स्थान: वाशिंगटन / तेहरान
दिनांक: 9 जुलाई, 2026
अंतरराष्ट्रीय डेस्क:
पश्चिम एशिया (Middle East) में चौबीस घंटे के भीतर युद्ध की आग और अधिक भड़क उठी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के लड़ाकू विमानों, बी-52 बमवर्षकों (B-52 Bombers) और नौसैनिक युद्धपोतों ने बुधवार देर रात ईरान पर अब तक का सबसे विनाशकारी और दूसरा बड़ा हमला (Second Wave of Airstrikes) किया। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के मुताबिक, इस ताजा कार्रवाई में ईरान के 90 से अधिक रणनीतिक और सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया है। ईरानी अधिकारियों ने इस हवाई हमले में आईआरजीसी (IRGC) के दो शीर्ष कमांडरों सहित 3 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की है।
इस भीषण हमले के तुरंत बाद वाशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद सनसनीखेज दावा किया। ट्रंप ने दुनिया के सामने कहा, “मुझे खुफिया इनपुट्स मिले हैं कि मैं ईरान की हिटलिस्ट (Hit-list) में सबसे ऊपर हूं, वे मेरी जान लेना चाहते हैं। लेकिन वे जान लें कि अमेरिका के आगे उनकी एक नहीं चलेगी।”
90 ठिकानों पर ‘कारपेट बॉम्बिंग’; तबाह हुए ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल बंकर
पेंटागन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, मंगलवार को किए गए 80 ठिकानों पर हमले के बाद भी ईरान की ओर से बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी अड्डों पर मिसाइलें दागी गई थीं। इसी के ‘दूसरे चरण’ (Phase-2) के रूप में यह ताजा हमला किया गया, जो पहले से कहीं अधिक घातक था।
- निशाने पर आए 90 से अधिक ठिकाने: इस बार अमेरिकी स्टील्थ फाइटर्स ने ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों के करीब स्थित एयर डिफेंस रडार, तटीय मिसाइल बैटरियों और शाहरूद व इस्फ़हान में स्थित अंडरग्राउंड बैलिस्टिक मिसाइल बंकर्स को निशाना बनाया।
- 3 की मौत, कई घायल: ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि राजधानी तेहरान के बाहरी इलाके और बंदर अब्बास बंदरगाह के समीप हुए धमाकों में 3 सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई है और कई नागरिक घायल हुए हैं। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) में आपातकालीन सत्र बुलाने की मांग की है।
“वे मेरी जान के प्यासे हैं, क्योंकि मैं झुकता नहीं”— राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
वाशिंगटन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने आक्रामक तेवर में नजर आए। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व को खुली चुनौती दी।
ट्रंप का तीखा बयान:
“ईरान के पाखंडी शासक अच्छी तरह जानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप को न तो डराया जा सकता है और न ही खरीदा जा सकता है। खुफिया एजेंसियों ने मुझे साफ बताया है कि मैं उनके देश की हिटलिस्ट में नंबर एक पर हूं, वे मुझे मारना चाहते हैं क्योंकि मैंने उनकी कमर तोड़ दी है। लेकिन मैं तेहरान को चेतावनी देता हूं— अगर मेरे बाल को भी खरोंच आई, तो ईरान को दुनिया के नक्शे से मिटा दिया जाएगा। चूंकि हम बहुत भले लोग हैं, इसलिए हमने उन्हें अपने नेता के जनाजे के लिए समय दिया था, लेकिन उन्होंने हमारे सहयोगियों (बहरीन-कुवैत) पर हमला करने का दुस्साहस किया। अब अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें।”
48 घंटे के भीतर खाड़ी युद्ध का बदला रूप और सैन्य संतुलन
| देश और ब्लॉक | की गई बड़ी सैन्य कार्रवाई (पिछले 48 घंटे) | वर्तमान कूटनीतिक और युद्ध स्थिति |
| संयुक्त राज्य अमेरिका 🇺🇸 | दो चरणों में ईरान के 170 से अधिक (80 + 90) ठिकानों को हवाई हमलों में ध्वस्त किया। | स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौसैनिक ब्लॉकेड (नाकाबंदी) लागू; खाड़ी में पैट्रियट मिसाइलें एक्टिव। |
| ईरान 🇮🇷 | कुवैत (US Airbase) और बहरीन (US 5th Fleet) पर 85 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं; 3 सैन्य अधिकारियों की मौत। | देश में ‘रेड अलर्ट’ घोषित; खामेनेई के अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों को आंशिक रूप से रोककर सेना को युद्ध मोड में डाला। |
| ग्लोबल मार्केट 🌐 | अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान का कच्चा तेल बाजार से पूरी तरह बाहर हुआ। | कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड $92 प्रति बैरल के पार पहुंचीं; वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट। |
युद्ध के मुहाने पर दुनिया; खाड़ी देशों में विमानों की उड़ानें पूरी तरह ठप
ईरान पर हुए इस दूसरे और भीषण हमले के बाद कतर, ओमान, कुवैत और यूएई (दुबई) ने अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) को नागरिक विमानों के लिए अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। एयर इंडिया सहित दुनिया भर की विमानन कंपनियों ने यूरोप और खाड़ी देशों की ओर जाने वाली अपनी सभी उड़ानों के रूट को डायवर्ट (बदल) कर दिया है।
ब्रिटेन और फ्रांस ने अमेरिका की इस दंडात्मक कार्रवाई का समर्थन किया है, जबकि रूस और चीन ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा है कि अमेरिका पूरे मध्य पूर्व को तबाह करने पर तुला है। तेहरान की सड़कों पर लाखों लोग अब भी जमे हुए हैं, जो अमेरिकी हमलों के बाद ‘डेथ टू अमेरिका’ और ‘बदला’ के गगनभेदी नारे लगा रहे हैं। क्षेत्र में तनाव इस कदर बढ़ गया है कि किसी भी वक्त एक पूर्ण अंतरराष्ट्रीय युद्ध छिड़ सकता है।
