता का भी भव्य प्रदर्शन किया गया:

  • प्रदर्शनी और महोत्सव: सम्मेलन स्थल पर ‘ज्ञान भारतम्’, ‘प्रोजेक्ट मौसम’ और ‘बृहत्तर भारत’ जैसी विशेष प्रदर्शनियां आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनमें भारत की प्राचीन पांडुलिपियों और समुद्री व्यापारिक इतिहास को दर्शाया गया।
  • सांची और भीमबेटका का भ्रमण: बैठक और आधिकारिक कार्यक्रमों के बाद ब्रिक्स देशों के यह प्रतिनिधिमंडल मध्य प्रदेश की विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहरों— सांची स्तूप और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भीमबेटका शैलाश्रय के भ्रमण के लिए भी पहुंचे, जहां उन्होंने भारत की प्राचीन बौद्ध और शैल कला (Rock Art) की बारीकियों को नजदीक से देखा।

इस आयोजन ने वैश्विक पटल पर एक बार फिर भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक एवं पर्यटन क्षमताओं को एक नई पहचान दिलाई है।

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