नई दिल्ली | 21 जुलाई 2026
इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंचने से मृतक के परिवार की चिंता और बढ़ गई है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत से जुड़े मामले पर सुनवाई होनी थी, लेकिन अदालत ने मामले की सुनवाई टालते हुए अगली तारीख 23 जुलाई निर्धारित कर दी। लगातार टलती सुनवाई से राजा रघुवंशी के परिवार ने गहरी निराशा जताई और कहा कि न्याय की प्रतीक्षा में अब “24 घंटे भी 24 साल जैसे लग रहे हैं।”
राजा रघुवंशी के परिजनों का कहना है कि पिछले कई महीनों से पूरा परिवार केवल इस उम्मीद में जी रहा है कि अदालत से जल्द न्याय मिलेगा। लेकिन हर बार नई तारीख मिलने से मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है। परिवार के सदस्यों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके लिए यह केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि बेटे और भाई को खोने का असहनीय दर्द है। उनका कहना है कि न्याय मिलने में जितनी देरी होगी, उतनी ही उनकी पीड़ा बढ़ती जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार द्वारा दायर याचिका पर विचार किया गया, जिसमें आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी के सामने दो विकल्प रखे। पहला, वह संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करें और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद दोबारा जमानत याचिका दाखिल करें। दूसरा, यदि वह ऐसा नहीं करती हैं तो अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय करेगी। हालांकि अंतिम फैसला फिलहाल सुरक्षित नहीं रखा गया और अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी गई।
राजा रघुवंशी हत्याकांड देशभर में उस समय चर्चा में आया था जब इंदौर निवासी राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून के दौरान हत्या कर दी गई थी। जांच एजेंसियों ने इस मामले में उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी सहित कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप है कि हत्या पूर्व नियोजित साजिश के तहत की गई थी। मामले की गंभीरता और इसके राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आने के कारण हर सुनवाई पर लोगों की नजर बनी हुई है।
मृतक के परिवार का कहना है कि वे केवल दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाना चाहते हैं। परिवार का मानना है कि यदि सुनवाई में लगातार देरी होती रही तो न्यायिक प्रक्रिया और लंबी हो जाएगी। उन्होंने न्यायालय पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अदालत सभी तथ्यों और सबूतों के आधार पर उचित निर्णय देगी, लेकिन वे चाहते हैं कि मामले का जल्द निस्तारण हो ताकि परिवार को वर्षों से चल रही मानसिक पीड़ा से कुछ राहत मिल सके।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में अदालतें सभी पक्षों को पूरा अवसर देती हैं, ताकि अंतिम फैसला मजबूत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप हो। इसलिए सुनवाई टलने का अर्थ यह नहीं है कि मामले की गंभीरता कम हो गई है, बल्कि अदालत सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही आगे बढ़ना चाहती है।
अब इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 23 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है। राजा रघुवंशी का परिवार और मामले से जुड़े सभी पक्ष उस दिन अदालत के अगले निर्णय का इंतजार करेंगे। वहीं इस बहुचर्चित हत्याकांड पर देशभर की नजर बनी हुई है और माना जा रहा है कि आगे की सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
