सिंधु जल संधि पर फिर गरमाया विवाद: पाकिस्तान ने भारत को दी ‘जंग’ की धमकी; रक्षामंत्री बोले- “पानी पर खतरा लगा, तो शुरू कर देंगे युद्ध”

दिनांक: 22 जून, 2026

भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक ‘सिंधु जल संधि’ (Indus Waters Treaty – IWT) को लेकर जारी दशकों पुराना विवाद एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। पाकिस्तान सरकार ने भारत को सीधे तौर पर ‘जंग’ की धमकी दी है। पाकिस्तान के रक्षामंत्री ने एक कड़े और उत्तेजक बयान में कहा है कि जिस क्षण पाकिस्तान को अपनी नदियों के पानी पर खतरा महसूस होगा, वे भारत के खिलाफ पूर्ण पैमाने पर युद्ध (War) शुरू कर देंगे।

यह तीखी प्रतिक्रिया भारत सरकार द्वारा संधि के प्रावधानों की समीक्षा करने और सिंधु नदी प्रणाली के पानी का अधिकतम इस्तेमाल करने के लिए जम्मू-कश्मीर में नए जलविद्युत प्रोजेक्ट्स (Hydroelectric Projects) में तेजी लाने के संकेतों के बाद आई है।

“पानी हमारा जीवन है, समझौता नामुमकिन” — पाकिस्तानी रक्षामंत्री

इस्लामाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी रक्षामंत्री ने भारत पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों का पानी पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है।

रक्षामंत्री का बयान: “हम भारत को स्पष्ट चेतावनी देना चाहते हैं कि सिंधु जल संधि कोई कमजोर दस्तावेज नहीं है जिसे वे जब चाहें तोड़ सकें। पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी की एक-एक बूंद की रक्षा करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। अगर भारत ने कोई भी ऐसा कदम उठाया जिससे हमारी नदियों का प्रवाह बाधित होता है या पाकिस्तान में पानी का संकट पैदा होता है, तो हम इसे सीधा हमला मानेंगे। उस पल, हमारे पास जंग शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

क्या है सिंधु जल संधि (IWT) और विवाद की जड़?

1960 में विश्व बैंक (World Bank) की मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच यह संधि हुई थी।

  1. पानी का बंटवारा: संधि के तहत, पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) का पानी भारत को, जबकि पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का 80% से अधिक पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था।
  2. भारत का अधिकार: भारत को पश्चिमी नदियों पर केवल ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (बिना पानी रोके) प्रोजेक्ट्स और सिंचाई के लिए सीमित इस्तेमाल का अधिकार है।
  3. ताजा विवाद: भारत वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा (Kishanganga) और रतले (Ratle) जैसी बड़ी पनबिजली परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है। पाकिस्तान लगातार इन प्रोजेक्ट्स के डिजाइन पर आपत्ति जताता रहा है, जबकि भारत का कहना है कि ये पूरी तरह संधि के दायरे में हैं।

भारत का कड़ा रुख और वर्ल्ड बैंक की भूमिका

पाकिस्तान की इस धमकी पर भारत के विदेश मंत्रालय ने फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत अपने संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल जारी रखेगा।

बीते कुछ सालों में भारत ने सिंधु जल संधि के क्रियान्वयन पर कड़ा रुख अपनाया है। भारत सरकार ने वर्ल्ड बैंक को भी पत्र लिखकर पाकिस्तान की “अनावश्य रुकावट डालने वाली रणनीति” की शिकायत की थी और संधि में संशोधन की मांग की थी। भारत का तर्क है कि पाकिस्तान की हरकतें संधि के उद्देश्य को विफल कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह धमकी उसकी आंतरिक राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, दो परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच ‘जल’ को लेकर इस तरह की बयानबाजी दक्षिण एशिया में तनाव को चरम पर पहुंचा सकती है, जिससे विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ गई हैं।

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