यूएस-ईरान वार्ता में नया गतिरोध: ट्रंप का दावा- ‘परमाणु ईमानदारी’ के लिए जांच को तैयार हुआ ईरान; तेहरान ने किया इनकार, कहा—’कोई नया कमिटमेंट नहीं’

दिनांक: 23 जून, 2026

अंतरराष्ट्रीय डेस्क, वॉशिंगटन/तेहरान:

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक रिजॉर्ट में चल रही उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता के बीच बयानों का एक नया टकराव सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को वापस बुलाने और ‘मेजर वेपन्स इंस्पेक्शन’ के लिए तैयार हो गया है।

हालांकि, इस दावे के तुरंत बाद ईरान के विदेश मंत्रालय और शीर्ष नेतृत्व ने अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने स्पष्ट किया है कि परमाणु मुद्दे पर उनकी तरफ से कोई नई सहमति या प्रतिबद्धता (Commitment) नहीं जताई गई है।

ट्रंप बोले: ‘परमाणु ईमानदारी’ के लिए जांच जरूरी, गड़बड़ी की तो भुगतना होगा अंजाम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट लिखकर इस बातचीत में बड़ी प्रगति होने का दावा किया। ट्रंप ने लिखा:

“हर कोई इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि भविष्य में ‘परमाणु ईमानदारी’ (Nuclear Honesty) सुनिश्चित करने के लिए ईरान बड़े हथियारों के निरीक्षण (Major Weapons Inspections) की अनुमति देने पर सहमत होगा।”

बाद में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कड़े लहजे में यह भी जोड़ दिया, “अगर ईरान ने अपने वादे का पालन नहीं किया या उसका व्यवहार ठीक नहीं रहा, तो मुझे जो करना पड़ेगा (सैन्य कार्रवाई), मैं वह बिल्कुल करूँगा।”

इसी तर्ज पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी स्विट्जरलैंड में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद से बंद पड़े निरीक्षणों को दोबारा शुरू करने पर सहमति बनना अमेरिकी जनता के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को स्थायी रूप से रोकने की दिशा में पहला कदम है।

ईरान का पलटवार: ‘परमाणु मुद्दे पर अभी असली बातचीत शुरू ही नहीं हुई’

तेहरान ने घरेलू स्तर पर होने वाली आलोचनाओं और दबाव को देखते हुए अमेरिकी दावों पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है।

  • विदेश मंत्रालय का खंडन: ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ कहा कि स्विट्जरलैंड में 18 घंटे चली मैराथन बैठक में केवल ‘इस्लामाबाद समझौता’ (MoU) के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई है। परमाणु निगरानी को लेकर कोई भी नया आश्वासन नहीं दिया गया है।
  • अंतिम फैसला सुरक्षा परिषद का: मुख्य ईरानी वार्ताकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी परमाणु समझौते का भविष्य ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (Supreme National Security Council) और सैन्य नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही तय होगा।
  • शर्तों पर अड़ा तेहरान: ईरान का कहना है कि वे परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत तभी आगे बढ़ाएंगे जब अमेरिका उनके तेल निर्यात पर से प्रतिबंध पूरी तरह हटाएगा और कतर के बैंकों में सीज किए गए अरबों डॉलर के ईरानी फंड को पूरी तरह अनफ्रीज (बहाल) कर देगा।

क्या है विवाद की मुख्य वजह और आगे की राह?

पिछले सप्ताह 17 जून 2026 को दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम समझौते (Islamabad MoU) के तहत अमेरिका को 60 दिनों के लिए ईरान के तेल पर से प्रतिबंध हटाना था, जिसके बदले ईरान को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का समुद्री मार्ग व्यापार के लिए खोलना था।

पेंच कहाँ फंसा है?: अमेरिका का कहना है कि इस 60 दिनों की समयसीमा के भीतर ही आईएईए (IAEA) के निरीक्षकों को ईरान के उन परमाणु ठिकानों (जैसे नतांज और फोर्डो) के भीतर जाने की अनुमति मिलनी चाहिए, जिन पर पिछले दिनों हमले हुए थे। अमेरिका यह देखना चाहता है कि ईरान ने वहां यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) दोबारा शुरू किया है या नहीं। दूसरी ओर, ईरान इस निरीक्षण को अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है और वह पहले आर्थिक प्रतिबंधों को स्थायी रूप से खत्म कराना चाहता है। दोनों देशों के बीच उपजा यह विरोधाभास दर्शाता है कि आने वाले दिनों में यह शांति वार्ता बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली है।

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