19 मार्च 2026
उत्तर कोरिया में हुए संसदीय चुनाव में एक बार फिर किम जोंग उन को लगभग पूर्ण समर्थन मिला है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उनकी पार्टी को 99.93% वोट मिले, जबकि बाकी 0.07% वोट किसी विपक्षी को नहीं बल्कि उम्मीदवार के खिलाफ पड़े।
सभी सीटों पर सत्तारूढ़ दल की जीत
यह चुनाव 15 मार्च को 15वीं सुप्रीम पीपल्स असेंबली के सदस्यों के चयन के लिए आयोजित किया गया था।
सरकारी मीडिया के अनुसार, सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया और उसके सहयोगी दलों ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की।
रिकॉर्ड वोटिंग प्रतिशत
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- कुल मतदान प्रतिशत: 99.99%
- समर्थन में वोट: 99.93% से 99.97%
- बहुत कम संख्या में लोग वोट नहीं डाल सके, जो विदेश या समुद्र में काम कर रहे थे
0.07% वोट किसे मिले?
चुनाव में कोई विपक्षी उम्मीदवार नहीं था। हर सीट पर केवल एक ही उम्मीदवार खड़ा किया गया था, जिसे पहले से मंजूरी दी गई थी।
ऐसे में जो 0.07% वोट हैं, वे किसी दूसरे नेता को नहीं बल्कि उन लोगों के हैं जिन्होंने आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ “ना” में वोट दिया।
दशकों बाद ‘ना’ वोट का खुलासा
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पहली बार है जब उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने खुले तौर पर “ना” में पड़े वोटों का जिक्र किया है।
बताया जा रहा है कि इससे पहले ऐसा खुलासा 1957 के बाद नहीं हुआ था।
चुनाव प्रक्रिया कैसी होती है
उत्तर कोरिया में चुनाव प्रक्रिया काफी अलग होती है।
- हर क्षेत्र में सिर्फ एक उम्मीदवार होता है
- वह पहले से सरकार द्वारा चुना जाता है
- मतदाताओं को सिर्फ उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का विकल्प मिलता है
इस चुनाव में कुल 687 प्रतिनिधियों का चयन किया गया, जिनमें किसान, मजदूर, सैन्य अधिकारी और अन्य वर्ग शामिल हैं।
किम जोंग उन की सत्ता
किम जोंग उन 2011 में अपने पिता किम जोंग इल के निधन के बाद सत्ता में आए थे।
2019 में संविधान में बदलाव कर उनकी शक्तियों को और मजबूत किया गया, जिससे सरकार, सेना और अन्य संस्थाओं पर उनका नियंत्रण और बढ़ गया।
निष्कर्ष: उत्तर कोरिया के चुनाव परिणाम एक बार फिर देश की राजनीतिक व्यवस्था को दर्शाते हैं, जहां सत्तारूढ़ नेतृत्व को लगभग पूर्ण समर्थन मिलता है। हालांकि इस बार 0.07% ‘ना’ वोट का खुलासा चर्चा का विषय बन गया है।

