नई दिल्ली | 12 अक्टूबर 2026
शारदीय नवरात्रि का आज दूसरा दिन है। सोमवार, 12 अक्टूबर को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग, संयम, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। नवरात्रि के इस दिन भक्त मां की आराधना कर जीवन में शांति, आत्मबल और सकारात्मकता की कामना करते हैं।
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना के बाद दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती हैं।
कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी?
मां ब्रह्मचारिणी को देवी पार्वती का तपस्विनी स्वरूप माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी साधना और अटूट संकल्प के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत और सौम्य माना जाता है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। यह स्वरूप साधना, संयम और आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक है। भक्त इस दिन मां की पूजा कर मन की एकाग्रता, धैर्य और आत्मविश्वास की कामना करते हैं।
आज का शुभ रंग कौन-सा है?
नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपरा में सफेद रंग शांति, पवित्रता, सरलता और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन भक्त सफेद वस्त्र पहनकर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कर सकते हैं। पूजा में सफेद फूल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।
हालांकि, शुभ रंग धार्मिक परंपरा और मान्यता का हिस्सा है। पूजा में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा, स्वच्छता और मन की एकाग्रता को दिया जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी को क्या चढ़ाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, शक्कर और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। खीर भी अर्पित की जा सकती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार फल और सात्विक प्रसाद भी चढ़ा सकते हैं।
पूजा के दौरान मां को फूल, अक्षत, चंदन और धूप-दीप अर्पित किए जाते हैं। भोग लगाने के बाद मां की आरती की जाती है और परिवार की सुख-शांति तथा कल्याण के लिए प्रार्थना की जाती है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का शुभ समय
पंचांग के अनुसार, सोमवार 12 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि रात लगभग 10:13 से 10:14 बजे तक रहेगी। सूर्योदय के समय द्वितीया तिथि होने के कारण आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जा रही है। दिल्ली के लिए प्रकाशित पंचांग में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक बताया गया है।
ध्यान रखें कि शुभ मुहूर्त और पंचांग के समय शहर के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकते हैं। नियमित देवी पूजा के लिए सुबह या अपनी सुविधा के अनुसार स्वच्छ और शांत समय चुना जा सकता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
कैसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा?
नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा के लिए सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं। मां ब्रह्मचारिणी की तस्वीर या प्रतिमा के समक्ष फूल, अक्षत, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें।
इसके बाद मिश्री, शक्कर या खीर का भोग लगाएं। मां के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें और पूजा के अंत में आरती करें। जो भक्त नवरात्रि का व्रत रख रहे हैं, वे अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत के नियमों का पालन कर सकते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र:
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
मान्यता के अनुसार, मंत्र जाप से मन को एकाग्र करने और साधना के प्रति समर्पण बढ़ाने में सहायता मिलती है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का धार्मिक महत्व
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना भक्तों को धैर्य और आत्मसंयम का संदेश देती है। उनका तपस्विनी स्वरूप यह प्रेरणा देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति बनाए रखनी चाहिए।
नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और व्रत करने वाले श्रद्धालु इस दिन विशेष रूप से मां की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से भक्तों को मानसिक शांति और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
