वन विभाग की कार्रवाई पर गरमाई सियासत: 60 साल पुरानी बस्ती ढहाने पर मंत्री ने साधी चुप्पी, बोले- ‘पता नहीं किसने दिया आदेश’

दिनांक: 6 जून, 2026

[शहर का नाम]: वन विभाग द्वारा हाल ही में की गई एक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। प्रशासन ने एक 60 साल पुरानी बस्ती को अवैध अतिक्रमण बताकर पूरी तरह जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के बाद से वहां के विस्थापित निवासियों में भारी आक्रोश है। हैरत की बात यह है कि क्षेत्र के प्रभारी मंत्री ने भी इस कार्रवाई से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि यह आदेश किसके द्वारा दिया गया था।

क्या है पूरा मामला?

प्रभावित निवासियों का आरोप है कि वे पिछले 60 वर्षों से इस भूमि पर रह रहे थे। उनका दावा है कि उन्होंने स्थानीय विकास में अपना योगदान दिया है और वे पूरी तरह से वैध निवासी हैं। हालांकि, वन विभाग का कहना है कि यह जमीन ‘फॉरेस्ट लैंड’ (वन भूमि) के दायरे में आती है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों के अनुपालन में यह कार्रवाई आवश्यक थी।

मंत्री का बयान बना चर्चा का विषय

इस पूरे घटनाक्रम पर जब संबंधित मंत्री से सवाल पूछा गया, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था। मंत्री ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा, “मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि यह विध्वंस का आदेश किसने दिया था और किस आधार पर इतनी पुरानी बस्ती को खाली कराया गया।” मंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे ‘प्रशासनिक अराजकता’ करार दिया है।

स्थानीय निवासियों का दर्द

बस्ती के निवासियों ने रोते हुए बताया कि उनके पास घर से बेघर होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। कई बुजुर्गों ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन इसी बस्ती में बिताया है। विस्थापितों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या पुनर्वास की व्यवस्था किए अचानक बेघर कर दिया गया।

क्या कहता है कानून?

सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार यह निर्देश दिए हैं कि वन भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाया जाए और उसकी रिपोर्ट पेश की जाए। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन ने कार्रवाई से पहले निवासियों की पात्रता और मानवीय पहलुओं की जांच की थी?

फिलहाल, विस्थापित लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में किसी भी प्रकार की राहत या पुनर्वास नीति का ऐलान नहीं किया गया है।

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