नई दिल्ली | 3 नवंबर 2026
धनतेरस का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में सोने-चांदी और नए बर्तनों की खरीदारी शुरू हो जाती है। इस साल धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन नए बर्तन खरीदने की पुरानी परंपरा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई घरों में धनतेरस पर खरीदे गए खाली बर्तन को घर के अंदर लाना शुभ नहीं माना जाता? धार्मिक मान्यता के अनुसार, नए बर्तन में कुछ भरकर घर लाना सुख-समृद्धि और बरकत का प्रतीक माना जाता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि खाली बर्तन घर लाने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं या परिवार में कंगाली आ जाती है, ऐसी बात का कोई प्रमाण नहीं है। यह अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में प्रचलित धार्मिक एवं लोक-मान्यता है।
खाली बर्तन को क्यों माना जाता है अशुभ?
धार्मिक परंपराओं में खाली बर्तन को अभाव या रिक्तता का प्रतीक माना जाता है। वहीं, भरा हुआ बर्तन अन्न, धन, पोषण और खुशहाली का संकेत देता है। इसी मान्यता के चलते कई परिवार धनतेरस पर नया बर्तन खरीदने के बाद उसमें कुछ न कुछ भरकर घर लाते हैं।
माना जाता है कि इससे घर में पूरे साल अन्न-धन की कमी नहीं होती और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
नए बर्तन में क्या भरकर लाना चाहिए?
अगर आप भी इस धनतेरस पर बर्तन खरीदने जा रहे हैं, तो पारंपरिक मान्यता के अनुसार उसमें ये चीजें रख सकते हैं:
1. चावल: चावल को अन्न और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। नए बर्तन में थोड़े चावल भरकर घर लाना शुभ माना जाता है।
2. गेहूं: गेहूं को अन्न और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। कुछ परिवार नए बर्तन में गेहूं भरकर घर लाते हैं।
3. जल: पानी जीवन और शुद्धता का प्रतीक है। नए पात्र में जल भरना भी शुभ परंपरा मानी जाती है।
4. सिक्के: कुछ लोग नए बर्तन में एक या दो सिक्के डालकर घर लाते हैं। इसे धन और बरकत का प्रतीक माना जाता है।
5. मिठाई: कई परिवार नए बर्तन में मिठाई या गुड़ रखकर घर में प्रवेश करते हैं। इसे शुभ शुरुआत और मिठास का संकेत माना जाता है।
धनतेरस पर क्यों खरीदे जाते हैं नए बर्तन?
धनतेरस को भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा से जोड़कर देखा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन धातु के बर्तन खरीदने की परंपरा भी प्रचलित हुई।
इस अवसर पर लोग अपनी क्षमता के अनुसार सोना, चांदी, पीतल, तांबा या स्टील के बर्तन खरीदते हैं। जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति महंगी वस्तु ही खरीदे। मिट्टी के दीपक या घर में उपयोग आने वाली छोटी वस्तु खरीदकर भी यह परंपरा निभाई जा सकती है।
इंदौर में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त
इंदौर के पंचांग के अनुसार, 6 नवंबर 2026 को धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 17 मिनट से रात 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इस दिन त्रयोदशी तिथि सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी।
मान्यता को समझें, डर के बजाय श्रद्धा से मनाएं त्योहार
धनतेरस का उद्देश्य घर में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करना है। खाली बर्तन घर लाने को लेकर प्रचलित मान्यता को डर या कंगाली की चेतावनी के रूप में नहीं देखना चाहिए। अगर परिवार में यह परंपरा निभाई जाती है, तो नए बर्तन में चावल, गेहूं, जल या सिक्के रखकर घर लाया जा सकता है।
त्योहार का असली संदेश खुशहाली, स्वास्थ्य, स्वच्छता और परिवार के साथ मिलकर शुभ शुरुआत करना है।
