17 अप्रैल 2026
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Israel और Lebanon के बीच 10 दिन का अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) लागू हो गया है। यह समझौता अमेरिका की मध्यस्थता से कई दौर की बातचीत के बाद संभव हुआ, जिससे पिछले सात हफ्तों से जारी भीषण संघर्ष में फिलहाल राहत मिली है।
इस संघर्ष में अब तक लेबनान में करीब 2,200 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 172 बच्चे भी शामिल हैं। युद्धविराम लागू होने के बाद लेबनान के कई हिस्सों में लोगों ने राहत की सांस ली और जश्न मनाया, हालांकि जमीनी हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
💥 युद्धविराम से पहले भी जारी रहे हमले
युद्धविराम लागू होने से ठीक पहले तक इज़राइल की ओर से हवाई हमले जारी रहे। दक्षिणी लेबनान के Tyre शहर पर हुए हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा एक स्कूल को निशाना बनाया गया और लितानी नदी (Litani River) पर बने अंतिम पुल को भी नष्ट कर दिया गया, जिससे दक्षिणी लेबनान का बाकी देश से संपर्क और कमजोर हो गया।
वर्तमान स्थिति में इज़राइली सेना लेबनान के लगभग 10% क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए हुए है और करीब 12 लाख लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं।
🏚️ विस्थापितों की पीड़ा और असंतोष
युद्ध के कारण हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। बेरूत में टेंट में रह रहे 30 वर्षीय Ibrahim Suwaydi ने युद्धविराम पर नाराजगी जताते हुए कहा कि केवल 10 दिनों का संघर्ष विराम पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा,
“अगर 10 दिन बाद फिर से युद्ध शुरू हो जाता है, तो हम ऐसे युद्धविराम को स्वीकार नहीं करते। या तो हमारी जमीन पूरी तरह लौटे या फिर युद्ध जारी रहेगा। मेरा घर पूरी तरह नष्ट हो चुका है, उसकी भरपाई कौन करेगा?”
🌍 अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
Donald Trump ने दावा किया है कि Iran के साथ चल रहा संघर्ष भी जल्द खत्म हो सकता है और समझौता “बहुत करीब” है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगली वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो सकती है।
अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईरान के खिलाफ उसका नौसैनिक नाकाबंदी (naval blockade) अभी जारी रहेगा, जब तक कोई स्थायी शांति समझौता नहीं हो जाता।
वहीं, Russia ने इस युद्धविराम का समर्थन किया है और उम्मीद जताई है कि यह आगे चलकर स्थायी शांति समझौते का रास्ता खोल सकता है।
⚓ ईरान और वैश्विक व्यापार पर असर
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि Strait of Hormuz पूरी तरह खुला रहेगा, बशर्ते युद्धविराम कायम रहे।
इस बीच, अमेरिकी नाकाबंदी के बावजूद ईरान के तीन तेल टैंकर, जिनमें कुल 50 लाख बैरल कच्चा तेल था, खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकलने में सफल रहे हैं। यह संकेत देता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इस संघर्ष का असर अभी भी बना हुआ है।
🕊️ कूटनीतिक प्रयास तेज
Emmanuel Macron और Keir Starmer ने पेरिस में बहुराष्ट्रीय बल (multinational force) बनाने को लेकर बैठक की, जिसका उद्देश्य युद्ध के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों के बीच लगातार कूटनीतिक बातचीत जारी है, ताकि इस अस्थायी युद्धविराम को स्थायी शांति में बदला जा सके।
🇮🇱 इज़राइल का रुख और आंतरिक प्रतिक्रिया
इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस युद्धविराम को “ऐतिहासिक शांति समझौते” का अवसर बताया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि Hezbollah का निरस्त्रीकरण (disarmament) जरूरी शर्त है।
हालांकि, इज़राइल के विपक्षी नेता Yair Lapid ने इस समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि यह उत्तरी इज़राइल के लोगों के लिए खतरे को खत्म नहीं करता और भविष्य में कड़ा रुख अपनाने की बात कही।
🇱🇧 लेबनान की प्रतिक्रिया और चिंता
लेबनान के प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने इस युद्धविराम का स्वागत किया है और इसे शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
हालांकि, जमीनी स्तर पर लोग अभी भी असमंजस और डर में हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, लेबनान चाहता है कि इज़राइल पूरी तरह अपनी सेना वापस बुलाए, जबकि इज़राइल हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण पर जोर दे रहा है—यही इस संघर्ष का सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।
⚠️ स्थिति अभी भी नाजुक
विश्लेषकों का मानना है कि यह युद्धविराम बेहद नाजुक है और किसी भी समय टूट सकता है। कई पक्षों के अलग-अलग हित और मांगें इस समझौते को कमजोर बना रही हैं।
मध्य पूर्व पहले से ही अस्थिर क्षेत्र रहा है, और मौजूदा हालात में थोड़ी सी चूक भी बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है।
🔎 निष्कर्ष
इज़राइल और लेबनान के बीच 10 दिन का यह युद्धविराम फिलहाल राहत जरूर लेकर आया है, लेकिन स्थायी शांति अभी दूर नजर आ रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब आने वाले दिनों की वार्ताओं पर टिकी हैं।
यदि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं, तो यह संघर्ष खत्म होने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है—वरना क्षेत्र में फिर से हिंसा भड़कने का खतरा बना रहेगा।
