केंद्र सरकार की बड़ी सफाई: ‘भारतीय पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं’; 10 साल में 7 गुना बढ़े सेवा केंद्र, देश में 1.47 करोड़ से अधिक ई-पासपोर्ट जारी

स्थान: नई दिल्ली

दिनांक: 25 जून, 2026

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली:

विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट को लेकर देश में जारी एक बड़े सार्वजनिक भ्रम को दूर करते हुए बेहद महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने ’14वें पासपोर्ट सेवा दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक विशेष ब्रीफिंग में दोटूक कहा है कि भारतीय पासपोर्ट मूल रूप से केवल एक ‘यात्रा दस्तावेज’ (Travel Document) है, इसे नागरिकता साबित करने का अंतिम या निर्णायक दस्तावेज (Citizenship Document) नहीं माना जा सकता।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यद्यपि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही कड़ी जांच (Due Diligence) के बाद जारी किया जाता है और यह विदेशों में आपकी राष्ट्रीयता की पुष्टि करता है, लेकिन घरेलू स्तर पर मतदाता सूची से नाम हटने जैसी स्थितियों या अन्य नागरिक अधिकारों को चुनौती देने के लिए इसे नागरिकता के एकमात्र साक्ष्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला; क्या हैं नागरिकता के नियम?

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब निर्वाचन आयोग (EC) द्वारा मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के दौरान नागरिकता को लेकर लंबी बहस छिड़ी हुई है।

  • आधार और वोटर आईडी भी प्रमाण नहीं: सरकार और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट भी यह साफ कर चुके हैं कि आधार कार्ड सिर्फ एक पहचान (Identity) और निवास का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं।
  • भ्रम की स्थिति: विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी यह बहस तेज हो गई है कि यदि पासपोर्ट, आधार और वोटर आईडी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो भारत में नागरिकता का ठोस कानूनी दस्तावेज क्या है? कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में नागरिकता मुख्य रूप से जन्म स्थान, जन्म तिथि और माता-पिता की नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों (जैसे जन्म प्रमाण पत्र) के आधार पर तय होती है।

डिजिटल क्रांति: 10 वर्षों में 77 से बढ़कर 545 हुए पासपोर्ट केंद्र

इस कानूनी स्पष्टीकरण के साथ-साथ विदेश मंत्रालय ने पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवाओं में हुए अभूतपूर्व और ऐतिहासिक विस्तार के आंकड़े भी पेश किए:

मुख्य संकेतक10 वर्ष पहले (2016)वर्तमान स्थिति (2026)
कुल पासपोर्ट सेवा केंद्रकेवल 77 केंद्र545 केंद्र (7 गुना से अधिक विस्तार)
औसत प्रोसेसिंग समयकई सप्ताहमात्र 6 कार्य दिवस (पुलिस वेरिफिकेशन छोड़कर)
केंद्र में बिताया जाने वाला समयघंटों का इंतजार45 मिनट से भी कम
सालाना डिलीवर सेवाएं80-90 लाख1.5 करोड़ (वर्ष 2025 में रिकॉर्ड सेवा डिलीवरी)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के विज़न के तहत पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम (PSP V2.0) को पूरी तरह से आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बना दिया गया है, जिससे अब देश के लगभग हर लोकसभा क्षेत्र में पासपोर्ट केंद्र की सुविधा उपलब्ध है।

1.47 करोड़ से अधिक चिप-आधारित ‘ई-पासपोर्ट’ जारी

मंत्रालय ने बताया कि सुरक्षा को अभेद्य बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए आधुनिक चिप-आधारित ‘ई-पासपोर्ट’ (e-Passports) का रोलआउट तेजी से चल रहा है।

  • 10% आबादी के पास ई-पासपोर्ट: वर्तमान में देश के कुल पासपोर्ट धारकों में से लगभग 10% (यानी 1.47 करोड़ से अधिक नागरिकों) को एडवांस बायोमेट्रिक सुरक्षा चिप वाले ई-पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। ये पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों के अनुरूप हैं, जिससे डेटा चोरी और धोखाधड़ी का खतरा शून्य हो जाता है।

ग्लोबल मोबिलिटी: 27 देशों में भारतीयों को वीजा-मुक्त एंट्री

भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती वैश्विक साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वैश्विक गतिशीलता (Mobility Agreements) के तहत भारतीयों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अब पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है:

  1. वीजा-मुक्त प्रवेश (Visa-Free): साल 2019 में जहां केवल 16 देश भारतीयों को वीजा-मुक्त प्रवेश देते थे, आज यह संख्या बढ़कर 27 देश हो चुकी है।
  2. वीजा ऑन अराइवल: दुनिया के 47 देश भारतीय नागरिकों को आगमन पर वीजा (Visa on Arrival) की सुविधा दे रहे हैं।
  3. ई-वीजा (e-Visa): कुल 66 देशों ने भारतीयों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वीजा की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है।

इसके साथ ही, यूरोप और खाड़ी देशों के साथ हुए नए मोबिलिटी समझौतों ने भारतीय छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए वैध और सुरक्षित प्रवासन (Migration) के रास्ते खोले हैं, जिससे अवैध एजेंटों के चंगुल से युवाओं को बचाया जा सके।

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