दिनांक: 8 जून, 2026
जूनागढ़: गुजरात के गिर अभ्यारण्य से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। गिर के जंगल में हाल ही में 8 शेर के शावकों की हुई मौत के मामले में वन विभाग द्वारा की गई जांच ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में मौत का कारण किसी बीमारी या संक्रमण को बताया जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच में यह पुष्टि हुई है कि इन शावकों की जान ‘भीषण गर्मी’ (हीटवेव) के कारण गई है।
क्या कहता है जांच का खुलासा?
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से गिर के जंगलों में तापमान 42-43 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है। लू के थपेड़ों और अत्यधिक गर्मी के कारण शावकों के शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो गई, जिससे वे भीषण गर्मी को सहन नहीं कर सके।
- बीमारी की संभावना खारिज: अधिकारियों ने साफ किया है कि किसी भी प्रकार की महामारी या संक्रामक बीमारी के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं। मौत का प्राथमिक कारण ‘हीटस्ट्रोक’ ही है।
- कमजोर प्रतिरोधक क्षमता: शावकों की उम्र कम होने के कारण, उनकी सहनशक्ति वयस्क शेरों की तुलना में कम होती है, जिस कारण वे लू के थपेड़ों का शिकार जल्दी हो गए।
वन विभाग की सतर्कता बढ़ी
इस घटना के बाद गिर प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। वन विभाग के कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जंगल के उन इलाकों पर विशेष निगरानी रखें जहाँ शावक और उनके झुंड मौजूद हैं।
प्रशासन द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम:
- पानी के स्रोतों की निगरानी: जंगल में स्थित कृत्रिम और प्राकृतिक जल स्रोतों में नियमित रूप से ताज़ा पानी भरा जा रहा है ताकि वन्यजीवों को प्यास न सताए।
- मेडिकल टीम तैनात: जंगल के अलग-अलग जोन में पशु चिकित्सकों की टीम तैनात की गई है, जो शेरों के झुंड के स्वास्थ्य पर नजर रख रही है।
- छायादार आश्रयों का निर्माण: गर्मी से बचाने के लिए वन विभाग उन क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था कर रहा है जहाँ शेरों का मूवमेंट ज्यादा होता है।
पर्यावरणविदों की चिंता
पर्यावरणविदों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण गिर जैसे शुष्क जंगलों में तापमान का बढ़ना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। गिर के शेरों की सुरक्षा के लिए अब ‘हीट मैनेजमेंट प्लान’ पर अधिक गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।
फिलहाल, वन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्र में 24 घंटे गश्त कर रही हैं ताकि गर्मी के इस प्रकोप से अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जा सके।
