समुद्र के नीचे भी मंडरा रहा संकट! दक्षिण एशिया के सभी 13 कोरल रीफ इकोरीजन गंभीर खतरे में

नई दिल्ली। 5 नवंबर 2026

जलवायु परिवर्तन, समुद्र के बढ़ते तापमान और मानवीय गतिविधियों का असर अब समुद्र के भीतर मौजूद प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दक्षिण एशिया के सभी 13 कोरल रीफ इकोरीजन को ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ यानी क्रिटिकली एंडेंजर्ड श्रेणी में वर्गीकृत किए जाने की जानकारी सामने आई है। वैज्ञानिकों के इस आकलन ने समुद्री जैव विविधता और तटीय पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

यह निष्कर्ष जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के वैज्ञानिकों सहित शोधकर्ताओं के अध्ययन से जुड़ा है। कोरल रीफ समुद्र में रहने वाले असंख्य जीवों के लिए भोजन, आश्रय और प्रजनन का महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके कमजोर होने का असर केवल समुद्री जीवों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मछुआरों की आजीविका और तटीय समुदायों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

क्या होते हैं कोरल रीफ?

कोरल रीफ समुद्र में पाए जाने वाले छोटे जीवों यानी कोरल पॉलीप्स द्वारा निर्मित संरचनाएं होती हैं। इन्हें अक्सर समुद्र के वर्षावन भी कहा जाता है, क्योंकि यहां मछलियों, समुद्री कछुओं और अनेक अन्य जीवों को रहने और भोजन पाने का स्थान मिलता है।

ये रीफ समुद्री जैव विविधता बनाए रखने के साथ-साथ तटीय क्षेत्रों को लहरों और समुद्री तूफानों के प्रभाव से बचाने में भी मदद करते हैं।

आखिर क्यों खतरे में हैं समुद्री चट्टानें?

कोरल रीफ के लिए सबसे बड़ा खतरा समुद्र के तापमान में वृद्धि है। लंबे समय तक पानी गर्म रहने से कोरल ब्लीचिंग की स्थिति पैदा हो सकती है। इसमें कोरल अपने ऊतकों में रहने वाले सूक्ष्म शैवाल को बाहर निकाल देते हैं, जिससे उनका रंग सफेद पड़ जाता है और उन्हें ऊर्जा मिलना कम हो जाता है।

इसके अलावा समुद्र का अम्लीकरण, प्रदूषण, प्लास्टिक कचरा, अनियंत्रित पर्यटन और विनाशकारी मछली पकड़ने की गतिविधियां भी इन पारिस्थितिकी तंत्रों को नुकसान पहुंचाती हैं।

इसका असर इंसानों पर भी पड़ेगा

कोरल रीफ का संकट केवल समुद्री जीवों की समस्या नहीं है। दुनिया के कई तटीय समुदाय मछली पकड़ने, पर्यटन और समुद्री संसाधनों पर निर्भर हैं। रीफ के नष्ट होने से मछलियों के आवास प्रभावित हो सकते हैं, जिससे मछुआरों की आय पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा कोरल रीफ तटों को समुद्री लहरों की ऊर्जा से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके कमजोर होने से कुछ तटीय क्षेत्रों में कटाव और बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है।

संरक्षण के लिए अब क्या करना होगा?

विशेषज्ञों के अनुसार कोरल रीफ की रक्षा के लिए समुद्री प्रदूषण को कम करना, तटीय क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण और पर्यटन पर नियंत्रण रखना तथा समुद्र के तापमान में वृद्धि रोकने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाना जरूरी है।

इसके साथ समुद्री संरक्षित क्षेत्रों का प्रभावी प्रबंधन, वैज्ञानिक निगरानी और स्थानीय मछुआरा समुदायों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।

समुद्र की सेहत बचाना जरूरी

दक्षिण एशिया के सभी 13 कोरल रीफ इकोरीजन का गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में आना समुद्री पर्यावरण के लिए एक बड़ी चेतावनी है। समुद्र केवल जल का विशाल भंडार नहीं, बल्कि पृथ्वी के जीवन और जलवायु संतुलन का महत्वपूर्ण आधार है। यदि कोरल रीफ जैसे प्राकृतिक तंत्र कमजोर होते हैं, तो उसका असर समुद्री जैव विविधता से लेकर मानव जीवन तक पहुंच सकता है।

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