जयपुर, 29 अक्टूबर 2026। राजस्थान में वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल के परिवार की ओर से 40 विला और कॉटेज खरीदने तथा उन्हें उसी कंपनी को लीज पर देने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विवाद के बीच राज्य सरकार ने 1993 बैच के IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से APO (Awaiting Posting Orders) कर दिया है। यह आदेश 28 अक्टूबर की देर रात कार्मिक विभाग की ओर से जारी किया गया। हालांकि, आधिकारिक आदेश में उन्हें APO करने का कारण प्रशासनिक बताया गया है और संपत्ति विवाद का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया है।
क्या है 40 विला-कॉटेज की खरीद का पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर, उनके दोनों बेटों और ससुराल पक्ष ने करीब ढाई साल के भीतर एक ही कंपनी, गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड, से 40 विला-कॉटेज खरीदे।
इन संपत्तियों में राजस्थान के दो अलग-अलग स्थानों की इकाइयां शामिल हैं। अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 विला खरीदे गए, जबकि उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 कॉटेज की खरीद की गई।
रिपोर्ट में इन सभी संपत्तियों का कुल खरीद मूल्य ₹6 करोड़ 16.5 लाख बताया गया है। खास बात यह है कि संपत्तियां खरीदने के बाद इन्हें बेचने वाली उसी कंपनी को लीज पर देने के दस्तावेज भी पंजीकृत कराए गए।
हर साल ₹1.80 करोड़ की लीज आय का दावा
इस संपत्ति सौदे का सबसे चर्चित पहलू इससे होने वाली कथित सालाना लीज आय है। रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी को सभी 40 विला-कॉटेज लीज पर दिए गए हैं।
लीज की बताई गई दरें इस प्रकार हैं:
- उदयपुर के बुझड़ा में 20 कॉटेज: प्रत्येक कॉटेज के लिए ₹4 लाख सालाना, यानी कुल ₹80 लाख।
- अलवर के अजबगढ़ में 20 विला: प्रत्येक विला के लिए ₹5 लाख सालाना, यानी कुल ₹1 करोड़।
इस हिसाब से इन संपत्तियों से मिलने वाली कुल सालाना लीज राशि ₹1.80 करोड़ बताई गई है।
खरीद और लीज के दस्तावेजों को लेकर सवाल इसलिए भी उठे हैं, क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार दोनों स्थानों पर संपत्तियों की रजिस्ट्री और लीज से जुड़े दस्तावेज एक ही दिन पंजीकृत हुए थे। बुझड़ा की संपत्तियों के दस्तावेज 29 सितंबर 2023 को और अजबगढ़ के विला के दस्तावेज 27 मार्च 2026 को पंजीकृत होने की जानकारी दी गई है।
अचल संपत्ति रिटर्न में विवरण को लेकर सवाल
इस मामले में संपत्ति की खरीद और उससे होने वाली आय के अलावा अधिकारियों के अचल संपत्ति विवरण (Immovable Property Return यानी IPR) को लेकर भी सवाल उठे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के नाम दोनों रिसॉर्ट में कुल 28 विला-कॉटेज होने की बात कही गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि शिखर अग्रवाल के IPR में 14 संपत्तियों का उल्लेख था, जबकि प्रशाखा माथुर के 8 जनवरी 2026 को दाखिल IPR में संपत्ति का विवरण शून्य दर्ज था।
इन दावों पर शिखर अग्रवाल ने संपत्तियों की खरीद की पुष्टि की और कहा कि संबंधित संपत्तियों का विवरण IPR और रिटर्न में दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि पत्नी की संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज गलत स्थान पर संलग्न होने के कारण विवरण अलग तरह से दिखाई दे रहा है। उन्होंने दोनों बेटों की संपत्ति खरीद को उनकी अपनी खरीद बताया।
इसलिए IPR को लेकर सामने आए अंतर को फिलहाल रिपोर्टों में उठे सवालों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बिना किसी नियम उल्लंघन को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
उसी कंपनी को मिला ₹115 करोड़ के निवेश प्रोजेक्ट का विशेष पैकेज
29 अक्टूबर को सामने आई एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया कि गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को राजस्थान सरकार की राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS 2019) के तहत अलवर में होटल-रिसॉर्ट परियोजना के लिए विशेष निवेश पैकेज भी मिला था।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त विभाग ने 27 मार्च 2026 को कंपनी के कम से कम ₹115 करोड़ के निवेश वाले प्रस्ताव के लिए पैकेज का आदेश जारी किया था। इसी दिन अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में परिवार के 20 विला की रजिस्ट्री भी हुई थी।
बताई गई योजना के अंतर्गत कंपनी को 10 वर्षों तक जमा राज्य कर की 75 प्रतिशत राशि के बराबर निवेश सब्सिडी और 10 वर्षों तक बिजली शुल्क में 100 प्रतिशत छूट सहित अन्य लाभ दिए जाने का प्रावधान था। परियोजना में 241 लोगों को रोजगार देने का प्रस्ताव भी बताया गया है।
इस समय शिखर अग्रवाल उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत कंपनियों को मिलने वाले लाभों से संबंधित निर्णय में उद्योग विभाग की भूमिका होती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी मात्र से संपत्ति खरीद और निवेश पैकेज के बीच किसी अनुचित लेन-देन या नियम उल्लंघन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस पहलू पर दस्तावेजी जांच महत्वपूर्ण होगी।
सरकार ने APO किया, आदेश में बताया प्रशासनिक कारण
संपत्ति विवाद सार्वजनिक चर्चा में आने के बीच राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग ने 28 अक्टूबर की देर रात शिखर अग्रवाल को APO करने का आदेश जारी किया। आदेश पर शासन के संयुक्त सचिव धीरज कुमार सिंह के हस्ताक्षर बताए गए हैं।
APO यानी Awaiting Posting Orders का अर्थ है कि अधिकारी को नई पदस्थापना के आदेश की प्रतीक्षा में रखा गया है। इसे अपने आप में निलंबन या किसी आरोप में दोषी ठहराए जाने के समान नहीं माना जाना चाहिए।
आदेश में कार्रवाई का कारण प्रशासनिक बताया गया है। उसमें संपत्ति खरीद के विवाद को सीधे तौर पर कार्रवाई का आधार नहीं बताया गया और न ही उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार आदेश में किसी अंतिम जांच निष्कर्ष का उल्लेख है। हालांकि, यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब संपत्तियों की खरीद, लीज आय और सरकारी रिकॉर्ड में विवरण को लेकर सवाल चर्चा में हैं।
शिखर अग्रवाल किन पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे?
APO किए जाने से पहले शिखर अग्रवाल राजस्थान सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे। इनमें उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), सरकारी उपक्रम, निवेश और प्रवासी राजस्थानी मामलों से जुड़े विभाग शामिल थे।
इसके अलावा, वह राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) और राजस्थान राज्य औद्योगिक सहकारी निगम (RAJSICO) से जुड़े प्रमुख पदों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। वह दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़े कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका में थे।
इन पदों को देखते हुए संपत्ति खरीद और निवेश प्रोत्साहन पैकेज से जुड़े सवालों पर दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब आगे क्या होगा?
इस मामले में आगे की स्थिति संपत्ति खरीद के दस्तावेजों, लीज समझौतों, IPR विवरण और निवेश पैकेज से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड के मिलान पर निर्भर करेगी।
जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि संपत्ति का स्वामित्व किसके नाम पर दर्ज है, संबंधित अधिकारियों ने नियमानुसार कौन-कौन से विवरण प्रस्तुत किए और निवेश प्रोत्साहन पैकेज की स्वीकृति किस प्रक्रिया के तहत दी गई। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में APO आदेश के अलावा किसी अंतिम निष्कर्ष या दोषसिद्धि की जानकारी नहीं है।
मामले में किसी भी आरोप को प्रमाणित मानने से पहले संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब और सक्षम प्राधिकरण की जांच सामने आना जरूरी होगा।
